क्या आपका दिमाग भी कभी चुप नहीं होता?
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ‘ओवरथिंकिंग’ एक ऐसी साइलेंट बीमारी बन गई है, जो अंदर ही अंदर हमें खोखला कर रही है। कल क्या होगा? पुराने कल में क्या हुआ था? यही सवाल हमें चैन की नींद सोने नहीं देते। लेकिन हालिया हेल्थ रिपोर्ट्स और एक्सपर्ट्स की मानें तो, कुछ छोटी-छोटी डेली हैबिट्स इस मेंटल ट्रैप को तोड़ सकती हैं।
अगर आप भी ‘ओवरथिंकिंग’ के चक्रव्यूह में फंसे रहते हैं, तो ये हेल्थ एक्सपर्ट्स के 5 तरीके आपके लिए गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं:
अपने थॉट्स को लॉक करना सीखें
जब दिमाग में थॉट्स का ट्रैफिक बढ़ जाए, तो उन्हें कागज़ पर उतार दें। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि जब हम अपनी चिंताएं लिख लेते हैं, तो दिमाग उन्हें ‘प्रोसेस’ कर लेता है और फिर वो हमें उतनी डरावनी नहीं लगतीं जितना हम उसे सोच के बना देते है।
पिछला छोड़ ‘अभी’ में लौटें
ओवरथिंकिंग अक्सर या तो बीते हुए कल में होती है या आने वाले कल में। प्रेजेंट में रहने के लिए ‘माइंडफुलनेस’ का सहारा लें। गहरी सांसें लेना या अपने आस-पास की 5 चीज़ों पर फोकस करना आपको तुरंत रिलैक्स महसूस कराएगा।
परफेक्शन का जुनून छोड़ें
हर चीज़ को परफेक्ट बनाने की ज़िद ही ओवरथिंकिंग को जन्म देती है। ये स्वीकार करें कि गलतियां इंसान से ही होती हैं। खुद पर सख्ती कम करें और अपनी खामियों के साथ खुद को एक्सेप्ट करना सीखें जो आपको हेल्प करेगा ‘ओवरथिंकिंग’ को रोकने में।
एक्टिविटी है सबसे बड़ा इलाज
एक्सपर्ट्स कहते है की खाली दिमाग शैतान का घर माना जाता है। जब भी मन ज़्यादा भटकने लगे, तो तुरंत कोई फिजिकल काम शुरू कर दें चाहे वह घर की सफाई हो, वॉक पर जाना हो या कोई गाना सुनना। शरीर के एक्टिव होते ही दिमाग शांत होने लगता है।
गहरी सांसों का जादू
तनाव के दौरान हमारी सांसें तेज़ और कम हो जाती हैं। दिन में कम से कम 3 बार ‘बॉक्स ब्रीदिंग’ करे मतलव (4 सेकंड सांस लेना, 4 सेकंड रोकना, 4 सेकंड छोड़ना) की प्रैक्टिस करें। ये आपके स्ट्रेस हार्मोन को तुरंत कम करता है। एक्सपर्ट्स कहते है की ओवरथिंकिंग को रोकने का मतलब सोचना बंद करना नहीं है, बल्कि ‘फालतू’ सोचना बंद करना है।
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