नई दिल्ली: आधुनिक जीवनशैली में घंटों कुर्सी पर बैठकर काम करना आम बात हो गई है। इसका असर धीरे-धीरे शरीर की लचक, संतुलन और जोड़ों की सक्रियता पर पड़ने लगता है। ऐसे में विशेषज्ञों के अनुसार उकड़ू बैठना (डीप स्क्वाट) एक प्राकृतिक मुद्रा है, जो शरीर के कई हिस्सों को सक्रिय रखने में मदद कर सकती है। यदि आपकी सेहत सामान्य है और डॉक्टर ने कोई विशेष परहेज नहीं बताया है, तो रोज कुछ मिनट इस मुद्रा में बैठना लाभकारी हो सकता है।
उकड़ू बैठने के दौरान हिप्स, घुटनों और टखनों के जोड़ अपनी पूरी क्षमता के साथ काम करते हैं। नियमित अभ्यास से इन जोड़ों की लचक और मूवमेंट बेहतर बनाए रखने में सहायता मिल सकती है। यह मुद्रा शरीर के निचले हिस्से की कार्यक्षमता को मजबूत करने में भी सहायक मानी जाती है।
इस मुद्रा में बैठने पर जांघों, कूल्हों, पिंडलियों और पेट की मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं। इससे शरीर का संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है और निचले हिस्से की मांसपेशियां मजबूत होने लगती हैं।
उकड़ू बैठना शरीर के संतुलन का भी अभ्यास है। यदि इसे सही तरीके से किया जाए तो शरीर की स्थिरता, समन्वय क्षमता और संतुलन बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
जो लोग लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करते हैं, उनके हिप्स और टखनों में जकड़न की समस्या हो सकती है। ऐसे में बीच-बीच में कुछ मिनट उकड़ू बैठना राहत देने में मददगार साबित हो सकता है। हालांकि इसे लंबे समय तक बैठे रहने का विकल्प नहीं माना जा सकता और समय-समय पर चलना-फिरना भी जरूरी है।
उकड़ू बैठते समय रीढ़ को सीधा रखने और शरीर का संतुलन बनाए रखने का प्रयास करना पड़ता है। नियमित अभ्यास सही बैठने की आदत विकसित करने और शरीर की मुद्रा में सुधार लाने में मदद कर सकता है।
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