देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक RE-NEET 2026 जो 21 जून को होने वाली है। एग्जाम से ठीक पहले, Telegram को दिल्ली हाई कोर्ट से बहुत बड़ा झटका लगा है। सरकार द्वारा लगाए गए “टेम्परेरी बैन” के खिलाफ टेलीग्राम कोर्ट पहुंचा था, लेकिन हाई कोर्ट ने साफ कह दिया है “बैन नहीं हटेगा”!
अदालत का यह फैसला सिर्फ टेलीग्राम के लिए ही नहीं, बल्कि Meta “WhatsApp, Instagram” और X जैसे तमाम बड़े टेक दिग्गजों के लिए भी एक कड़ा संदेश है कि भारत के नियमों के आगे ‘रेड लाइन’ क्रॉस करने की इजाजत किसी को नहीं मिलेगी।

आखिर क्यों लगा टेलीग्राम पर ताला?
सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट में सरकार का पक्ष रखते हुए साफ किया कि यह कदम सुरक्षा और पारदर्शिता के लिहाज से बेहद जरूरी था। इसके पीछे की मुख्य वजहें ये हैं:
कोर्ट में दलील दी गई कि टेलीग्राम का इस्तेमाल अक्सर सरकारी परीक्षाओं के फेक या असली पेपर लीक करने और उन्हें बड़े पैमाने पर सर्कुलेट करने के लिए किया जाता रहा है।
बिना फोन नंबर के अकाउंट बन जाना और एक सिंगल ग्रुप में 2 लाख लोगों के जुड़ने की क्षमता, टेलीग्राम के ये फीचर्स अब देश की सुरक्षा और निष्पक्ष परीक्षाओं के लिए बड़ा सिरदर्द बन चुके हैं।
“भारत सरकार के पास आईटी एक्ट (IT Act) के तहत किसी भी प्लेटफॉर्म या ऐप को पूरी तरह प्रतिबंधित करने का पूरा अधिकार है।”
टेक वर्ल्ड के लिए ‘वेक-अप कॉल’
यह पहली बार नहीं है जब कोई विदेशी टेक कंपनी भारतीय रेगुलेशंस से टकराई हो। इससे पहले Meta जैसी कंपनियां भी जुर्माने या नियमों के खिलाफ कोर्ट जा चुकी हैं। लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट के इस कड़े रुख ने साफ कर दिया है कि भारत में बिजनेस करना है, तो यहाँ के संविधान और कानून को सबसे ऊपर रखना ही होगा।