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विपक्ष के लिए ‘ब्लैक मंडे’! विपक्षी खेमे का एक और मजबूत किला ढहा, केजरीवाल की रणनीति पर फिरा पानी

नई दिल्ली: भारतीय संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) की तस्वीर रातों-रात बदल गई है। सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने आम आदमी पार्टी (AAP) से टूटकर अलग हुए 7 सांसदों के गुट के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलय को आधिकारिक तौर पर हरी झंडी दे दी है।

इस फैसले के साथ ही न केवल राज्यसभा में बीजेपी का कुनबा बढ़ा है, बल्कि विपक्षी खेमे को बड़ा झटका लगा है। इस विलय के बाद बीजेपी अब राज्यसभा में बहुमत के और करीब पहुँच गई है। विपक्षी गठबंधन (INDIA) के लिए यह एक बड़ा झटका है, क्योंकि ‘आप’ सदन में एक मुखर विपक्षी दल की भूमिका में थी।

“आम आदमी पार्टी के लिए राज्यसभा से बुरी खबर आ रही है, जहां राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों की बगावत ने पार्टी को हाशिए पर धकेल दिया है। केजरीवाल के लिए यह किसी बड़े राजनीतिक गेम से कम नहीं है। इस विलय के बाद अब उच्च सदन का गणित पूरी तरह बदल गया है बीजेपी अब बहुमत के बेहद करीब है और विपक्ष का सबसे मुखर मोर्चा अब धराशायी हो चुका है।”

सदन का नया गणित: बीजेपी 113 पर, आप महज 3 पर सिमटी

सचिवालय द्वारा जारी अधिसूचना के बाद अब राज्यसभा में समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं:

  • बीजेपी की बढ़त: सदन में बीजेपी के सदस्यों की संख्या अब 113 हो गई है, जिससे अहम विधेयकों को पारित कराने में सरकार की राह और आसान होगी।
  • AAP का नुकसान: पिछले हफ्ते तक 10 सांसदों वाली ‘आप’ अब सिर्फ 3 सांसदों (संजय सिंह, एन.डी. गुप्ता और बलबीर सिंह सीचेवाल) तक सीमित रह गई है।
  • पंजाब का प्रभाव: पार्टी छोड़ने वाले 7 में से 6 सांसद पंजाब से प्रतिनिधित्व करते हैं।

विलय को मंजूरी: दलबदल कानून का ‘2/3’ फॉर्मूला

राज्यसभा सभापति द्वारा विलय को मंजूरी मिलना यह संकेत देता है कि बागियों ने 10वीं अनुसूची (Anti-Defection Law) के प्रावधानों को पूरा किया है। नियमानुसार, यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई (2/3) सदस्य एक साथ अलग होकर किसी अन्य दल में विलय करते हैं, तो उनकी सदस्यता पर खतरा नहीं रहता।

  • AAP के कुल 10 सांसदों में से 7 (जो कि 70% है) ने पार्टी छोड़ी है, जो 66.6% की कानूनी अनिवार्यता से अधिक है।

बागी गुट में कौन-कौन शामिल?

बीजेपी का दामन थामने वाले चेहरों में पार्टी के कई दिग्गज शामिल हैं:

  1. राघव चड्ढा
  2. स्वाति मालीवाल
  3. हरभजन सिंह
  4. डॉ. संदीप पाठक
  5. अशोक मित्तल
  6. विक्रमजीत सिंह साहनी
  7. राजेंद्र गुप्ता

इन सांसदों का आरोप है कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी अपने मूल सिद्धांतों और नैतिकता से भटक गई है।

संजय सिंह की चुनौती: अब मामला कोर्ट जाएगा?

AAP के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने इस फैसले को असंवैधानिक करार देते हुए सभापति को पत्र लिखा था। उनका तर्क है कि यह स्पष्ट रूप से ‘दलबदल’ का मामला है। पार्टी ने संकेत दिए हैं कि वे इस विलय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। सिंह ने उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश के पुराने अदालती फैसलों का हवाला देते हुए इन सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग की है।

news desk

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