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आज का पंचांग 31 अगस्त 2026: कजरी तीज पर बन रहा गण्ड योग, जानें अभिजीत मुहूर्त, राहुकाल और चंद्रोदय का सही समय

नई दिल्ली: 31 अगस्त 2026, सोमवार को भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है। उदया तिथि के अनुसार आज कजरी तीज का व्रत रखा जा रहा है। इस दिन मां पार्वती, भगवान महादेव और नीमड़ी माता की पूजा-अर्चना करने का विधान है। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य की कामना से यह व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं मनचाहा वर पाने के लिए कजरी तीज का व्रत करती हैं। आज बहुला चौथ और संकष्टी चतुर्थी का पर्व भी मनाया जा रहा है।

पंचांग के अनुसार आज सूर्य सिंह राशि में और चंद्रमा मीन राशि में स्थित रहेंगे। दिन में गण्ड योग का संयोग बन रहा है, जो अगले दिन यानी 1 सितंबर की रात 1 बजकर 51 मिनट तक रहेगा। इसके बाद वृद्धि योग शुरू होगा। आइए जानते हैं आज की तिथि, नक्षत्र, शुभ-अशुभ मुहूर्त, राहुकाल, सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय का समय।

आज का पंचांग

तिथि: कृष्ण पक्ष की तृतीया सुबह 8 बजकर 50 मिनट तक, इसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू होगी

मास: भाद्रपद

पक्ष: कृष्ण पक्ष

वार: सोमवार

संवत्: 2083

योग: गण्ड, 1 सितंबर को तड़के 1 बजकर 51 मिनट तक, इसके बाद वृद्धि योग

करण: विष्टि यानी भद्रा, सुबह 8 बजकर 50 मिनट तक

करण: बव, रात 8 बजकर 19 मिनट तक, इसके बाद बालव करण

सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय का समय

सूर्योदय: सुबह 5 बजकर 58 मिनट

सूर्यास्त: शाम 6 बजकर 44 मिनट

चंद्रोदय: रात 8 बजकर 29 मिनट

चंद्रास्त: 1 सितंबर को सुबह 8 बजकर 43 मिनट

सूर्य और चंद्रमा किस राशि में रहेंगे

सूर्य देव सिंह राशि में विराजमान रहेंगे। वहीं चंद्र देव मीन राशि में रहेंगे और 1 सितंबर को तड़के 3 बजकर 23 मिनट तक इसी राशि में स्थित रहेंगे। इसके बाद चंद्रमा मेष राशि में प्रवेश करेंगे।

आज के शुभ मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 56 मिनट से दोपहर 12 बजकर 47 मिनट तक

अमृत काल: 1 सितंबर को तड़के 1 बजकर 1 मिनट से तड़के 2 बजकर 36 मिनट तक

आज का राहुकाल और अन्य अशुभ समय

राहुकाल: सुबह 7 बजकर 34 मिनट से सुबह 9 बजकर 10 मिनट तक

गुलिकाल: दोपहर 1 बजकर 57 मिनट से दोपहर 3 बजकर 33 मिनट तक

यमगण्ड: सुबह 10 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 21 मिनट तक

आज रेवती नक्षत्र का रहेगा प्रभाव

31 अगस्त को चंद्रमा रेवती नक्षत्र में रहेंगे। यह नक्षत्र 1 सितंबर को तड़के 3 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। इसके बाद चंद्रमा अश्विनी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे।

रेवती नक्षत्र का विस्तार मीन राशि के 16 डिग्री 40 मिनट से 30 डिग्री तक माना जाता है। इसके स्वामी बुध देव हैं, जबकि राशि स्वामी बृहस्पति हैं। रेवती नक्षत्र के देवता पूषा माने जाते हैं और इसका प्रतीक मछली है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस नक्षत्र से अंतर्ज्ञान, चतुराई, ईमानदारी, साहस, आकर्षण, आशावाद और बुद्धिमत्ता जैसे गुण जुड़े होते हैं।

vineet verma

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