सहारनपुर की एक 70 साल पुरानी मस्जिद को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। मस्जिद गिराए जाने के बाद मामला सियासी मोड़ ले चुका है और कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन के हाउस अरेस्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को और गरमा दिया है। आखिर प्रशासन ने मस्जिद पर कार्रवाई क्यों की और इकरा हसन को सहारनपुर जाने से पहले ही क्यों रोक दिया गया? आइए, जानते हैं पूरा मामला।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, 16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को अवैध निर्माण मानते हुए इसे हटाने का आदेश दिया था। इसके बाद मुस्लिम पक्ष ने इस फैसले को जिला जज की अदालत में चुनौती दी।
हालांकि, 4 सितंबर 2026 को जिला जज की अदालत ने इस याचिका को खारिज कर दिया। इसके अगले ही दिन यानी 5 सितंबर की सुबह भारी पुलिस बल और RAF की तैनाती के बीच प्रशासन ने मस्जिद को ध्वस्त कर दिया।
इकरा हसन को क्यों किया गया हाउस अरेस्ट?
मस्जिद पर प्रशासनिक कार्रवाई के बाद कैराना से सपा सांसद इकरा हसन सहारनपुर पहुंचकर मौके की स्थिति का जायजा लेना चाहती थीं। लेकिन शनिवार सुबह सहारनपुर के लिए रवाना होने से पहले ही उन्हें हाउस अरेस्ट कर लिया गया।
उनके आवास के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। बताया जा रहा है कि इकरा हसन के अलावा अन्य विपक्षी नेताओं की गतिविधियों पर भी प्रशासन की नजर बनी हुई है।
इमरान मसूद ने की शांति बनाए रखने की अपील
सहारनपुर से सपा सांसद इमरान मसूद ने कलेक्ट्रेट मस्जिद मामले में जिला अदालत के फैसले के बाद लोगों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि न्यायालय की प्रक्रिया का सम्मान किया जाना चाहिए और किसी भी तरह की अफवाह या भड़काऊ बयानबाजी से बचना चाहिए। उन्होंने लोगों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आपसी भाईचारा कायम रखने की भी अपील की।
इमरान मसूद ने सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाएं प्रसारित न करने की अपील करते हुए कहा कि इस मामले का समाधान संवैधानिक और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए ही होना चाहिए।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जिला अदालत के फैसले के बाद अब मस्जिद मामले को लेकर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जा सकता है।
फिलहाल, मस्जिद ध्वस्तीकरण के बाद सहारनपुर में प्रशासन अलर्ट पर है और पूरे मामले पर सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। अब नजर इस बात पर है कि मुस्लिम पक्ष की ओर से आगे क्या कानूनी कदम उठाया जाता है और क्या यह विवाद हाई कोर्ट तक पहुंचता है।