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Gen Z का नया वर्क फॉर्मूला! ‘एफर्ट रिसेशन’ क्यों बन रहा ट्रेंड, जानिए क्यों बदल रही है काम करने की पूरी सोच

नई दिल्ली: दफ्तरों में काम करने का तरीका तेजी से बदल रहा है और इसकी सबसे बड़ी वजह नई पीढ़ी यानी Gen Z मानी जा रही है। लंबे समय तक ऑफिस में रुकना, तय जिम्मेदारियों से अधिक काम करना या हर समय उपलब्ध रहना अब सफलता की पहचान नहीं माना जा रहा। इसकी जगह एक नया ट्रेंड तेजी से चर्चा में है, जिसे ‘एफर्ट रिसेशन’ कहा जा रहा है। इस बदलते कार्य व्यवहार ने कंपनियों के साथ-साथ विशेषज्ञों का भी ध्यान अपनी ओर खींचा है।

क्या है ‘एफर्ट रिसेशन’ का नया ट्रेंड?

नई पीढ़ी के युवा अब काम और निजी जीवन के बीच संतुलन को अधिक महत्व दे रहे हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते इस्तेमाल के साथ कार्य संस्कृति भी बदल रही है। इसी बदलाव को ‘एफर्ट रिसेशन’ नाम दिया गया है। इसका मतलब है कि कर्मचारी अब अपनी निर्धारित जिम्मेदारियों से आगे बढ़कर अतिरिक्त काम करने में पहले जैसी रुचि नहीं दिखा रहे हैं।

रिपोर्ट में क्या सामने आया?

एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वे में शामिल 380 भारतीय कंपनियों में से 240 यानी करीब 63 प्रतिशत कंपनियों ने माना कि पिछले वर्ष की तुलना में कर्मचारियों के अतिरिक्त प्रयासों में कमी आई है। औसतन इसमें 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

रिपोर्ट के अनुसार, अतिरिक्त प्रयास का मतलब बिना कहे देर तक काम करना, अपनी जिम्मेदारियों से बाहर जाकर किसी समस्या का समाधान करना या स्वेच्छा से अतिरिक्त जिम्मेदारी उठाना है। यानी केवल निर्धारित काम पूरा करने और उससे आगे बढ़कर योगदान देने के बीच का अंतर।

Gen Z किन बातों को दे रही प्राथमिकता?

रिपोर्ट के अनुसार, भारत की कुल कार्यबल में Gen Z की हिस्सेदारी अब 26 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो 2023 की तुलना में लगभग दोगुनी है। यह पीढ़ी लंबे समय तक काम करने की बजाय लचीले कार्य वातावरण, नई चीजें सीखने के अवसर, करियर में आगे बढ़ने की संभावनाएं, सार्थक काम और मानसिक स्वास्थ्य को अधिक महत्व दे रही है।

किन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा दिखा असर?

रिपोर्ट में बताया गया कि अलग-अलग क्षेत्रों पर इसका प्रभाव अलग-अलग रहा। सबसे अधिक असर रिटेल सेक्टर में देखने को मिला, जहां 88 प्रतिशत कंपनियों ने कर्मचारियों के अतिरिक्त प्रयास में कमी दर्ज की। इसके बाद आईटी और प्रोफेशनल सर्विसेज में 77 प्रतिशत तथा कंस्ट्रक्शन और रियल एस्टेट सेक्टर में 71 प्रतिशत कंपनियों ने ऐसी गिरावट की जानकारी दी। वहीं मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में रहा, जहां केवल 44 प्रतिशत कंपनियों ने ऐसी कमी दर्ज की।

बॉस का व्यवहार क्यों बन रहा बड़ा कारण?

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि जब कर्मचारियों को महसूस होता है कि उनके वरिष्ठ वास्तव में उनकी परवाह करते हैं, तो 99 प्रतिशत कर्मचारी अतिरिक्त प्रयास करने के लिए तैयार रहते हैं। वहीं यदि उन्हें ऐसा महसूस नहीं होता, तो यह आंकड़ा घटकर 29 प्रतिशत रह जाता है।

इसी तरह प्रेरणादायक नेतृत्व मिलने पर 98 प्रतिशत कर्मचारी अपेक्षा से अधिक योगदान देने के लिए तैयार रहते हैं, जबकि प्रेरणा की कमी होने पर यह संख्या सिर्फ 32 प्रतिशत रह जाती है।

विशेषज्ञ ने बताया क्यों बदल रही है सोच

विशेषज्ञ के अनुसार, यदि कार्यनिष्ठा का मतलब देर तक ऑफिस में रुकना, हमेशा व्यस्त दिखना और हर काम के लिए तुरंत तैयार रहना है, तो यह सोच निश्चित रूप से बदल रही है। लेकिन यदि कार्यनिष्ठा का अर्थ बेहतर परिणाम देना, समस्याओं का समाधान करना और टीम के साथ प्रभावी सहयोग करना है, तो उसमें कोई कमी नहीं आई है।

उनका कहना है कि Gen Z केवल व्यस्त दिखने के बजाय सार्थक काम करना चाहती है। तकनीक ने भी कार्य संस्कृति को बदला है और अब कई युवा मानते हैं कि उनकी पहचान काम के घंटों से नहीं, बल्कि परिणामों और योगदान से होनी चाहिए।

बिना बर्नआउट के बेहतर प्रदर्शन कैसे संभव?

विशेषज्ञों का मानना है कि स्वस्थ कार्यस्थल केवल नीतियों से नहीं, बल्कि नेतृत्व के व्यवहार से बनता है। यदि वरिष्ठ कर्मचारी के बेहतर प्रदर्शन, टीमवर्क और गुणवत्ता को महत्व दें तथा भरोसे और सहयोग का माहौल तैयार करें, तो कर्मचारी अतिरिक्त दबाव के बिना भी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकते हैं।

 

vineet verma

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