नई दिल्ली: देश के कई हिस्सों में चक्रवात अर्नब और पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से मौसम का मिजाज बदला हुआ है। कहीं भारी बारिश और ओलावृष्टि हो रही है, तो कहीं पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी देखने को मिल रही है। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी मौसम का असर दिखाई दिया है। इस बीच एक सवाल चर्चा में है कि समुद्र में उठने वाला चक्रवाती तूफान आखिर कितनी दूर तक अपना प्रभाव छोड़ सकता है? क्या उसका असर केवल समुद्र तट के आसपास तक सीमित रहता है या हजारों किलोमीटर दूर तक मौसम को प्रभावित कर सकता है?
कितना बड़ा हो सकता है चक्रवाती तूफान का दायरा?
किसी चक्रवाती तूफान का आकार उसकी तीव्रता और मौसम संबंधी परिस्थितियों पर निर्भर करता है। सामान्य तौर पर एक चक्रवाती तूफान का मुख्य व्यास करीब 480 से 500 किलोमीटर हो सकता है। हालांकि, इसके आसपास मौजूद बादलों की पट्टियां और बारिश वाले क्षेत्र इससे कहीं ज्यादा बड़े इलाके में मौसम को प्रभावित कर सकते हैं।
कुछ असाधारण मौसमी प्रणालियों में तूफान का फैलाव 1000 किलोमीटर से भी अधिक हो सकता है। यही वजह है कि तूफान का असर केवल उसके केंद्र या समुद्र तट के आसपास के इलाकों तक सीमित नहीं रहता।
समुद्र से दूर राज्यों में भी क्यों होती है बारिश?
चक्रवाती तूफान जब समुद्र से जमीन की ओर बढ़ता है, तो उसका प्रभाव तटीय इलाकों से आगे तक महसूस किया जा सकता है। कई बार मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे समुद्र से काफी दूर स्थित राज्यों में भी बारिश और तेज हवाओं की स्थिति बन सकती है।
हालांकि, हर बार इसकी वजह केवल चक्रवात नहीं होता। बड़े मौसमी सिस्टम, नमी का प्रवाह और पश्चिमी विक्षोभ जैसी दूसरी मौसमी परिस्थितियां भी बारिश और तूफान की गतिविधियों को बढ़ा सकती हैं।
चक्रवात अर्नब के मौजूदा प्रभाव के दौरान भी बारिश, तेज हवाओं और ओलावृष्टि के साथ पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी की स्थिति बनी है। ऐसे में अलग-अलग मौसमी प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव को समझना जरूरी है।
1979 में आया था दुनिया का सबसे विशाल तूफान
इतिहास में सबसे बड़े उष्णकटिबंधीय चक्रवातों में सुपर टाइफून टिप का नाम दर्ज है। यह तूफान साल 1979 में आया था और इसका व्यास करीब 2,222 किलोमीटर तक पहुंच गया था। यह आकार सामान्य चक्रवाती तूफान के अनुमानित 480 से 500 किलोमीटर के व्यास से कई गुना बड़ा था।
टाइफून टिप का उदाहरण बताता है कि असाधारण परिस्थितियों में एक चक्रवाती प्रणाली कितने बड़े क्षेत्र में फैल सकती है। हालांकि, तूफान का व्यास और उसके प्रभाव की दूरी दो अलग-अलग बातें हैं। किसी तूफान का व्यास उसके पूरे फैलाव को दर्शाता है, जबकि उसका प्रभाव उन इलाकों में भी महसूस किया जा सकता है जो उसके मुख्य क्षेत्र से काफी दूर हों।
जमीन पर पहुंचने के बाद कमजोर क्यों पड़ने लगता है तूफान?
समुद्र के ऊपर चक्रवाती तूफान को गर्म पानी और नमी से ऊर्जा मिलती है। यही नमी उसे ताकत बनाए रखने में मदद करती है। लेकिन जब तूफान जमीन से टकराकर अंदरूनी इलाकों की ओर बढ़ता है, तो समुद्र से मिलने वाली नमी की आपूर्ति कम होने लगती है।
इसके अलावा जमीन की सतह पर मौजूद बाधाओं के कारण हवाओं के प्रवाह और तूफान के चक्रवाती घुमाव पर भी असर पड़ता है। इस वजह से उसकी ताकत धीरे-धीरे घटने लगती है।
आमतौर पर समुद्र तट से करीब 150 से 200 किलोमीटर अंदर जाने के बाद चक्रवाती तूफान कमजोर पड़ सकता है। हालांकि, यह कोई तय सीमा नहीं है। तूफान की गति, उसकी तीव्रता और आसपास की मौसमी परिस्थितियों के आधार पर इसमें अंतर हो सकता है। कमजोर होने के बाद यह चक्रवाती प्रणाली कम दबाव वाले क्षेत्र में भी बदल सकती है।
तूफान के आकार और उसके असर में क्या है अंतर?
तूफान से जुड़ी दूरी के आंकड़ों को समझते समय दो बातों में अंतर करना जरूरी है। पहली है उसका व्यास, यानी वह क्षेत्र जहां तक चक्रवाती प्रणाली फैली हुई है। दूसरी है उसका मौसमी प्रभाव, जिसमें बारिश, तेज हवाएं और बादलों की गतिविधियां शामिल हो सकती हैं।
इसलिए किसी तूफान का मुख्य व्यास 480 से 500 किलोमीटर होने का मतलब यह नहीं है कि उसका प्रभाव भी केवल उतने ही क्षेत्र तक रहेगा। उसकी बाहरी बादल पट्टियां और उससे जुड़ी मौसमी परिस्थितियां काफी दूर तक असर डाल सकती हैं। असाधारण तूफानों में यह फैलाव हजारों किलोमीटर तक पहुंच सकता है।
चक्रवात और पश्चिमी विक्षोभ से बदल रहा मौसम
मौजूदा मौसम की स्थिति में चक्रवात अर्नब के साथ पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव भी अहम है। इन मौसमी प्रणालियों के चलते देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश, तेज हवाएं, ओलावृष्टि और बर्फबारी जैसी गतिविधियां देखने को मिल रही हैं।
देश के करीब 50 से 60 प्रतिशत हिस्से में बारिश और तूफानी गतिविधियों की बात कही जा रही है। वहीं, ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी भी मौसम में आए इस बदलाव का हिस्सा है। ऐसे हालात में यह समझना जरूरी है कि किसी तूफान का प्रभाव केवल उसके केंद्र तक सीमित नहीं होता, बल्कि उससे जुड़ी व्यापक मौसमी परिस्थितियां भी दूर-दराज के क्षेत्रों का मौसम बदल सकती हैं।