कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक सौरव दास ने चुनावी राजनीति में उतरने को लेकर बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने दावा किया कि उनके संगठन से जुड़ने के लिए अलग-अलग राजनीतिक दलों से लगातार फोन आ रहे हैं, इनमें BJP भी शामिल है। हालांकि, दास ने फिलहाल चुनाव लड़ने या किसी पार्टी में शामिल होने का फैसला साफ तौर पर नहीं किया है।
सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तावित 5 मार्च के प्रोटेस्ट मार्च को वापस लेने का ऐलान करने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर सस्पेंस बढ़ा दिया है।
एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में दास ने दावा किया कि उन्हें कई राजनीतिक दलों से संपर्क किया जा रहा है और इनमें भारतीय जनता पार्टी यानी BJP भी शामिल है।
दास के इस दावे ने सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या CJP आने वाले समय में सिर्फ एक प्रेशर ग्रुप तक सीमित रहेगी या चुनावी राजनीति में भी कदम रख सकती है?
सौरव दास से जब पूछा गया कि अगर राहुल गांधी के कार्यालय से उन्हें राजनीति में आने का ऑफर मिले तो उनका जवाब क्या होगा, तो उन्होंने सवाल पूरा होने से पहले ही कहा कि इस तरह के संपर्क उन्हें कई दलों से मिल रहे हैं।
दास ने दावा किया, “हमें 100 फोन कॉल्स आते हैं, सब जगह से।
जब उनसे पूछा गया कि क्या BJP की ओर से भी संपर्क किया गया है, तो उन्होंने कहा कि बीजेपी वालों की तरफ से भी फोन आए हैं। उन्होंने रामदास आठवले की ओर से अभिजीत दीपके को दिए गए बुलावे का उदाहरण देते हुए कहा कि इस तरह के राजनीतिक संपर्क होना कोई छिपी हुई बात नहीं है।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
सौरव दास ने साफ किया कि फिलहाल उनका संगठन खुद को एक प्रेशर ग्रुप के तौर पर देखता है. उनका कहना है कि CJP ‘स्कूल ठीक करो’ जैसे मुद्दों समेत कई सामाजिक और सार्वजनिक समस्याओं पर काम जारी रखेगी.
दास ने दावा किया कि संगठन के दबाव की वजह से बड़े संस्थानों तक उसकी आवाज पहुंची है. उन्होंने यहां तक कहा कि सुप्रीम कोर्ट से जुड़ा एक ऐसा आदेश भी उनकी सक्रियता की वजह से संभव हुआ, जो उनके मुताबिक लंबे समय में पहले नहीं हुआ था.
सौरव दास ने मौजूदा सिस्टम पर भी सवाल उठाए. उनका कहना था कि व्यवस्था में बैठे ऐसे लोग, जिन्हें वह ‘सड़ा हुआ सिस्टम’ कहते हैं, अच्छे और प्रभावशाली लोगों को अपने साथ जोड़ना चाहते हैं, ताकि उन्हें चुनौती का सामना न करना पड़े.
उनके मुताबिक CJP के साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है. लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल संगठन का मुख्य उद्देश्य चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि मुद्दों पर दबाव बनाना है.
क्या चुनावी राजनीति में आएगी CJP?
सौरव दास ने भविष्य में चुनावी राजनीति में उतरने की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि 10-15 साल बाद कौन क्या करेगा, यह अभी से तय नहीं किया जा सकता।
उन्होंने यह भी कहा कि वह चाहते हैं कि अच्छे लोग राजनीति में आएं।
यानी फिलहाल CJP की ओर से चुनावी राजनीति में उतरने का कोई औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन संगठन के प्रभाव और अलग-अलग दलों से कथित संपर्क के दावों ने भविष्य की संभावनाओं को जरूर चर्चा में ला दिया है।
सौरव दास ने सोनम वांगचुक की ओर से CJP को लेकर की गई टिप्पणियों का भी जिक्र किया. उन्होंने दावा किया कि वांगचुक ने संगठन की काफी तारीफ की है, लेकिन उनके मुताबिक मीडिया में उन टिप्पणियों को पर्याप्त जगह नहीं दी गई.
वहीं, CJP की लीगल मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह से भी जब राजनीति में आने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने भविष्य पर फैसला छोड़ दिया. उनका कहना था कि वह फिलहाल वर्तमान पर ध्यान देती हैं और भविष्य को लेकर ज्यादा अनुमान नहीं लगातीं.
सौरव दास के बयान के बाद अब निगाह इस बात पर है कि CJP अपने ‘प्रेशर ग्रुप’ मॉडल तक सीमित रहती है या आने वाले वर्षों में चुनावी राजनीति में भी उतरने का फैसला करती है.
फिलहाल पार्टी या संगठन की ओर से किसी राजनीतिक दल के साथ गठबंधन या औपचारिक रूप से चुनाव लड़ने की घोषणा नहीं हुई है. लेकिन ‘100 फोन कॉल्स’ और BJP समेत कई दलों से संपर्क के दावे ने CJP के राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाओं को जरूर तेज कर दिया है.
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