धर्म

27 साल बाद अधिक मास शिवरात्रि पर बन रहा दुर्लभ महासंयोग, 13 जून को महादेव की पूजा से न चूकें, जानें शुभ मुहूर्त और योग

नई दिल्ली: भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाने वाली मासिक शिवरात्रि इस बार विशेष संयोग लेकर आ रही है। ज्येष्ठ अधिक मास में पड़ रही मासिक शिवरात्रि को लेकर ज्योतिषीय गणनाओं में इसे अत्यंत फलदायी माना गया है। मान्यता है कि करीब 27 साल बाद ऐसा दुर्लभ योग बन रहा है, जिससे इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का महत्व कई गुना बढ़ गया है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मासिक शिवरात्रि का व्रत प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को रखा जाता है। यह दिन भगवान शिव और माता गौरी की उपासना के लिए समर्पित माना जाता है। इस वर्ष अधिक मास में पड़ने के कारण इस व्रत का धार्मिक महत्व और भी बढ़ गया है।

कब रखा जाएगा अधिक मास शिवरात्रि व्रत?

पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अधिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 13 जून 2026 को शाम 4 बजकर 7 मिनट पर शुरू होगी। तिथि का समापन 14 जून 2026 को दोपहर 12 बजकर 19 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर अधिक मासिक शिवरात्रि का व्रत 13 जून 2026, शनिवार को रखा जाएगा।

पूजा के लिए शुभ मुहूर्त क्या है?

शिवरात्रि पर प्रदोष काल और निशिता काल को पूजा के लिए सबसे शुभ माना जाता है। इस दिन प्रदोष काल शाम 6 बजकर 34 मिनट से रात 8 बजकर 4 मिनट तक रहेगा। वहीं निशिता काल पूजा का समय रात 12 बजकर 7 मिनट से 12 बजकर 47 मिनट तक निर्धारित है।

27 साल बाद बन रहा दुर्लभ योग

ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, ज्येष्ठ अधिक मास में मासिक शिवरात्रि का यह विशेष संयोग करीब 27 वर्षों बाद बन रहा है। इसी दिन चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में गोचर करेंगे, जिससे गौरी योग का निर्माण होगा। यह योग दांपत्य सुख, पारिवारिक समृद्धि और मनोकामना पूर्ति के लिए शुभ माना जाता है।

मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त पूजा करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है। चूंकि अधिक मास भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है, इसलिए शिव आराधना के साथ भगवान विष्णु की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है।

मासिक शिवरात्रि व्रत का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मासिक शिवरात्रि का व्रत और विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करने से कुंडली में चंद्र दोष के प्रभाव कम होते हैं। इसके अलावा राहु-केतु के अशुभ प्रभाव, शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से प्रभावित लोगों को भी राहत मिलने की मान्यता है।

कहा जाता है कि इस दिन व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से अविवाहित कन्याओं को मनचाहा जीवनसाथी मिलने का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही विवाह में आ रही बाधाएं दूर होने और शीघ्र विवाह के योग बनने की भी मान्यता है।

 

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