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न गांधी, न पेरियार… अन्नामलाई ने खेला ‘कलाम कार्ड’, 10 घंटे में 10 लाख लोग जुड़े, तमिलनाडु की राजनीति में नई हलचल

चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई ने पार्टी से इस्तीफा देने के तुरंत बाद अपने नए राजनीतिक आंदोलन का ऐलान कर दिया है। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि उन्होंने अपने नए वैचारिक अभियान के लिए महात्मा गांधी, पेरियार या किसी पारंपरिक राजनीतिक नेता के बजाय पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइल मैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को अपना प्रेरणास्रोत चुना है।

अन्नामलाई ने अपने नए आंदोलन की शुरुआत ‘कलाम स्कूल ऑफ आइडियोलॉजी’ के तहत की है। उनका कहना है कि यह पहल विकास, शिक्षा, विज्ञान और नैतिक राजनीति को केंद्र में रखकर आगे बढ़ेगी।

‘वी द लीडर’ के नाम से शुरू हुआ नया अभियान

अन्नामलाई के नए आंदोलन का नाम ‘वी द लीडर’ रखा गया है। यह अभियान कोयंबटूर में स्थापित किए जाने वाले एपीजे अब्दुल कलाम सेंटर फॉर एथिक्स एंड पॉलिटिक्स के अंतर्गत संचालित होगा।

दावा किया गया है कि इस पहल की घोषणा के महज 10 घंटे के भीतर 10 लाख से ज्यादा लोग इससे जुड़ चुके हैं। इसे तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ी शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।

आखिर कलाम को ही क्यों चुना?

तमिलनाडु की राजनीति लंबे समय से द्रविड़ आंदोलन और उससे जुड़े नेताओं के प्रभाव में रही है। ऐसे माहौल में अन्नामलाई का डॉ. कलाम को वैचारिक प्रतीक बनाना राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि डॉ. कलाम उन दुर्लभ व्यक्तित्वों में शामिल रहे हैं, जिन्हें समाज के लगभग हर वर्ग में सम्मान मिला। युवा, अल्पसंख्यक, राष्ट्रवादी विचारधारा के समर्थक, पिछड़े और अगड़े वर्ग—सभी के बीच उनकी सकारात्मक छवि रही है।

रामेश्वरम के एक साधारण परिवार से निकलकर देश के शीर्ष वैज्ञानिक और राष्ट्रपति बनने तक का उनका सफर आज भी लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा माना जाता है।

क्या है ‘कलाम स्कूल ऑफ आइडियोलॉजी’?

अन्नामलाई के मुताबिक उनका आंदोलन किसी जाति, धर्म या समुदाय विशेष की राजनीति पर आधारित नहीं होगा। इसका फोकस राज्य और देश के समग्र विकास पर रहेगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि तमिल पहचान और राष्ट्रवाद को एक-दूसरे का विरोधी नहीं बल्कि पूरक माना जाएगा। आंदोलन का उद्देश्य परिवारवाद और व्यक्तिपूजक राजनीति के खिलाफ वैकल्पिक राजनीतिक संस्कृति विकसित करना है।

इसके तहत विज्ञान, तकनीक, शिक्षा और विकास आधारित प्रशासनिक मॉडल को बढ़ावा देने की बात कही गई है। साथ ही पारंपरिक वोट बैंक की राजनीति के बजाय सामाजिक सद्भाव और विचारों की एकता पर जोर दिया जाएगा।

2031 विधानसभा चुनाव पर टिकी नजर

अन्नामलाई ने संकेत दिए हैं कि उनका यह आंदोलन भविष्य में राजनीतिक दल का रूप ले सकता है। उन्होंने साफ कहा कि लक्ष्य वर्ष 2031 का तमिलनाडु विधानसभा चुनाव है।

उनका मानना है कि केवल मुख्यमंत्री, विधायक या सांसद बदलने से व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन संभव नहीं है। इसके लिए पंचायत से लेकर नगर निकायों और शीर्ष राजनीतिक पदों तक हजारों नए और ईमानदार नेतृत्व की जरूरत होगी।

उन्होंने कहा कि उनकी संस्था युवाओं को राजनीति में आने और नेतृत्व की जिम्मेदारियां संभालने के लिए प्रशिक्षित करेगी।

विजयकांत के साथ इंटर्नशिप ने बदली सोच

अन्नामलाई ने अपने छात्र जीवन का एक महत्वपूर्ण अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2009 में आईआईएम लखनऊ में एमबीए के दौरान उन्होंने विशेष अनुमति लेकर डीएमडीके संस्थापक और दिवंगत अभिनेता-राजनेता कैप्टन विजयकांत के साथ तीन महीने तक इंटर्नशिप की थी।

लोकसभा चुनाव के दौरान जमीनी स्तर पर राजनीति को करीब से समझने का मौका मिला, जिसने उनके भीतर सार्वजनिक जीवन और राजनीतिक बदलाव की सोच को मजबूत किया।

इस्तीफे में राष्ट्रीय दलों पर उठाए सवाल

अपने इस्तीफे में अन्नामलाई ने कहा कि राष्ट्रीय राजनीतिक दल तमिलनाडु के आम लोगों की भाषा और भावनाओं को प्रभावी ढंग से समझाने में अक्सर असफल रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि उन्होंने इस धारणा को बदलने का प्रयास किया और कई चुनौतियों के बावजूद इसमें सफलता भी हासिल की। अन्नामलाई ने खुद को ऐसा राष्ट्रवादी बताया जो तमिल भाषा, संस्कृति और क्षेत्रीय आकांक्षाओं पर गर्व करता है।

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