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होर्मुज स्ट्रेट में फिर भड़की अमेरिका-ईरान जंग, US ने ईरानी रॉकेट लॉन्चर उड़ाया; बदले में अमेरिकी जहाजों पर हमला

अमेरिका और ईरान के बीच छह महीने से ज्यादा समय से जारी संघर्ष में एक बार फिर तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी सेना ने करीब एक महीने बाद ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के रॉकेट लॉन्चर को निशाना बनाया। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की धमकी दी और अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई है। इन हमलों में दो लोगों की मौत की बात कही जा रही है।

होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी हमला, फिर शुरू हुई जवाबी कार्रवाई

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता टिम हॉकिन्स के मुताबिक, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के सैनिकों को होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री बारूदी सुरंगों यानी सी-माइन्स के साथ रॉकेट लॉन्च करने की तैयारी करते देखा गया था। इसके बाद अमेरिकी सेना ने कार्रवाई करते हुए ईरानी रॉकेट लॉन्चर को निशाना बनाया।

खास बात यह है कि अमेरिकी सेना ने हाल ही में होर्मुज स्ट्रेट के अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट से सी-माइन्स हटाने का अभियान पूरा किया था। ऐसे में ईरानी सैनिकों की गतिविधि को अमेरिका ने गंभीर खतरे के तौर पर देखा।

29 जुलाई के बाद अमेरिका की बड़ी सैन्य कार्रवाई

अमेरिका ने इससे पहले 29 जुलाई को ईरान के खिलाफ बड़े हमले की पुष्टि की थी। उस दौरान अमेरिकी सेना ने रिवोल्यूशनरी गार्ड के तटीय निगरानी और रक्षा ठिकानों समेत कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था।

इसके कुछ दिन बाद, 1 अगस्त को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि खाड़ी सहयोगियों कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की अपील के बाद उन्होंने ईरान पर नए हमले रोकने का आदेश दिया है।

लेकिन अब होर्मुज स्ट्रेट में हुई ताजा अमेरिकी कार्रवाई ने एक बार फिर संघर्ष को भड़का दिया है।

ईरान ने दी बदला लेने की धमकी

अमेरिकी हमले के बाद ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने अपने कई लड़ाकों और नागरिकों के मारे जाने तथा घायल होने की बात कही। गार्ड के प्रवक्ता जनरल होसैन मोहेबी ने अमेरिकी कार्रवाई को ट्रंप प्रशासन की ‘घातक गलती’ बताया।

उन्होंने चेतावनी दी कि इस कार्रवाई का अमेरिका को सैन्य और आर्थिक दोनों मोर्चों पर परिणाम भुगतना पड़ेगा।

इसके बाद अमेरिकी जहाजों पर हमले की खबर सामने आई है। इन हमलों में दो लोगों की मौत की जानकारी दी गई है।

युद्ध के बीच अमेरिका ने बदली रणनीति

ताजा सैन्य कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ सीधे सैन्य हमलों की जगह आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति पर जोर दे रहा था।

अमेरिका अब उन देशों और संस्थाओं के खिलाफ प्रतिबंधों की चेतावनी दे रहा है जो ईरान के साथ व्यापारिक संबंध बनाए रखते हैं। माना जा रहा था कि आर्थिक दबाव के जरिए तेहरान को बातचीत की मेज पर वापस लाने की कोशिश की जाएगी।

हालांकि, होर्मुज स्ट्रेट में हुई ताजा झड़प से साफ है कि सैन्य टकराव का खतरा अभी खत्म नहीं हुआ है।

अमेरिकी हथियारों के भंडार पर भी दबाव

छह महीने से ज्यादा लंबे संघर्ष ने अमेरिकी सैन्य संसाधनों को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। महीनों की लगातार सैन्य कार्रवाई के बाद अमेरिका अपने हथियारों के घटते भंडार और दुनिया के दूसरे हिस्सों में सेना की तैयारियों पर भी विचार कर रहा है।

इसी वजह से ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर सैन्य दबाव के साथ-साथ आर्थिक प्रतिबंधों को ज्यादा महत्व देना शुरू किया है।

ईरान को 270 अरब डॉलर के नुकसान का दावा

राष्ट्रपति ट्रंप लगातार दावा करते रहे हैं कि अमेरिका और इजराइल के सैन्य अभियान ने ईरान की नौसेना और वायुसेना को भारी नुकसान पहुंचाया है।

वहीं, ईरानी अधिकारियों का दावा है कि युद्ध की वजह से देश को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर करीब 270 अरब अमेरिकी डॉलर का नुकसान हुआ है।

युद्ध के शुरुआती दौर में इजराइली हमलों में ईरान के धार्मिक और सैन्य नेतृत्व ढांचे को भी बड़ा नुकसान पहुंचने की बात कही गई थी।

क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा सामान्य परिस्थितियों में इसी जलमार्ग से गुजरता है।

यही वजह है कि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने पर पूरी दुनिया की नजर होर्मुज स्ट्रेट पर रहती है।

ईरान के पास अभी भी ड्रोन और मिसाइलों की ऐसी क्षमता मौजूद है, जिससे वह इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों के लिए खतरा पैदा कर सकता है। इसी कारण यहां किसी भी सैन्य टकराव का सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति और ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

होर्मुज स्ट्रेट से घटा जहाजों का ट्रैफिक

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप लगातार दावा कर रहे हैं कि होर्मुज स्ट्रेट खुला है और पिछले सप्ताह करीब 24 जहाज इस रास्ते से गुजरे। हालांकि, युद्ध शुरू होने से पहले यहां रोजाना करीब 130 जहाजों का आवागमन होता था।

अमेरिकी नौसेना की निगरानी में काम कर रहे एक बहुराष्ट्रीय गठबंधन ने भी कहा कि स्ट्रेट में कम स्तर पर वाणिज्यिक आवाजाही जारी है।

इस बीच ब्रिटिश सेना द्वारा संचालित समुद्री निगरानी एजेंसी ने बताया कि शनिवार को ओमान के खसाब के उत्तर में एक टैंकर पर किसी अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला किया गया। हालांकि, इस घटना में किसी के हताहत होने या पर्यावरणीय नुकसान की सूचना नहीं मिली।

83 कमर्शियल जहाजों का बदला गया रास्ता

अमेरिकी सेना के मुताबिक, ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी के तहत रविवार तक 83 कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदला गया, जबकि तीन जहाजों को रोका गया।

ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव सिर्फ दोनों देशों के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिए भी बड़ी चुनौती बन सकता है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या होर्मुज स्ट्रेट में हुई ताजा सैन्य झड़प के बाद अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष फिर बड़े पैमाने पर शुरू होगा, या दोनों देश एक बार फिर बातचीत और आर्थिक दबाव के रास्ते पर लौटेंगे।

news desk

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