इंडोनेशिया: महज 24 घंटे के भीतर तीन बड़े भूकंपों ने इंडोनेशिया में दहशत पैदा कर दी। इनमें फ्लोरेस द्वीप के पास आया 7.7 तीव्रता का भूकंप सबसे शक्तिशाली था। इसके बाद 230 से ज्यादा आफ्टरशॉक्स दर्ज किए गए। तेज झटकों के चलते सुनामी की चेतावनी भी जारी करनी पड़ी। कुछ ही घंटों बाद उत्तरी सुमात्रा में 6.9 तीव्रता का भूकंप आया और फिर करीब 600 मील दूर 5.7 तीव्रता का तीसरा भूकंप दर्ज किया गया। फ्लोरेस द्वीप पर आए शक्तिशाली भूकंप से भारी तबाही हुई है। अब तक 51 लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों घर बर्बाद हो गए हैं। लगातार आए इन झटकों ने एक बार फिर इंडोनेशिया को दुनिया के सबसे अधिक भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में शामिल होने की वजह सामने ला दी है।
इंडोनेशिया की धरती के नीचे आखिर क्या हो रहा है?
इंडोनेशिया में बार-बार आने वाले भूकंपों की वजह जमीन के ऊपर नहीं, बल्कि धरती की सतह से कई किलोमीटर नीचे मौजूद भूगर्भीय संरचना में छिपी है। यह देश ऐसे क्षेत्र में स्थित है, जहां कई विशाल टेक्टोनिक प्लेटें लगातार एक-दूसरे से टकराती, खिसकती और एक-दूसरे के नीचे धंसती रहती हैं। प्लेटों की इसी लगातार गतिविधि के कारण यहां भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियां भी आम हैं।
ऑस्ट्रेलियाई और सुंडा प्लेट के बीच चल रही बड़ी हलचल
इंडोनेशिया मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलियाई प्लेट, सुंडा प्लेट, प्रशांत प्लेट और फिलीपीन सी प्लेट के जटिल संपर्क क्षेत्र में स्थित है। खास तौर पर पूर्वी इंडोनेशिया में ऑस्ट्रेलियाई प्लेट और सुंडा प्लेट की गतिविधियां बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऑस्ट्रेलियाई प्लेट लगातार उत्तर की ओर बढ़ रही है और कई जगहों पर सुंडा प्लेट के नीचे धंस रही है। भूगर्भ विज्ञान में इस प्रक्रिया को सबडक्शन कहा जाता है।
सबडक्शन के दौरान दोनों प्लेटें हमेशा आसानी से आगे नहीं बढ़तीं। कई बार उनके बीच का संपर्क क्षेत्र लॉक हो जाता है। ऐसी स्थिति में प्लेटों की गति थम जाती है, लेकिन चट्टानों के भीतर तनाव लगातार जमा होता रहता है। यह तनाव वर्षों, दशकों और कुछ मामलों में सदियों तक बढ़ सकता है। जब चट्टानें इस दबाव को सहने की अपनी सीमा पार कर जाती हैं, तो फॉल्ट अचानक टूट जाता है। इसी दौरान जमा ऊर्जा भूकंपीय तरंगों के रूप में बाहर निकलती है और धरती पर भूकंप के झटके महसूस होते हैं।
7.7 तीव्रता वाला भूकंप इतना खतरनाक क्यों था?
फ्लोरेस द्वीप के पास आया 7.7 तीव्रता का भूकंप इसलिए ज्यादा चिंताजनक था, क्योंकि इसका केंद्र समुद्र के नीचे अपेक्षाकृत कम गहराई पर था। आम तौर पर उथले भूकंपों की ऊर्जा सतह तक कम दूरी तय करके पहुंचती है। इससे जमीन पर कंपन ज्यादा तेज हो सकता है और नुकसान की आशंका बढ़ जाती है।
समुद्र के नीचे आने वाला शक्तिशाली भूकंप अगर समुद्र तल को पर्याप्त रूप से ऊपर या नीचे की ओर खिसका दे, तो सुनामी पैदा हो सकती है। यही वजह है कि समुद्र के नीचे बड़े भूकंप के बाद सुनामी की चेतावनी बेहद अहम हो जाती है।
230 से ज्यादा आफ्टरशॉक्स ने बढ़ाई परेशानी
मुख्य भूकंप के बाद आने वाले छोटे-बड़े झटकों को आफ्टरशॉक्स कहा जाता है। बड़े भूकंप के बाद फॉल्ट के आसपास तनाव का संतुलन बदल जाता है। आसपास की चट्टानें बदले हुए दबाव के अनुरूप खुद को समायोजित करती हैं। इसी प्रक्रिया के दौरान लगातार अतिरिक्त झटके महसूस हो सकते हैं।
आफ्टरशॉक्स कुछ घंटों तक ही सीमित रहें, ऐसा जरूरी नहीं है। वे कई दिनों, हफ्तों और कुछ मामलों में महीनों तक भी जारी रह सकते हैं। इंडोनेशिया में 7.7 तीव्रता के भूकंप के बाद 230 से ज्यादा आफ्टरशॉक्स दर्ज होना इसी भूगर्भीय गतिविधि का हिस्सा है।
फ्लोरेस क्षेत्र में पहले भी मची थी ऐसी तबाही
फ्लोरेस और इसके आसपास का इलाका पहले भी विनाशकारी भूकंपों का सामना कर चुका है। वर्ष 1992 में इसी व्यापक क्षेत्र में 7.5 तीव्रता का भूकंप आया था। इस भूकंप के बाद विनाशकारी सुनामी पैदा हुई थी, जिसमें भारी तबाही हुई और बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी।
इस इतिहास की वजह से फ्लोरेस क्षेत्र में रहने वाली आबादी के लिए भूकंप और सुनामी का खतरा नया नहीं है। मौजूदा घटनाओं ने एक बार फिर इस क्षेत्र की भूकंपीय संवेदनशीलता को सामने ला दिया है।
पैसिफिक रिंग ऑफ फायर से भी जुड़ा है खतरा
इंडोनेशिया की भूकंपीय सक्रियता को समझने के लिए पैसिफिक रिंग ऑफ फायर को समझना भी जरूरी है। यह प्रशांत महासागर के चारों ओर फैला एक विशाल घोड़े की नाल के आकार का क्षेत्र है, जहां कई टेक्टोनिक प्लेटों की सीमाएं मौजूद हैं। दुनिया के बड़े हिस्से में होने वाली भूकंपीय और ज्वालामुखीय गतिविधियों का संबंध इसी व्यापक क्षेत्र से है।
इस लिहाज से 15 अगस्त को आए भूकंप केवल एक स्थानीय घटना नहीं हैं। ये उस लगातार चल रही भूगर्भीय हलचल की तस्वीर पेश करते हैं, जो इंडोनेशिया की धरती के नीचे लंबे समय से सक्रिय है। जब तक टेक्टोनिक प्लेटों की टक्कर और एक-दूसरे के नीचे धंसने की प्रक्रिया जारी रहेगी, तब तक इस इलाके में शक्तिशाली भूकंप की आशंका भी बनी रहेगी।
वैज्ञानिक भूकंप को रोक नहीं सकते, लेकिन बेहतर निगरानी व्यवस्था, मजबूत इमारतों, समय पर सुनामी चेतावनी और लोगों की तैयारी के जरिए ऐसे प्राकृतिक हादसों से होने वाली तबाही को काफी हद तक कम किया जा सकता है।