कोलकाता/नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मची भीषण बगावत अब पूरी तरह सड़कों और टीवी कैमरों के सामने आ गई है। टीएमसी के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी और कीर्ति आजाद ने एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी से विद्रोह करने वाले बागी सांसदों के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है।
दोनों नेताओं ने बागियों पर बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए उन्हें ‘गद्दार’ और ‘भगोड़ा’ तक करार दे दिया और आरोप लगाया कि यह पूरा खेल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के इशारे पर दिल्ली से रिमोट कंट्रोल से चलाया जा रहा है।
“बिना बंगला, गाड़ी और सुरक्षा के नहीं रह सकते ये लोग”
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी का गुस्सा सातवें आसमान पर था। उन्होंने बागी गुट की दुखती रग पर हाथ रखते हुए कहा:
“ये बागी सांसद सत्ता के बिना एक पल नहीं रह सकते। असल में इनको पार्टी या विचारधारा से कोई लेना-देना नहीं है, इन्हें सिर्फ लुटियंस दिल्ली में बड़ा बंगला, चमचमाती गाड़ी और वीआईपी सुरक्षा चाहिए। इसी लालच में इन्होंने ममता दीदी की पीठ में छुरा घोंपा है।”
कीर्ति आजाद का खुला चैलेंज: ‘नैतिकता है तो इस्तीफा दो और बीजेपी के टिकट पर लड़ो’
पूर्व क्रिकेटर और टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने बगावत करने वाले नेताओं की राजनीतिक नैतिकता पर बड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा:
- ‘मां, माटी, मानुष’ से गद्दारी: “हमारे 29 नेता ‘मां, माटी और मानुष’ के नारे और ममता बनर्जी के चेहरे पर चुनाव जीतकर सांसद बने हैं। मैं इन गद्दारों से पूछना चाहता हूं कि चुनाव जीतने के बाद ही आपको अपनी मुश्किलें क्यों याद आईं? चुनाव से पहले रोना क्यों नहीं रोया?”
- शुखेन्दु शेखर रॉय की तारीफ: आजाद ने बागी खेमे के सुखेंदु शेखर रॉय का जिक्र करते हुए कहा कि उनमें कम से कम इतनी राजनीतिक नैतिकता तो थी कि उन्होंने (पार्टी लाइन से अलग होने पर) इस्तीफा दे दिया। अगर बाकी बागियों में भी थोड़ी बहुत गैरत बची है, तो वे भी तुरंत संसद सदस्यता से इस्तीफा दें और भाजपा (BJP) के सिंबल पर दोबारा चुनाव जीतकर दिखाएं।
भूपेंद्र यादव के घर गुप्त बैठक और ‘काकोली घोष’ की चिट्ठी का रहस्य
कीर्ति आजाद ने बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार को आड़े हाथों लेते हुए एक बड़ा खुलासा किया। उन्होंने कहा कि काकोली घोष जिस इस्तीफे की चिट्ठी का दावा कर रही हैं, वह अब तक किसी के सामने नहीं आई है। यहाँ तक कि लोकसभा स्पीकर ऑफिस ने भी साफ कह दिया है कि उन्हें ऐसी कोई चिट्ठी नहीं मिली है।
बीजेपी से डील पक्की? कीर्ति आजाद ने आरोप लगाया, “जिस तरह से ये बागी नेता गुपचुप तरीके से बीजेपी के कद्दावर नेता भूपेंद्र यादव के घर पहुंचे, उससे यह पूरी तरह साबित हो गया है कि ये लोग बीजेपी की गोद में खेल रहे हैं। वो कितने में बिके और कैसे मिले, ये तो वक्त बताएगा, लेकिन अब उनके असली नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बन चुके हैं, टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी नहीं।”
काकोली घोष पर हमला जारी रखते हुए उन्होंने पूछा कि जब काकोली खुद कह रही हैं कि उन्होंने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है, तो वे लोकसभा में व्हिप होने का दावा कैसे कर सकती हैं? व्हिप कौन होगा, यह पार्टी तय करती है, कोई बागी नेता नहीं।