पारंपरिक तौर पर भारतीय परिवारों में आज भी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) या रियल एस्टेट को निवेश का सबसे सुरक्षित और पसंदीदा जरिया माना जाता है। लेकिन क्या वाकई इनमें पैसा लगाना आपको लंबी अवधि में अमीर बना रहा है? ‘फंड्स इंडिया’ की हालिया वेल्थ रिपोर्ट के जो आंकड़े सामने आए हैं, वे पारंपरिक सोच को पूरी तरह से बदलने वाले हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, अगर आप 10, 15 या 20 साल जैसी लंबी अवधि के लिए निवेश का प्लान कर रहे हैं, तो शेयर बाजार (भारतीय और अमेरिकी दोनों) ने डेट फंड्स और रियल एस्टेट जैसी दूसरी सभी संपत्तियों को मीलों पीछे छोड़ दिया है। दिलचस्प बात यह है कि बीते दो दशकों में सोने (Gold) ने भी निवेशकों को छप्परफाड़ रिटर्न दिया है, लेकिन वह भी अमेरिकी बाजार की रफ्तार से पिछड़ गया।
लॉन्ग टर्म में किस एसेट क्लास ने निवेशकों की किस्मत बदली, इसे समझने के लिए पिछले दो दशकों (20 साल) के सालाना रिटर्न और वेल्थ क्रिएशन के इस तुलनात्मक चार्ट को देखिए..
| एसेट क्लास (Asset Class) | 20 साल का सालाना रिटर्न (%) | 20 साल में कितने गुना हुआ पैसा? |
| अमेरिकी इक्विटी (US Stocks) | 15.2% | लगभग 17.01 गुना |
| सोना (Gold) | 14.6% | लगभग 15 गुना से ज्यादा |
| भारतीय इक्विटी (Nifty 50) | 11.4% | लगभग 8.7 गुना |
| रियल एस्टेट (Real Estate) | 7.9% | लगभग 4.5 गुना |
| डेट इंस्ट्रूमेंट्स / FD | 7.5% – 7.6% | लगभग 4.3 गुना |
अमेरिकी बाजार ने 10 साल की अवधि में 19.4% और 15 साल की अवधि में 19.8% का शानदार सालाना रिटर्न देकर निवेशकों की संपत्ति को क्रमशः 5.9 गुना और 15 गुना तक बढ़ाया है।
अगर आपको लगता है कि भारतीय शेयर बाजार बहुत ज्यादा अस्थिर है, तो रिपोर्ट का यह आंकड़ा आपकी चिंता दूर कर देगा। जुलाई 1990 से लेकर अब तक (पिछले 35 वर्षों में), भारतीय बाजार ने कई बड़े घोटाले, वैश्विक मंदी, आर्थिक संकट और सुधारों के दौर देखे हैं।
इन तमाम उतार-चढ़ावों के बावजूद, निफ्टी 50 (Nifty 50) ने 13.2% की कंपाउंडेड एनुअल Growth Rate (CAGR) दर्ज की है। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि जिसने 35 साल पहले बाजार में 1 लाख रुपये लगाकर छोड़ दिए थे, उसकी रकम आज बढ़कर लगभग 85 लाख रुपये (85 गुना) हो चुकी है।
जब बात भारतीय शेयर बाजार के अलग-अलग सेक्टर्स की आती है, तो पिछले 20 सालों में मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट ने लार्ज-कैप (बड़ी कंपनियों) के मुकाबले कहीं ज्यादा आक्रामक रिटर्न दिया है:
रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि इक्विटी में शॉर्ट-टर्म (6 महीने से 3 साल) का निवेश हमेशा जोखिम भरा और अस्थिर हो सकता है, जहां आपको नुकसान (Negative Return) भी झेलना पड़ सकता है।
लेकिन, जैसे-जैसे आप अपने निवेश का समय बढ़ाते हैं, नुकसान की संभावना घटकर शून्य के करीब पहुंच जाती है। ऐतिहासिक डेटा गवाह है कि जिन निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 7 वर्ष या उससे अधिक समय तक धैर्य बनाए रखा, उन्हें बाजार ने कभी निराश नहीं किया और लगातार 7 से 10 फीसदी से कहीं ज्यादा का दमदार रिटर्न कमा कर दिया।
यदि आप केवल सुरक्षित निवेश के नाम पर एफडी या पारंपरिक स्कीम्स में पैसा पार्क कर रहे हैं, तो आप महंगाई को तो हरा सकते हैं, लेकिन बड़ी दौलत (Wealth Creation) नहीं बना सकते। समझदारी इसी में है कि वित्तीय लक्ष्यों के हिसाब से अपने पोर्टफोलियो में अमेरिकी और भारतीय इक्विटी के साथ सोने का एक सही संतुलन (Asset Allocation) बनाएं।
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