पिछले हफ्ते की सुस्ती को पीछे छोड़ते हुए भारतीय शेयर बाजार ने नए हफ्ते की शुरुआत धमाकेदार स्टाइल में की है। ग्लोबल मार्केट से मिले पॉजिटिव सिग्नल्स, कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट और जियोपॉलिटिकल तनाव कम होने की खबरों ने इन्वेस्टर्स के मूड को पूरी तरह से ‘बुलिश’ बना दिया। जिसका नतीजा यह हुआ की बाजार खुलते ही लगभग हर सेक्टर में ताबड़तोड़ खरीदारी देखने को मिली और प्रमुख इंडेक्स अहम लेवल्स को पार कर गए।
सेंसेक्स, निफ्टी और बैंक निफ्टी में तगड़ा उछाल
सोमवार को BSE सेंसेक्स 600 से ज्यादा पॉइंट्स की छलांग लगाकर 76,700 के पार निकल गया। वहीं, NSE निफ्टी 50 भी 150 से ज्यादा पॉइंट्स की बढ़त के साथ 23,900 के ऊपर बंद हुआ।
बैंकिंग और फाइनेंशियल स्टॉक्स में आई इस जोरदार तेजी की बदौलत बैंक निफ्टी ने भी 600 से ज्यादा पॉइंट्स की रैली दिखाई। यह रिकवरी साफ इशारा करती है कि इन्वेस्टर्स का भरोसा बाजार पर फिर से मजबूत हो रहा है।
मार्केट के लिए बना सबसे बड़ा ‘गेम चेंजर’
इस तेजी के पीछे का सबसे बड़ा ट्रिगर रहा इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड के दामों में करीब 4.5% की भारी गिरावट। चूंकि भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल इम्पोर्ट करता है, इसलिए क्रूड के सस्ते होने से महंगाई और इम्पोर्ट बिल का प्रेशर कम होगा। अमेरिका और ईरान के बीच घटते तनाव ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स को राहत दी। डॉलर इंडेक्स में नरमी और भारतीय रुपये में आई मजबूती ने घरेलू बाजार का माहौल और बेहतर कर दिया।
इन स्टॉक्स में दिखा सबसे ज्यादा एक्शन
आज के ट्रेडिंग सेशन में एविएशन, पेंट्स, IT और फाइनेंशियल सेक्टर इन्वेस्टर्स के फेवरेट बने रहे, इंडिगो (InterGlobe Aviation), एशियन पेंट्स, इंफोसिस, बजाज फाइनेंस और टाटा कंज्यूमर के शेयरों में जमकर खरीदारी हुई। क्रूड सस्ता होने से ऑयल एक्सप्लोरेशन कंपनियों का मार्जिन प्रभावित होता है, इसलिए ONGC जैसे स्टॉक्स पर प्रेशर दिखा। इसके अलावा विप्रो और अपोलो हॉस्पिटल्स में हल्की सुस्ती रही।
आगे कैसा रहेगा मार्केट का आउटलुक?
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर क्रूड ऑयल के दाम कंट्रोल में रहते हैं और ग्लोबल हालात स्थिर रहते हैं, तो बाजार की यह रिकवरी आगे भी जारी रह सकती है। इनपुट कॉस्ट कम होने का सीधा फायदा एविएशन, ऑटोमोबाइल्स, पेंट और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को मिलेगा। साथ ही, मजबूत रुपया और बेहतर ग्लोबल मूड विदेशी निवेशकों को भी वापस खींच सकता है। आने वाले दिनों में बाजार की चाल काफी हद तक ग्लोबल इकोनॉमिक ट्रेंड्स, क्रूड की कीमतों की दिशा और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर निर्भर करेगी।