यह तकनीक घुटने के दर्द और जोड़ों की समस्या से जूझ रहे मरीजों के लिए नए युग की सुविधा लेकर आई है। पारंपरिक घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी के मुकाबले, इस तकनीक में मरीज मात्र 4 से 6 घंटे में खड़ा होकर चलने में सक्षम हो जाता है, जिससे अस्पताल में रुकने की अवधि भी काफी कम हो जाती है।
डॉ. प्रियांक गुप्ता ने कहा, “हमारा उद्देश्य लखनऊ और पूरे उत्तर प्रदेश के मरीजों को वैश्विक स्तर की जॉइंट रिप्लेसमेंट सुविधा उनके अपने शहर में उपलब्ध कराना है। अब मरीजों को आधुनिक ‘रैपिड रिकवरी जॉइंट सर्जरी’ के लिए बड़े महानगरों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा।”
इस नई बायो एलाइन तकनीक से अब मरीजों को लंबे समय तक वॉकर या घुटने प्रत्यारोपण की जरूरत नहीं होगी। यह तकनीक कम खर्च में भी कारगर साबित हो रही है और लखनऊवासियों को जोड़ों की समस्या से राहत देने की उम्मीद जगाती है।
विशेषज्ञों का कहना है: लखनऊ में यह तकनीक पहली बार लॉन्च की गई है और इसे अपनाकर मरीज जल्द ही सक्रिय और दर्द-मुक्त जीवन जी सकेंगे।
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