नई दिल्ली: परफ्यूम का इस्तेमाल रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है और अधिकांश लोग इसे सीधे गर्दन पर स्प्रे करते हैं। हालांकि, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के पैथोलॉजी विभाग में पीएचडी कर रहीं कैंसर शोधकर्ता एना कैनादास ने इस आदत को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है। उनका कहना है कि परफ्यूम में मौजूद कुछ रासायनिक तत्व लंबे समय तक शरीर के संपर्क में रहने पर स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ा सकते हैं।
शोधकर्ता ने रासायनिक तत्वों को लेकर दी चेतावनी
एना कैनादास ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में लोगों से गर्दन पर परफ्यूम स्प्रे करने से बचने की अपील की। उनके अनुसार, कई परफ्यूम में ऐसे रासायनिक तत्व मौजूद होते हैं जो शरीर में हार्मोन प्रणाली को प्रभावित कर सकते हैं। इनमें फॉर्मेल्डिहाइड छोड़ने वाले यौगिक, थैलेट और वाष्पशील कार्बनिक यौगिक शामिल बताए गए हैं, जिन्हें एंडोक्राइन डिसरप्टर माना जाता है।
हार्मोन सिस्टम पर पड़ सकता है असर
शोधकर्ता के मुताबिक, ये रासायनिक तत्व शरीर के प्राकृतिक हार्मोन की कार्यप्रणाली में हस्तक्षेप कर सकते हैं। उनका कहना है कि कुछ अध्ययनों में ऐसे तत्वों को बांझपन, श्वसन संबंधी समस्याओं और कुछ प्रकार के कैंसर के बढ़े हुए जोखिम से भी जोड़ा गया है। हालांकि, इसका यह अर्थ नहीं है कि परफ्यूम का उपयोग सीधे कैंसर का कारण बनता है, बल्कि लंबे समय तक और लगातार संपर्क संभावित जोखिम बढ़ा सकता है।
गर्दन पर परफ्यूम लगाने को लेकर क्यों जताई गई चिंता?
विशेषज्ञों के अनुसार, गर्दन की त्वचा अपेक्षाकृत पतली होती है और इस हिस्से में रक्त संचार भी अधिक रहता है। ऐसे में परफ्यूम में मौजूद रासायनिक तत्व त्वचा के माध्यम से अपेक्षाकृत तेजी से अवशोषित हो सकते हैं। यही वजह है कि गर्दन पर बार-बार परफ्यूम लगाने से बचने की सलाह दी जाती है।
सांस के जरिए भी शरीर में पहुंच सकते हैं रासायनिक कण
परफ्यूम स्प्रे करने पर बेहद महीन कण हवा में फैल जाते हैं। इन्हें सांस के साथ अंदर लेने पर ये श्वसन तंत्र तक पहुंच सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे समय तक लगातार ऐसे एरोसोल के संपर्क में रहने से फेफड़ों और त्वचा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका हो सकती है।
क्या परफ्यूम का इस्तेमाल पूरी तरह सुरक्षित नहीं है?
रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि हर परफ्यूम हानिकारक नहीं होता और न ही परफ्यूम लगाने से सीधे कोई गंभीर बीमारी हो जाती है। हालांकि, लंबे समय तक बिना सावधानी के नियमित उपयोग से जुड़े संभावित जोखिमों को देखते हुए इसके इस्तेमाल में संतुलन और सतर्कता बरतना जरूरी माना गया है।