केंद्र सरकार ने देश की पहली डिजिटल जनगणना 2027 के ‘जनसंख्या गणना’ (Population Enumeration) चरण के लिए प्रक्रिया तेज कर दी है। रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त द्वारा जारी अधिसूचना (Notification) के अनुसार, इस बार नागरिकों से कुल 40 सवाल पूछे जाएंगे।
वही कांग्रेस ने कहा कि काफ़ी उम्मीद थी कि जाति से जुड़ा सवाल राज्य-वार पहले से तैयार सूची के आधार पर पूछा जाएगा, जैसा कि बिहार और तेलंगाना में जाति सर्वेक्षणों के दौरान किया गया था, और जवाब को बस सही जगह पर टिक करना होता। अफ़सोस की बात है कि ऐसा नहीं हुआ, जिससे इसके मकसद पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
आजादी के बाद पहली बार इस जनगणना में व्यापक स्तर पर जातिगत आंकड़े (Caste Data) जुटाए जाएंगे। इसके अलावा, स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी के तहत कोविड-19 टीकाकरण (Covid Vaccine) से संबंधित सवाल भी शामिल किए गए हैं।
1. जातिगत आंकड़े और कोविड वैक्सीन पर मुख्य फोकस
जनगणना 2027 के इस चरण में डेटा कलेक्शन के दायरे को और विस्तृत किया गया है:
- जातिगत विवरण: नागरिकों से पूछा जाएगा कि वे अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) से संबंधित हैं या नहीं, और उनकी सटीक जाति क्या है।
- कोरोना वैक्सीन ट्रैकिंग: पहली बार लोगों से यह जानकारी मांगी जाएगी कि उन्होंने कोविड-19 का टीका किस केंद्र या स्थान पर लगवाया था।
- राजनीतिक घमासान: जातिगत आंकड़ों को शामिल किए जाने के फैसले को लेकर विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
2. कब और कहाँ शुरू होगी गणना? (Schedule & Timelines)
देश के अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों के आधार पर जनगणना दो अलग-अलग समयसीमाओं में आयोजित की जाएगी:
बर्फीले एवं दुर्गम क्षेत्र (लद्दाख, J&K, हिमाचल, उत्तराखंड)
- सेल्फ-एन्युमरेशन (Self-Online): 17 अगस्त से 31 अगस्त 2026 तक नागरिक खुद ऑनलाइन अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे।
- ऑन-ग्राउंड गणना: 1 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक।
- देश के अन्य सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में पूरी की जाएगी।
3. दो चरणों में होगी देश की पहली ‘डिजिटल जनगणना’
यह भारत की 16वीं जनगणना और आजादी के बाद 8वीं जनगणना है। 2021 में प्रस्तावित जनगणना कोविड महामारी के कारण स्थगित कर दी गई थी।
- पहला चरण: मकान सूचीकरण और आवास संबंधी आंकड़े (House Listing & Housing Census)।
- दूसरा चरण: व्यक्तिगत, जनसांख्यिकीय और सामाजिक-आर्थिक विवरण (Population Enumeration)।
- डिजिटल पहल: इस बार कागजी कार्रवाई के बजाय मोबाइल ऐप के जरिए डेटा एकत्र किया जाएगा और नागरिकों को खुद ऑनलाइन विवरण भरने की भी सुविधा मिलेगी।