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आग ने सबकुछ जला दिया, लेकिन नहीं छू सकी इस मंदिर को… यहां विराजते हैं मूंछों वाले कृष्ण, जानें रहस्य

इंदौर: मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के आखिरी गांव गिरोता में भगवान श्रीकृष्ण का एक ऐसा मंदिर है, जो अपने अनोखे स्वरूप और उससे जुड़ी मान्यताओं के कारण श्रद्धालुओं के बीच खास पहचान रखता है। यहां कान्हा सामान्य बाल स्वरूप में नहीं, बल्कि मूंछों वाले कृष्ण के रूप में विराजमान हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार मूंछों को आन-बान-शान, आत्मसम्मान और मर्यादा का प्रतीक माना जाता है। गांव के मुख्य चौराहे पर स्थित इस मंदिर को श्रद्धालु ‘चौराहे वाले बा का मंदिर’ भी कहते हैं।

मूंछों वाले कृष्ण की अनोखी प्रतिमा

गांव के मुख्य चौराहे पर बने इस मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की ऐसी प्रतिमा स्थापित है, जिसमें उनके चेहरे पर मूंछें दिखाई देती हैं। इसी वजह से यहां भगवान को ‘मूंछों वाले कृष्ण’ के नाम से पूजा जाता है।

स्थानीय मान्यता में भगवान के इस स्वरूप को आन-बान और आत्मसम्मान से जोड़ा जाता है। मंदिर की यह खास पहचान इसे आसपास के दूसरे कृष्ण मंदिरों से अलग बनाती है और दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनाती है।

जब आग की लपटों के बीच भी सुरक्षित रहा मंदिर

इस मंदिर से जुड़ी सबसे चर्चित मान्यता वर्षों पुरानी आग की घटना से जुड़ी है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, उस समय गांव में ज्यादातर घर लकड़ी से बने हुए थे। एक बार गांव में भीषण आग लग गई और मंदिर के आसपास के कई घर उसकी चपेट में आ गए।

हैरानी की बात यह बताई जाती है कि मंदिर भी लकड़ी का बना होने के बावजूद आग से सुरक्षित रहा। मान्यता के अनुसार, जब पुजारी ने आग को तेजी से बढ़ते देखा तो उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा को वहां से हटाने की कोशिश की, लेकिन प्रतिमा अपने स्थान से नहीं हिली। इसके बाद ग्रामीणों की आस्था इस मंदिर के प्रति और गहरी हो गई।

द्वार जैसी है मंदिर की बनावट

गिरोता का यह मंदिर अपनी बनावट के कारण भी अलग नजर आता है। मंदिर का ढांचा कुछ इस तरह बनाया गया है कि यह एक द्वार जैसा दिखाई देता है। गांव के लोग मंदिर के नीचे से होकर गुजरते हैं।

स्थानीय श्रद्धालुओं की मान्यता है कि मंदिर के नीचे से होकर गुजरने पर भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद मिलता है। लोगों का विश्वास है कि इससे उनके मनोरथ पूरे होते हैं और कामों में सफलता मिलती है।

जन्माष्टमी पर उमड़ते हैं श्रद्धालु

मंदिर में नियमित रूप से पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन होता है, लेकिन श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और एकादशी के अवसर पर यहां विशेष आयोजन किए जाते हैं। जन्माष्टमी के दिन मंदिर को खास तौर पर सजाया जाता है।

इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। रात तक भजन-कीर्तन का दौर चलता है और भगवान श्रीकृष्ण के विशेष स्वरूप के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ जुटती है।

बारिश को लेकर भी है खास मान्यता

मंदिर से जुड़ी एक और मान्यता बारिश से संबंधित है। स्थानीय लोगों के अनुसार, जब आसपास के क्षेत्रों में बारिश नहीं होती और लोग परेशान होते हैं, तब मंदिर में विशेष रूप से डोल सजाया जाता है।

श्रद्धालु कुछ दिनों तक डोल के आसपास फेरे लगाते हैं और ‘हरे राम, हरे कृष्ण’ का संकीर्तन करते हैं। ग्रामीणों की मान्यता है कि इस धार्मिक अनुष्ठान के बाद क्षेत्र में अच्छी बारिश होती है। यही मान्यताएं गिरोता के इस अनोखे कृष्ण मंदिर को स्थानीय आस्था का खास केंद्र बनाती हैं।

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