नई दिल्ली: सूर्य नमस्कार को अक्सर संपूर्ण व्यायाम माना जाता है, क्योंकि इसमें लगातार मूवमेंट, सांसों का तालमेल, बैलेंस, कोआर्डिनेशन और शरीर की जागरूकता एक साथ शामिल होती है। इसमें 12 अलग-अलग योगासनों का क्रम होता है। सही तकनीक और व्यक्ति की क्षमता के अनुसार इसे किया जाए तो यह कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस, मांसपेशियों की सक्रियता और शरीर की मोबिलिटी को बेहतर करने में मदद कर सकता है।
शारदा केयर-हेल्थ सिटी के फिजियो रिहैब विभाग के प्रमुख डॉ. रविकांत के मुताबिक, सूर्य नमस्कार लगातार करने पर हार्ट रेट बढ़ता है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। इस दौरान पैर, कंधे, हाथ, पीठ और कोर मसल्स सक्रिय होती हैं। अलग-अलग आसनों के बीच होने वाले बदलाव मांसपेशियों की सहनशक्ति, कोआर्डिनेशन और लचीलेपन को भी चुनौती देते हैं।
सूर्य नमस्कार करने से शरीर पर क्या असर पड़ता है?
सूर्य नमस्कार में मूवमेंट और सांस को एक साथ जोड़ा जाता है। हर आसन से अगले आसन में जाते समय सांस के तालमेल पर ध्यान देने से मोबिलिटी, स्ट्रेंथ, फ्लेक्सिबिलिटी, कोआर्डिनेशन और ब्रीदिंग अवेयरनेस पर एक साथ काम होता है।
योग गुरु और अक्षर योग केंद्र के संस्थापक हिमालयन सिद्धा अक्षर के अनुसार, इसे व्यक्ति की क्षमता के मुताबिक सही गति और उचित संख्या में किया जाए तो यह एक्टिव फिटनेस रूटीन का उपयोगी हिस्सा बन सकता है।
सूर्य नमस्कार का सूर्य से क्या कनेक्शन है?
सूर्य नमस्कार का पारंपरिक रूप से सूर्य से संबंध माना जाता है। सूर्य को प्रकाश, ऊर्जा और जीवन देने वाली शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
हिमालयन सिद्धा अक्षर के मुताबिक, यही परंपरा सूर्य नमस्कार को केवल शारीरिक गतिविधि तक सीमित नहीं रखती, बल्कि इसमें एकाग्रता और माइंडफुलनेस को भी जोड़ती है। हर मूवमेंट को ध्यान और उद्देश्य के साथ करने पर जोर दिया जाता है।
क्या सूर्य नमस्कार कार्डियो की जगह ले सकता है?
सूर्य नमस्कार से कई स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं, लेकिन इसे हर व्यक्ति के लिए ब्रिस्क वॉक, जॉगिंग, साइकिलिंग, स्विमिंग या एरोबिक एक्सरसाइज का पूर्ण विकल्प नहीं माना जा सकता।
डॉ. रविकांत के अनुसार, पारंपरिक कार्डियो एक्सरसाइज में हार्ट रेट को लंबे समय तक बढ़ा हुआ बनाए रखना आसान होता है। साथ ही इन्हें किसी खास एंड्योरेंस या कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस लक्ष्य के अनुसार प्लान किया जा सकता है।
वहीं सूर्य नमस्कार की तीव्रता इस बात पर निर्भर करती है कि इसे कितनी तेज गति और किस तकनीक से किया जा रहा है।
कार्डियो के साथ सूर्य नमस्कार करना कैसा है?
फिटनेस रूटीन में सूर्य नमस्कार को कार्डियो की जगह पूरी तरह इस्तेमाल करने के बजाय एरोबिक एक्टिविटी और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के साथ शामिल किया जा सकता है। इससे शरीर को अलग-अलग तरह की शारीरिक गतिविधियों का लाभ मिल सकता है।
जो लोग पहली बार सूर्य नमस्कार शुरू कर रहे हैं, उन्हें शुरुआत में बहुत तेज गति या ज्यादा राउंड करने से बचना चाहिए। पहले कुछ धीमे और नियंत्रित राउंड किए जा सकते हैं। फिटनेस में सुधार होने के साथ धीरे-धीरे गति और राउंड की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
हालांकि केवल राउंड बढ़ाना ही लक्ष्य नहीं होना चाहिए। सही तकनीक, सुरक्षित तरीका और अपनी शारीरिक क्षमता के मुताबिक उचित तीव्रता ज्यादा महत्वपूर्ण है।
किन लोगों को सूर्य नमस्कार में सावधानी रखनी चाहिए?
दिल से जुड़ी बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर, जोड़ों की समस्या या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों को तेज या कठिन एक्सरसाइज शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
सूर्य नमस्कार करते समय सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं है कि कितने राउंड पूरे किए गए। यह भी जरूरी है कि अभ्यास सुरक्षित तरीके से और अपनी शारीरिक क्षमता के अनुरूप किया जाए।