नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष का असर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार पर दिखाई दे रहा है। क्रूड ऑयल की कीमतों में लगातार दूसरे दिन तेजी दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड 106 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 93 डॉलर के स्तर से ऊपर चला गया। सप्लाई में सुधार के संकेतों के बावजूद बाजार में आपूर्ति बाधित होने की आशंका बनी हुई है, जिसने कीमतों पर दबाव बढ़ा दिया है।
मंगलवार सुबह ब्रेंट क्रूड 106.86 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। वहीं, डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमत बढ़कर 93.86 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर मध्य पूर्व से कच्चे तेल के निर्यात में सुधार के बावजूद बाजार में कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?
निर्यात बढ़ा, फिर भी सप्लाई का डर क्यों?
ऑयल एनालिटिक्स फर्म क्पलर के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में मध्य पूर्व से कच्चे तेल का निर्यात बढ़कर 12.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन हो गया है। फरवरी के बाद यह सबसे ऊंचा स्तर है। इस बढ़ोतरी में सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से बढ़े तेल शिपमेंट की अहम भूमिका रही है।
इसके बावजूद बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता कम नहीं हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने निवेशकों की आशंकाएं बढ़ा दी हैं। बाजार इस बात को लेकर सतर्क है कि अगर तनाव और बढ़ा तो कच्चे तेल की आपूर्ति और उसके परिवहन पर असर पड़ सकता है।
होर्मुज की खाड़ी पर टिकी बाजार की नजर
मध्य पूर्व के मौजूदा तनाव में होर्मुज की खाड़ी सबसे अहम बिंदुओं में से एक है। यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। यहां किसी तरह की बाधा की आशंका भी कच्चे तेल की कीमतों पर तत्काल असर डाल सकती है।
यह संघर्ष फरवरी के अंत में शुरू हुआ था और करीब सात महीने से जारी है। इसी बीच अमेरिका और ईरान के अधिकारियों के बीच मध्यस्थों के जरिए बातचीत भी शुरू हुई है। यह चर्चा पिछले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ईरान की ओर से रखे गए सात दिन के शांति प्रस्ताव में संशोधन पर केंद्रित रहने की उम्मीद है।
क्या फिर बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?
कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी से पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका जरूर बनती है, लेकिन उपलब्ध जानकारी में यह नहीं बताया गया है कि भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें तत्काल बढ़ाई जाएंगी।
फिलहाल बाजार की दिशा मुख्य रूप से अमेरिका-ईरान तनाव, मध्य पूर्व से तेल की आपूर्ति और होर्मुज की खाड़ी से जुड़े घटनाक्रम पर निर्भर करती दिखाई दे रही है। अगर सप्लाई बाधित होने की आशंका गहराती है और क्रूड की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इसका असर आगे चलकर ईंधन बाजार पर पड़ सकता है।
अमेरिका डीजल पर टैक्स राहत की तैयारी में
बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच अमेरिका एक अलग उपाय पर भी विचार कर रहा है। इसके तहत ‘रेड-डाइड डीजल’ की व्यापक बिक्री की अनुमति देने का प्रस्ताव सामने आया है। इससे खरीदार संघीय ईंधन कर से बच सकेंगे।
इसे डीजल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के बजाय ईंधन की लागत कम करने के एक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में नजरें कच्चे तेल की कीमतों के साथ-साथ अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत तथा मध्य पूर्व से होने वाली आपूर्ति पर टिकी हैं।