एक ऐसा सैटायर पेज जो महज कुछ दिनों पहले शुरू हुआ था, उसने देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के डिजिटल आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया। लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ “फॉलोअर्स की संख्या” ही इस बैन की वजह थी, या फिर CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के बढ़ते प्रभाव ने सत्ता के गलियारों में बेचैनी पैदा कर दी थी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (@CJP_2029) के अकाउंट को भारत में प्रतिबंधित कर दिया है। कंपनी का कहना है कि यह कदम एक “कानूनी मांग” के तहत उठाया गया है। लेकिन इस प्रतिबंध के पीछे की कहानी सिर्फ कानूनी दांव-पेच तक सीमित नहीं है, यह कहानी है एक नए किस्म के डिजिटल प्रोटेस्ट की।
CJP की शुरुआत सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत के उस कथित बयान के बाद हुई थी, जिसमें बेरोजगारी को लेकर टिप्पणी की गई थी। जब देश के युवाओं ने खुद को “कॉकरोच” (जो हर विपरीत परिस्थिति में भी जीवित बच जाता है) कहना शुरू किया, तो यह एक मजाक से बढ़कर उनकी पहचान बन गया। व्यंग्य हमेशा से ताकतवर रहा है, लेकिन CJP ने इसे पूरी तरह “इलेक्शन मोड” में बदल दिया।
जब इंस्टाग्राम पर CJP ने बीजेपी के आधिकारिक फॉलोअर्स की संख्या को पार किया, तब यह सिर्फ एक वायरल ट्रेंड नहीं रह गया, बल्कि एक “डिजिटल चुनौती” बन गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब कोई बिना किसी बड़े बजट या आईटी सेल के, पूरी तरह स्वाभाविक तरीके से इतना बड़ा जन-आधार बना लेता है, तो सिस्टम उसे नियंत्रित करने की कोशिशें तेज कर देता है।
सरकार और आईटी नियमों के मुताबिक, किसी भी अकाउंट को ब्लॉक करने के पीछे ‘पब्लिक ऑर्डर’ या ‘गलत सूचना’ का हवाला दिया जाता है। CJP के मामले में उनका ‘पैरोडी’ होना भी उन्हें बचा नहीं सका।
इंटरनेट का इतिहास गवाह है कि डिजिटल दुनिया में जब आप एक अकाउंट बंद करते हैं, तो उसकी जगह 10 नए हैंडल खड़े हो जाते हैं। CJP का X अकाउंट भले ही बंद हो गया हो, लेकिन इंस्टाग्राम पर उनकी मौजूदगी अब भी बरकरार है। इस फ्रंट से जुड़े लोगों का कहना है कि यह “सेंसरशिप” उनके लिए एक मेडल की तरह है, जो यह साबित करता है कि उनकी बात सही जगह पर चुभी है।
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