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बिहार फतह के बाद अब ‘ऑपरेशन पंजाब’ की बारी! सिद्धू और कैप्टन के फेल फॉर्मूले के बाद क्या ‘राघव कार्ड’ बनेगा गेमचेंजर?

भारतीय जनता पार्टी के लिए साल 2026 ‘सपनों के सच होने’ वाला साल साबित हो रहा है। बिहार में नीतीश कुमार के युग को चतुराई से पीछे छोड़ अपना मुख्यमंत्री बनाने का जो लक्ष्य बीजेपी ने दशकों पहले तय किया था, उसे उसने हासिल कर लिया। लेकिन अब नजरें उस दुर्ग पर हैं जिसे वह आज तक फतह नहीं कर पाई है पंजाब

बिहार के बाद अब पंजाब: मिशन 2027 की तैयारी बीजेपी के लिए बिहार हमेशा से एक अधूरा एजेंडा था। वहां ‘अपना सीएम’ बनाने की कसक साल 2026 में पूरी हो गई। अब सारा ध्यान पंजाब पर है, जहां बीजेपी सत्ता में तो रही, लेकिन कभी नेतृत्व नहीं कर पाई।

‘ऑपरेशन लोटस’ की जद में केजरीवाल का कुनबा सोशल मीडिया पर #OperationLotus की चर्चा तेज है। अरविंद केजरीवाल के ‘हनुमान’ कहे जाने वाले राघव चड्ढा की बगावत ने न केवल ‘आप’ का कुनबा बिखेर दिया है, बल्कि भगवंत मान सरकार की नींव भी हिला दी है। इस पर मान ने तंज कसते हुए कहा— “हुकूमत वही करते हैं जो लोगों के दिलों पर राज करते हैं, यूं तो मुर्गे के सिर पर भी ताज होता है।”

संजय सिंह ने इसे ‘घटिया राजनीति’ करार दिया है, लेकिन राज्यसभा के 7 दिग्गजों (राघव, हरभजन, स्वाति मालीवाल, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, विक्रम साहनी और राजिंदर गुप्ता) का बीजेपी में विलय ‘आप’ के लिए एक बड़ी मनोवैज्ञानिक चोट है।

सिद्धू और कैप्टन के फेल फॉर्मूले के बाद ‘राघव’ कार्ड बीजेपी ने पंजाब में कमल खिलाने के लिए कई प्रयोग किए:

  • नवजोत सिंह सिद्धू: वे राजनीति की पिच पर कमल नहीं खिला सके और बाद में कांग्रेस चले गए।
  • कैप्टन अमरिंदर सिंह: कांग्रेस के दिग्गज कैप्टन के सहारे भी बीजेपी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली।

अब चर्चा है कि बीजेपी राघव चड्ढा को एक युवा, शिक्षित और पंजाबी चेहरे के तौर पर ‘सीएम फेस’ बना सकती है। यह पहली बार होगा जब बीजेपी के पास पंजाब में चुनाव लड़ने के लिए एक नहीं, बल्कि सात बड़े चेहरे होंगे।

चुनौतियां अभी कम नहीं हैं भले ही सिद्धू के फिर से पाला बदलने की अटकलें तेज हों, लेकिन बीजेपी के लिए राह इतनी आसान नहीं है। पंजाब में कांग्रेस और अकाली दल जैसे दल जमीनी स्तर पर बेहद मजबूत हैं। कांग्रेस अपने संगठन में बड़े बदलाव कर 2027 के लिए अभी से सक्रिय हो गई है।

यह घटनाक्रम बताता है कि राजनीति की बिसात पर कोई भी किला ‘अभेद्य’ नहीं है। जिस तरह बीजेपी ने बिहार में ‘नीतीश युग’ को अपनी शर्तों पर मोड़ा, वही फॉर्मूला अब पंजाब की गलियों में आजमाया जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता का ‘दिल’ जीतने का दावा करने वाले मान और समीकरणों के मास्टर कहे जाने वाले शाह में से कौन पंजाब की सत्ता के शिखर पर पहुंचता है।

SYED MOHAMMAD ABBAS

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