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44 डिग्री गर्मी में फिर चर्चा में आया सेल्सियस, जानिए सेंटीग्रेड का क्या है मतलब और कैसे शुरू हुई तापमान मापने की यह प्रणाली

नई दिल्ली: देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी का दौर जारी है और तापमान लगातार नए स्तर छू रहा है। मौसम विभाग की ओर से हीटवेव को लेकर लगातार चेतावनियां जारी की जा रही हैं। ऐसे समय में तापमान मापने के लिए इस्तेमाल होने वाला ‘डिग्री सेल्सियस’ फिर चर्चा में है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सेल्सियस आखिर है क्या, सेंटीग्रेड का मतलब क्या होता है और इसकी शुरुआत किसने की थी?

भारत में मई के महीने के दौरान कई राज्यों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। मौसम विभाग के अनुसार उस समय नई दिल्ली में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस और नोएडा में 44 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया था। इसी दौरान तापमान मापने की इस प्रणाली का इतिहास भी चर्चा में आ गया, क्योंकि 19 मई की तारीख इस पैमाने के विकास से जुड़ी हुई है।

तापमान मापने की शुरुआत किसने की थी?

तापमान मापने के लिए आज जिस सेल्सियस पैमाने का उपयोग किया जाता है, उसकी नींव 18वीं सदी में रखी गई थी। स्वीडन के खगोलशास्त्री एंडर्स सेल्सियस ने वर्ष 1742 में इस तापमान पैमाने को प्रस्तुत किया था। हालांकि शुरुआत में उन्होंने पानी के उबलने के तापमान को शून्य डिग्री और जमने के तापमान को 100 डिग्री निर्धारित किया था।

बाद में वैज्ञानिकों ने इसे अधिक व्यावहारिक बनाते हुए उलट दिया। इसके बाद शुद्ध बर्फ के जमने का तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस और शुद्ध पानी के उबलने का तापमान 100 डिग्री सेल्सियस तय किया गया, जो आज भी मानक के रूप में स्वीकार किया जाता है।

क्या होता है सेंटीग्रेड का मतलब?

‘सेंटीग्रेड’ शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा से हुई है। इसमें ‘सेंटम’ का अर्थ 100 और ‘ग्रेडस’ का अर्थ कदम या स्तर होता है। इस पैमाने में पानी के जमने और उबलने के तापमान के बीच कुल 100 बराबर हिस्से निर्धारित किए गए थे। इसी वजह से इसे सेंटीग्रेड नाम दिया गया।

दूसरे शब्दों में कहें तो यह ऐसा तापमान पैमाना है जिसमें दो निश्चित बिंदुओं के बीच की दूरी को 100 समान भागों में विभाजित किया गया है।

सेंटीग्रेड से सेल्सियस कैसे बना?

लंबे समय तक इस पैमाने को सेंटीग्रेड नाम से जाना जाता रहा, लेकिन वर्ष 1948 में इसका आधिकारिक नाम बदल दिया गया। वजन और माप से जुड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ने वैज्ञानिक एंडर्स सेल्सियस के योगदान को सम्मान देने के लिए इस तापमान पैमाने को ‘सेल्सियस’ नाम देने का फैसला किया।

इसके बाद वैज्ञानिक, तकनीकी और सरकारी दस्तावेजों में ‘सेल्सियस’ नाम का उपयोग शुरू हो गया। हालांकि दुनिया के कई हिस्सों में आज भी आम बोलचाल में लोग इसे सेंटीग्रेड के नाम से जानते हैं।

दुनियाभर में सबसे ज्यादा क्यों अपनाया गया यह पैमाना?

विशेषज्ञों के अनुसार सेल्सियस पैमाने की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरलता और सटीकता है। यही कारण है कि यह दुनिया में सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला तापमान मापने का पैमाना बन गया।

मौसम पूर्वानुमान, हीटवेव चेतावनी, चिकित्सा, खाद्य सुरक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान, औद्योगिक प्रक्रियाओं और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में इसका व्यापक उपयोग किया जाता है। भारत में भी मौसम विभाग, स्वास्थ्य मंत्रालय और अन्य सरकारी एजेंसियां तापमान संबंधी सभी आधिकारिक आंकड़े सेल्सियस पैमाने में ही जारी करती हैं।

किन क्षेत्रों में होता है सेल्सियस स्केल का उपयोग?

सेल्सियस पैमाना सिर्फ मौसम की जानकारी देने तक सीमित नहीं है। इसका इस्तेमाल मौसम पूर्वानुमान, लू संबंधी चेतावनियों, औद्योगिक उत्पादन, खाद्य पदार्थों की सुरक्षा, चिकित्सा अनुसंधान, वैज्ञानिक प्रयोगों और इंजीनियरिंग डिजाइन जैसे अनेक महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जाता है।

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