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Reading: ईरान की साइबर रणनीति पर बड़ा खुलासा: मोबाइल नेटवर्क की कमजोरी से अमेरिकी सैनिकों की लोकेशन ट्रैक करने का दावा
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Indian Press House > Blog > Trending News > ईरान की साइबर रणनीति पर बड़ा खुलासा: मोबाइल नेटवर्क की कमजोरी से अमेरिकी सैनिकों की लोकेशन ट्रैक करने का दावा
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ईरान की साइबर रणनीति पर बड़ा खुलासा: मोबाइल नेटवर्क की कमजोरी से अमेरिकी सैनिकों की लोकेशन ट्रैक करने का दावा

news desk
Last updated: July 17, 2026 11:29 am
news desk
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नई दिल्ली/वॉशिंगटन। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने कथित तौर पर मोबाइल नेटवर्क की पुरानी तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर अमेरिकी सैनिकों और ठेकेदारों की लोकेशन ट्रैक करने की कोशिश की। यह गतिविधियां उस समय सामने आईं जब क्षेत्र में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव चरम पर था।

Contents
कैसे हुआ ट्रैकिंग ऑपरेशन?एड टेक्नोलॉजी भी बनी हथियारक्या हमलों से जुड़ा था डेटा?अमेरिका में बढ़ी चिंता, कानून की तैयारीबड़ा सवाल: क्या सुरक्षित है मोबाइल नेटवर्क?

कैसे हुआ ट्रैकिंग ऑपरेशन?

रिपोर्ट के अनुसार, इस कथित साइबर ऑपरेशन में SS7 (सिग्नलिंग सिस्टम 7) प्रोटोकॉल की कमजोरी का इस्तेमाल किया गया।

  • SS7 का उपयोग 2G और 3G नेटवर्क में कॉल और मैसेज रूटिंग के लिए होता है।
  • दावा है कि विशेष मोबाइल नंबरों पर “SS7 पिंग” भेजकर यह पता लगाया गया कि फोन किस लोकेशन और नेटवर्क पर सक्रिय है।

साइबर विशेषज्ञों ने इसे एक कोऑर्डिनेटेड सर्विलांस ऑपरेशन बताया है, जिससे टारगेटेड ट्रैकिंग संभव हुई।

एड टेक्नोलॉजी भी बनी हथियार

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि सिर्फ SS7 ही नहीं, बल्कि मोबाइल एडवर्टाइजिंग टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल किया गया।

  • स्मार्टफोन की एड आईडी और रोमिंग डेटा के जरिए लोकेशन ट्रैक करने की कोशिश की गई।
  • बहरीन, इराक और अन्य मध्य पूर्वी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और होटलों की लोकेशन तक पहुंचने का दावा किया गया।

क्या हमलों से जुड़ा था डेटा?

हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने साफ किया है कि इस तरह की डेटा ट्रैकिंग का हमलों में कोई निर्णायक रोल नहीं था। फिर भी, इस खुलासे ने सैन्य सुरक्षा और डिजिटल प्राइवेसी को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है।

अमेरिका में बढ़ी चिंता, कानून की तैयारी

इस घटनाक्रम के बाद अमेरिका में साइबर सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है।

  • विशेषज्ञों का मानना है कि यह ईरान की बढ़ती साइबर जासूसी क्षमता का संकेत है।
  • अमेरिकी सांसदों ने सरकारी कर्मचारियों के लोकेशन डेटा की बिक्री पर रोक लगाने के लिए नए कानून की बात कही है।
  • यूएस सेंट्रल कमांड ने भी माना कि ऐसे खतरों को लेकर पहले से सतर्कता बरती जा रही थी।

बड़ा सवाल: क्या सुरक्षित है मोबाइल नेटवर्क?

यह मामला दिखाता है कि पुरानी मोबाइल नेटवर्क तकनीकें (जैसे SS7) आज भी बड़े सुरक्षा जोखिम बन सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 5G के दौर में भी अगर इन कमजोरियों को दूर नहीं किया गया, तो भविष्य में ऐसे साइबर हमले और बढ़ सकते हैं।

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