आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, ऑफिस का स्ट्रेस और बिगड़ा हुआ लाइफस्टाइल ये सब हमारी रूटीन का हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कभी-कभी शरीर में होने वाली हल्की सी हलचल या चंद मिनटों की कमजोरी किसी बड़े खतरे का अलार्म हो सकती है? हेल्थ एक्सपर्ट्स ने हाल ही में एक ऐसी ही साइलेंट बीमारी को लेकर चेतावनी जारी की है, जिसे मेडिकल की भाषा में TIA “Transient Ischemic Attack” और आम बोलचाल में ‘मिनी स्ट्रोक’ कहा जाता है।
अक्सर लोग इसके लक्षणों को ‘थकान’ या ‘कमजोरी’ समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर एक बड़े और जानलेवा ब्रेन स्ट्रोक का कारण बन सकता है। आइए जानते हैं कि आखिर यह मिनी स्ट्रोक क्या है और इससे कैसे बचा जा सकता है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मिनी स्ट्रोक तब होता है जब दिमाग के किसी हिस्से में ब्लड सर्कुलेशन ‘खून की सप्लाई’ कुछ मिनटों या घंटों के लिए रुक जाती है। हालांकि, यह मुख्य स्ट्रोक की तरह दिमाग को तुरंत कोई बड़ा या स्थायी नुकसान नहीं पहुंचाता और इसके लक्षण भी कुछ ही देर में अपने आप ठीक हो जाते हैं।
लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि इसे “शॉर्ट-टर्म प्रॉब्लम” समझने की गलती बिल्कुल न करें; यह असल में एक ‘वेक-अप कॉल’ है कि आपके शरीर में सब कुछ ठीक नहीं है।
मिनी स्ट्रोक के लक्षण अचानक आते हैं। एक्सपर्ट्स इसके लक्षणों को पहचानने के लिए FAST फॉर्मूले को याद रखने की सलाह देते हैं:
इसके अलावा अचानक धुंधला दिखाई देना, चक्कर आना या बिना किसी वजह के तेज सिरदर्द होना भी इसके लक्षण हो सकते हैं।
बदलते दौर में यह समस्या सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
डॉक्टर्स का कहना है की “मिनी स्ट्रोक का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि इसके लक्षण 10 से 15 मिनट में गायब हो जाते हैं और मरीज को लगता है कि वह अब बिल्कुल ठीक है। लेकिन आंकड़ों के मुताबिक, मिनी स्ट्रोक का शिकार हुए मरीजों में से कई लोगों को अगले कुछ दिनों या हफ्तों के भीतर एक बड़ा और गंभीर स्ट्रोक आने का खतरा रहता है। इसलिए, लक्षणों के ठीक होने का इंतजार न करें, बल्कि इसे एक मेडिकल इमरजेंसी मानकर तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करें।”
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