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नीतीश के बाद ‘नंबर 2’ की जंग: 1 अणे मार्ग पर आज तय होगी जेडीयू की नई सियासी दिशा

पटना। बिहार की सत्ता में पिछले दो दशकों से ‘धुरी’ रहे नीतीश कुमार अब राज्यसभा के जरिए देश की संसद में अपनी नई पारी शुरू कर चुके हैं। उनके इस्तीफे और दिल्ली जाने के बाद जेडीयू के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने कुनबे को संभालने और सदन में नेतृत्व करने वाले चेहरे को चुनने की है। आज (सोमवार) मुख्यमंत्री आवास ‘1 अणे मार्ग’ पर होने वाली जेडीयू विधानमंडल दल की बैठक केवल एक औपचारिक चुनाव नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर भविष्य के शक्ति केंद्र (Power Center) का फैसला करेगी।

तीन दिग्गज, एक कुर्सी: कौन मारेगा बाजी?

नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद के साथ-साथ विधान परिषद की सदस्यता भी छोड़ दी है। ऐसे में जेडीयू को विधानसभा और विधान परिषद के लिए एक मजबूत नेता की तलाश है। रेस में तीन प्रमुख नाम सबसे आगे हैं:

विजय कुमार चौधरी: नीतीश के सबसे भरोसेमंद और सौम्य चेहरे के रूप में जाने जाते हैं। वर्तमान में डिप्टी सीएम हैं और सदन की कार्यवाही का लंबा अनुभव रखते हैं।

बिजेंद्र प्रसाद यादव: पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेताओं में शुमार। ऊर्जा क्षेत्र और सरकार के कामकाज पर इनकी पकड़ बेजोड़ है। इन्हें डिप्टी सीएम बनाकर पार्टी ने पहले ही बड़ा कद दिया है।

श्रवण कुमार: कुर्मी समाज से आने वाले श्रवण कुमार को नीतीश का बेहद करीबी माना जाता है। संगठन में उनकी पकड़ और वफादारी उन्हें इस रेस में ‘डार्क हॉर्स’ (छुपारुस्तम) बनाती है।

क्यों अहम है यह बैठक?

यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जब बिहार में नई सरकार का गठन हो रहा था और सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तब जेडीयू विधायक दल की औपचारिक बैठक नहीं हो पाई थी।

नंबर 2 की हैसियत: जो नेता आज चुना जाएगा, वह तकनीकी रूप से जेडीयू में नीतीश कुमार के बाद दूसरे सबसे शक्तिशाली पद पर होगा।

समन्वय की चुनौती: बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार में जेडीयू के हितों की रक्षा करना और मंत्रियों के साथ तालमेल बिठाना नए नेता की प्राथमिकता होगी।

संगठनात्मक संदेश: 85 विधायकों और 20 से अधिक पार्षदों वाली जेडीयू इस चुनाव के जरिए यह संदेश देना चाहती है कि नीतीश के दिल्ली जाने के बाद भी पार्टी एकजुट और आक्रामक है।

पार्टी आलाकमान का रुख

जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा की मौजूदगी में होने वाली इस बैठक पर पूरे देश की नजर है। एमएलसी संजय गांधी के अनुसार, “फैसला सामूहिक होगा”, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मुहर उसी नाम पर लगेगी जिसे नीतीश कुमार का ‘साइलेंट सपोर्ट’ प्राप्त होगा।

news desk

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