वॉशिंगटन डी.सी. | शनिवार की शाम वॉशिंगटन के हिल्टन होटल में जो हुआ, उसने न केवल अमेरिका की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है, बल्कि एक नई बहस को भी जन्म दे दिया है। दुनिया के सबसे ताकतवर शख्स माने जाने वाले डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर हमले का शिकार होते-होते बचे, लेकिन इस बार जनता और राजनीतिक जानकारों के मन में कई “किंतु-परंतु” पैदा हो गए हैं।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि क्या यह हमला ट्रंप की गिरती लोकप्रियता को थामने का एक जरिया है? ईरान के साथ शांति समझौता न हो पाना और घरेलू मोर्चे पर गिरती साख ने ट्रंप को बैकफुट पर ला दिया है।
इतिहास गवाह है कि जब भी किसी बड़े नेता पर जानलेवा हमला होता है, तो जनता की सहानुभूति (Sympathy) उसके पक्ष में झुक जाती है। सोशल मीडिया पर एक वर्ग इसे ‘वेल-प्लांड’ (Well-planned) घटना बता रहा है ताकि आगामी चुनावों या चुनौतियों से पहले ट्रंप को ‘विक्टिम’ और ‘सर्वाइवर’ के रूप में पेश किया जा सके।
इस पूरी घटना में सबसे चौंकाने वाला एंगल मोसाद (Mossad) का जुड़ना है। जानकारों का कहना है कि जॉनी किर्क की हत्या, जिन्होंने नेतन्याहू से तीखे सवाल किए थे, अमेरिका में विदेशी खुफिया एजेंसियों के बढ़ते प्रभाव का संकेत है। चर्चा है कि क्या ट्रंप प्रशासन मोसाद के इशारों पर काम कर रहा है? कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप में जनता का विश्वास फिर से जगाने के लिए इस तरह के ‘फॉल्स फ्लैग’ (False Flag) ऑपरेशन को अंजाम दिया जा सकता है, जिसमें मोसाद की विशेषज्ञता मानी जाती है।
अगर यह हमला प्रायोजित नहीं था, तो यह अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों की बहुत बड़ी नाकामी है, मैग्नेटोमीटर तक कैसे पहुँचा हथियार? भारी सुरक्षा और सीक्रेट सर्विस की मौजूदगी के बावजूद एक संदिग्ध (जो कथित तौर पर कैलिफोर्निया का एक टीचर/इंजीनियर बताया जा रहा है) हथियारों के जखीरे के साथ अंदर कैसे पहुँच गया?आरोपी का उसी होटल में ठहरना जहाँ राष्ट्रपति मौजूद थे, सुरक्षा प्रोटोकॉल में एक बड़े छेद की ओर इशारा करता है।
क्या यह वास्तव में एक ‘लोन वुल्फ’ हमला था, या फिर गिरती सत्ता को बचाने के लिए बुना गया एक अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र? ट्रंप ने “Let the show go on” कहकर अपनी बहादुरी तो दिखा दी है, लेकिन जॉनी किर्क की हत्या और मोसाद के दखल जैसे सवाल आने वाले समय में व्हाइट हाउस के लिए बड़ी मुसीबत बन सकते हैं।
ट्रंप पर हुए हमलों के सिलसिले को संक्षिप्त और प्रभावी (Short & Crisp) न्यूज़ बुलेटिन के रूप में यहाँ दिया गया है:
डोनाल्ड ट्रंप पर हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। 26 अप्रैल 2026 को वाशिंगटन में हुई घटना ट्रंप पर हुआ तीसरा बड़ा जानलेवा हमला है। आइए नजर डालते हैं ट्रंप पर हुए हमलों की हिस्ट्री पर:
बड़ा सवाल: आखिर इतनी कड़ी सुरक्षा के बावजूद बार-बार डोनाल्ड ट्रंप को ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है? क्या यह सुरक्षा एजेंसियों की विफलता है या किसी गहरी साजिश का हिस्सा?
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