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खामेनेई को दफनाने के वक्त क्यों गायब रहेंगे उनके बेटे मुज्तबा? शिया कानूनों के बीच खड़े हुए ये 2 बड़े सवाल, जानिए इनसाइड स्टोरी

तेहरान। इस साल 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका के कथित हमलों में मारे गए अयातुल्ला अली खामेनेई के शव को पिछले 4 महीनों से बेहद सुरक्षित और सीक्रेट जगह पर रखा गया था। अब अमेरिका के साथ हुए एक आंतरिक समझौते के बाद ईरान उन्हें स-सम्मान दफनाने जा रहा है।

लेकिन इसी बीच ईरान के नव-निर्वाचित तीसरे सुप्रीम लीडर ने भारी सुरक्षा खतरों को देखते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत खामेनेई के रसूखदार बेटे मुज्तबा खामेनेई इस पूरी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होंगे। इस फैसले ने दुनिया भर के विचारकों और इस्लामिक जानकारों के बीच दो बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं:

  1. पहला सवाल: अगर मुज्तबा अंतिम विदाई के वक्त मौजूद नहीं रहेंगे, तो दफनाने के दौरान कब्र में पहली 3 मुट्ठी मिट्टी देने की रस्म कौन निभाएगा?
  2. दूसरा सवाल: आखिरकार अयातुल्ला अली खामेनेई के इस पवित्र ‘मृतक शरीर का उत्तराधिकारी’ (Wali) किसे बनाया गया है?

शिया इस्लामी कानून: कौन होता है ‘शव का उत्तराधिकारी’?

प्रसिद्ध शिया धर्मगुरु अली सिस्तानी के फतवे के आधार पर ‘इमाम फाउंडेशन’ द्वारा लिखित पुस्तक ‘मृत्यु और दफनाने के इस्लामी कानून’ के मुताबिक, किसी भी व्यक्ति की मृत्यु के तुरंत बाद उसके शरीर के कानूनी और धार्मिक उत्तराधिकारी की व्यवस्था की जाती है:

  • नियम क्या है? यदि किसी पुरुष का निधन होता है, तो उसके बड़े बेटे को उसके शव का उत्तराधिकारी माना जाता है। सुपुर्द-ए-खाक (दफनाने) की पूरी जिम्मेदारी उसी की होती है।
  • विकल्प क्या है? यदि परिवार का कोई पुरुष सदस्य मौजूद न हो, तो करीबी रिश्तेदार और उनके भी न होने पर स्थानीय इमाम को शव का उत्तराधिकारी नियुक्त किया जाता है।

मुज्तबा नहीं तो कौन निभाएगा रस्म? ये है ईरान का बैकअप प्लान

ईरान सरकार ने आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं किया है कि खामेनेई के शव का उत्तराधिकारी कौन है, लेकिन जानकारों का मानना है कि 4 महीने से शव सुरक्षित रखने के दौरान ही यह व्यवस्था कर ली गई थी।

  • बाकी 3 बेटे संभालेंगे कमान: मुज्तबा भले ही सुरक्षा कारणों से सामने न आएं, लेकिन अली खामेनेई के तीन और बेटे हैं। उनके सबसे बड़े बेटे मुस्तफा खामेनेई न सिर्फ जीवित हैं, बल्कि वे खुद एक प्रतिष्ठित इमाम भी हैं। संभावना जताई जा रही है कि दफन की मुख्य प्रक्रिया और पहली 3 मुट्ठी मिट्टी देने की रस्म मुस्तफा ही निभाएंगे।
  • पूरी प्रक्रिया: शिया रीति-रिवाजों के अनुसार शव को बिना गर्म पानी के नहलाने, पूरे शरीर पर विश्वासियों द्वारा कपूर का विशेष लेप लगाने, कफन पहनाने और जनाजे की नमाज के बाद शव का चेहरा काबा की तरफ करके कब्र में उतारा जाएगा।

सीक्रेट लोकेशन से संदेश जारी कर सकते हैं मुज्तबा

इस्लामिक नियमों के मुताबिक, सुपुर्द-ए-खाक के बाद पढ़ी जाने वाली ‘फातिहा’ (प्रार्थना) को दुनिया के किसी भी कोने से पढ़ा जा सकता है। ऐसे में मुज्तबा खामेनेई किसी अज्ञात और सुरक्षित स्थान से ही अपने पिता की याद में फातिहा पढ़ेंगे और देश के नाम एक लिखित या वीडियो शोक संदेश जारी कर सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, हालात पूरी तरह सामान्य होने के बाद ही मुज्तबा अपने पिता की मजार (कब्र) पर हाजिरी लगाने मशहद पहुंचेंगे।

news desk

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