नई दिल्ली: नौकरी हो या कारोबार, हर कोई चाहता है कि मेहनत का सही फल मिले और करियर में लगातार तरक्की हो। लेकिन कई बार पूरी कोशिश के बावजूद प्रमोशन अटक जाता है, काम में बार-बार रुकावट आती है या अपेक्षित सफलता नहीं मिलती। ज्योतिष में ऐसी परिस्थितियों को कुंडली में कमजोर या पीड़ित बृहस्पति से जोड़कर देखा जाता है।
ज्योतिष के अनुसार देवगुरु बृहस्पति का संबंध ज्ञान, शिक्षा, धन, भाग्य और मान-सम्मान से माना जाता है। ऐसे में गुरु की स्थिति को मजबूत करने के लिए कई पारंपरिक उपाय बताए गए हैं। मान्यता है कि इन उपायों से करियर में आने वाली बाधाओं को दूर करने में मदद मिल सकती है।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार कुंडली में गुरु कमजोर होने पर जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में इसका प्रभाव दिखाई दे सकता है। इसके संकेतों में मेहनत के बावजूद करियर में अपेक्षित सफलता न मिलना, नौकरी में प्रमोशन बार-बार रुकना और कारोबार की वृद्धि में अड़चन आना शामिल माना जाता है।
इसके अलावा वरिष्ठ अधिकारियों या सहकर्मियों के साथ संबंधों में परेशानी, धन आने के बाद भी बचत न हो पाना, जरूरी फैसलों के समय असमंजस और शिक्षा या ज्ञान से जुड़े कामों में बाधा को भी कमजोर गुरु से जोड़कर देखा जाता है।
ज्योतिष में गुरु को ज्ञान और शिक्षा का कारक माना गया है। इसलिए शिक्षक, माता-पिता, बड़े-बुजुर्ग और मार्गदर्शकों का सम्मान करना गुरु से जुड़े प्रमुख उपायों में शामिल माना जाता है।
अपनी क्षमता के अनुसार उन्हें किताब, पेन, डायरी जैसी उपयोगी चीजें भेंट करना भी शुभ माना जाता है।
बृहस्पति का संबंध पीले रंग से माना जाता है। इसलिए गुरुवार के दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। इस दिन भोजन में चने की दाल, बेसन और हल्दी जैसी पीली चीजों को शामिल करने की सलाह दी जाती है।
सात्विक भोजन करने और नशे या तामसिक खान-पान से दूर रहने को भी गुरु से जुड़े उपायों का हिस्सा माना गया है।
गुरु को मजबूत करने के पारंपरिक उपायों में हल्दी और केसर का तिलक भी बताया गया है। मान्यता है कि स्नान के बाद माथे पर हल्दी या केसर का तिलक लगाने से सकारात्मकता बढ़ती है।
अगर रोजाना ऐसा करना संभव न हो तो गुरुवार के दिन यह उपाय किया जा सकता है।
गुरु से जुड़े उपायों में मंत्र जाप को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। सुबह स्नान करने के बाद शांत स्थान पर बैठकर ‘ॐ बृं बृहस्पतये नमः’ मंत्र का जाप किया जा सकता है।
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार श्रद्धा के साथ इस मंत्र का 11, 21 या 108 बार जाप करना शुभ माना जाता है।
बृहस्पति का संबंध शिक्षा और ज्ञान से माना जाता है। इसलिए जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई में सहयोग करना भी गुरु से जुड़ा उपाय बताया गया है।
किसी विद्यार्थी को किताब, कॉपी, पेन या अन्य शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराना सकारात्मक पहल मानी जाती है।
ज्योतिषीय उपायों की अपनी मान्यताएं हैं, लेकिन करियर में सफलता केवल किसी ग्रह की स्थिति या उपाय पर निर्भर नहीं करती। मेहनत के साथ सही कौशल विकसित करना, अनुशासन बनाए रखना, बेहतर फैसले लेना और लगातार नई चीजें सीखते रहना भी तरक्की के लिए जरूरी है।
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