नई दिल्ली: दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ रहे गंभीर चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ को लेकर प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। समुद्र में ऊंची लहरें उठने और तेज हवाएं चलने के बीच प्रकाशम जिले के तटीय इलाकों में बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है। तूफान की आशंका को देखते हुए 26 संवेदनशील गांवों और करीब 70 बस्तियों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। वहीं, चक्रवात का अप्रत्यक्ष असर केरल में भी देखने को मिल सकता है, जहां अगले कुछ दिनों तक बारिश का अनुमान है।
प्रकाशम जिले के कलेक्टर पी. राजा बाबू ने बताया कि समुद्र तट से लगे सात मंडलों के 26 संवेदनशील गांव और करीब 70 बस्तियां तूफान से प्रभावित हो सकती हैं। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर इन इलाकों के लोगों को चक्रवात राहत केंद्रों में पहुंचाना शुरू कर दिया है।
महिलाओं, बच्चों और गर्भवती महिलाओं को प्राथमिकता
राहत और बचाव अभियान के दौरान महिलाओं, बच्चों और गर्भवती महिलाओं को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। जिन गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी की तारीख नजदीक है, उन्हें आसपास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल चिकित्सा सुविधा मिल सके।
सुरक्षा के मद्देनजर स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है। इसके अलावा संवेदनशील गांवों में पुलिस और राजस्व विभाग के कर्मचारियों की तैनाती की गई है, ताकि लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सके और किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।
74 किलोमीटर के तट पर NDRF की तीन टीमें तैनात
प्रकाशम जिले में आपात स्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की तीन टीमें तैनात की गई हैं। जिले की 74 किलोमीटर लंबी तटीय सीमा को तीन हिस्सों में बांटकर इन टीमों को अलग-अलग संवेदनशील स्थानों पर लगाया गया है।
प्रशासन की कोशिश है कि तूफान का असर बढ़ने से पहले तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचा दिया जाए। राहत केंद्रों और संवेदनशील क्षेत्रों में हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।
रात में बढ़ सकती है तूफान की गंभीरता
जिला कलेक्टर पी. राजा बाबू के मुताबिक, समुद्र में ऊंची लहरें उठ रही हैं और हवा की रफ्तार भी बढ़ रही है। ऐसे में रात के समय तूफान का असर और गंभीर हो सकता है। इसे देखते हुए प्रशासन ने मंडल, डिवीजन और जिला कलेक्ट्रेट स्तर पर नियंत्रण कक्ष बनाए हैं।
ये नियंत्रण कक्ष 24 घंटे काम कर रहे हैं, ताकि किसी भी आपात सूचना पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। प्रशासन ने तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने को कहा है।
केरल में भी बारिश का अनुमान, लेकिन सीधा खतरा नहीं
चक्रवात मुरासु का असर केरल में भी महसूस किया जा सकता है। हालांकि, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की वैज्ञानिक नीता के. गोपाल के मुताबिक, राज्य पर तूफान का सीधे तौर पर खतरनाक प्रभाव पड़ने की आशंका नहीं है। इसके बावजूद चक्रवात के अप्रत्यक्ष असर से केरल के कई हिस्सों में बारिश हो सकती है।
उनके अनुसार, राज्य के ज्यादातर इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है, जबकि कुछ स्थानों पर भारी बारिश भी हो सकती है। मौसम विभाग ने इसके पीछे केरल तट के पास बने चक्रवाती परिसंचरण और पूर्वी हवाओं के प्रभाव को वजह बताया है।
चक्रवात कमजोर होने के बाद बढ़ सकती हैं बारिश की गतिविधियां
मौसम वैज्ञानिक के मुताबिक, जब चक्रवात मुरासु आंध्र प्रदेश के तट के करीब पहुंचेगा, तट पार करेगा और धीरे-धीरे कमजोर होकर खत्म होगा, तब केरल में बारिश की गतिविधियां तेज हो सकती हैं। शुक्रवार, शनिवार और रविवार को राज्य के कई हिस्सों में व्यापक बारिश होने का अनुमान जताया गया है।
हालांकि, केरल में चक्रवात से जुड़ी तेज हवाओं या अन्य खतरनाक मौसमी परिस्थितियों का सीधा खतरा नहीं बताया गया है। फिलहाल आंध्र प्रदेश में प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है, जबकि केरल में संभावित बारिश को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।