नई दिल्ली: 40 वर्ष की उम्र के बाद शरीर में कई ऐसे बदलाव शुरू होने लगते हैं, जिनके शुरुआती संकेत अक्सर दिखाई नहीं देते। यही वजह है कि इस उम्र के बाद नियमित स्वास्थ्य जांच बेहद जरूरी मानी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि हेल्थ स्क्रीनिंग का उद्देश्य केवल बीमारी का पता लगाना नहीं, बल्कि संभावित जोखिमों की समय रहते पहचान कर उन्हें गंभीर होने से रोकना भी है।
40 की उम्र के बाद क्यों जरूरी हो जाती है नियमित हेल्थ स्क्रीनिंग?
विशेषज्ञों के अनुसार, इस उम्र के बाद शरीर की कार्यप्रणाली में धीरे-धीरे बदलाव आने लगते हैं। ऐसे में नियमित जांच से डायबिटीज, हृदय रोग, किडनी संबंधी समस्याओं और अन्य गंभीर बीमारियों के खतरे को शुरुआती स्तर पर ही पहचाना जा सकता है।
ब्लड प्रेशर, वजन और कमर की माप जरूर कराएं
40 वर्ष के बाद महिलाओं और पुरुषों दोनों को नियमित रूप से ब्लड प्रेशर, वजन, बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) और कमर की माप की जांच करानी चाहिए। हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ता वजन और पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी आगे चलकर डायबिटीज, हृदय रोग, स्ट्रोक और किडनी संबंधी बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकती है।
डायबिटीज की जांच को न करें नजरअंदाज
इस उम्र के बाद फास्टिंग ब्लड शुगर और HbA1c टेस्ट कराना जरूरी माना जाता है। खासतौर पर उन लोगों के लिए जिनके परिवार में डायबिटीज का इतिहास हो, वजन अधिक हो, पेट निकला हुआ हो, जीवनशैली कम सक्रिय हो या महिलाओं में पहले पीसीओएस की समस्या रही हो। कई बार डायबिटीज लंबे समय तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित करती रहती है।
कोलेस्ट्रॉल टेस्ट भी है बेहद जरूरी
40 वर्ष के बाद लिपिड प्रोफाइल की जांच नियमित रूप से करानी चाहिए। इसमें एलडीएल, एचडीएल और ट्राइग्लिसराइड के स्तर की जांच से हृदय रोग के जोखिम का आकलन करने में मदद मिलती है।
रूटीन ब्लड टेस्ट भी कराएं
विशेषज्ञों के मुताबिक, समय-समय पर सामान्य रक्त जांच, लिवर फंक्शन टेस्ट, किडनी फंक्शन टेस्ट, यूरिन टेस्ट, थायरॉयड जांच और जरूरत के अनुसार विटामिन डी व विटामिन बी12 की जांच भी करानी चाहिए। ये जांचें शरीर में खून की कमी, संक्रमण, पोषण संबंधी कमियों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का शुरुआती संकेत दे सकती हैं।
महिलाओं के लिए ये जांचें हैं बेहद अहम
40 वर्ष के बाद महिलाओं को नियमित रूप से मेमोग्राफी कराने की सलाह दी जाती है। यदि स्तन में गांठ महसूस हो या परिवार में स्तन कैंसर का इतिहास रहा हो, तो डॉक्टर पहले भी जांच की सलाह दे सकते हैं।
इसके अलावा सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए Pap Smear और HPV टेस्ट भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। लंबे समय से स्त्री रोग संबंधी जांच नहीं कराने वाली महिलाओं को इसे टालना नहीं चाहिए।
बोन डेंसिटी टेस्ट भी हो सकता है जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार, रजोनिवृत्ति के आसपास महिलाओं को बोन डेंसिटी की जांच की आवश्यकता पड़ सकती है। खासकर यदि कैल्शियम और विटामिन डी की कमी हो, समय से पहले रजोनिवृत्ति हुई हो या लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं का उपयोग किया गया हो।