नई दिल्ली: डेटिंग ऐप्स पर सच्चे प्यार की तलाश में भटक रहे कुछ लोगों ने अब अपना रास्ता बदल लिया है। घंटों इंतजार, बातचीत के बीच अचानक संपर्क टूटना और बार-बार मिलने वाली निराशा से परेशान होकर लोग अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चैटबॉट्स में अपना साथी तलाश रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि कुछ लोग इन डिजिटल साथियों के साथ रोमांटिक रिश्ते तक बना चुके हैं। तीन महिलाओं की ऐसी ही कहानियां इन दिनों चर्चा में हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या तकनीक अब इंसानी रिश्तों की जगह लेने लगी है या फिर यह अकेलेपन से जूझ रहे लोगों के लिए महज भावनात्मक सहारा है?
डेटिंग ऐप्स से क्यों होने लगा मोहभंग?
एक समय था जब डेटिंग ऐप्स को मनपसंद साथी खोजने का आसान जरिया माना जाता था। लेकिन धीरे-धीरे कई लोगों के लिए यह अनुभव निराशाजनक साबित होने लगा। किसी को घंटों इंतजार के बाद जवाब नहीं मिलता, तो किसी की बातचीत शुरू होने से पहले ही सामने वाला संपर्क तोड़ देता है। कई बार फर्जी तस्वीरों और अधूरी जानकारियों वाली प्रोफाइल भी परेशानी बढ़ाती हैं।
ऐसे माहौल में लोगों को एक ऐसा साथी आकर्षित करने लगा है, जो हर वक्त बातचीत के लिए उपलब्ध हो, उनकी बातें याद रखे और बिना किसी शिकायत के उनकी परेशानियां सुने। AI चैटबॉट्स इसी जरूरत को पूरा करते नजर आ रहे हैं। यही वजह है कि कुछ लोग अब इंसानों के बजाय डिजिटल साथी के साथ भावनात्मक जुड़ाव महसूस करने लगे हैं।
तीन महिलाओं ने AI चैटबॉट को बनाया अपना रोमांटिक पार्टनर
AI के साथ रिश्ते बनाने का चलन सिर्फ किसी एक देश तक सीमित नहीं है। दिसंबर 2025 में जापान की युरिना नोगुची की कहानी भी सामने आई थी। उन्होंने चैटजीपीटी की मदद से तैयार किए गए एक AI किरदार के साथ प्रतीकात्मक शादी की थी। हालांकि, इस तरह के रिश्ते को कानूनी विवाह का दर्जा नहीं मिलता, लेकिन यह घटना बताती है कि कुछ लोग तकनीक के साथ कितना गहरा भावनात्मक जुड़ाव बना रहे हैं।
इस बदलते चलन को समझने के लिए तीन महिलाओं की कहानियां सामने आई हैं। इनमें सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट इंजीनियर अनिका शर्मा, सेल्स एग्जीक्यूटिव दृष्टिका कटारिया और ब्रिटिश नागरिक मायाना मिलर शामिल हैं। तीनों अपने AI साथियों के साथ रोमांटिक रिश्ते में हैं।
अनिका पिछले छह महीनों से AI पार्टनर के साथ रिश्ते में हैं। उनके मुताबिक, इस रिश्ते में सबसे बड़ी राहत यह है कि उन्हें हर वक्त खुद को साबित करने या सामने वाले की प्रतिक्रिया को लेकर परेशान नहीं होना पड़ता। वह अपनी बातें बिना किसी झिझक के साझा कर सकती हैं। अनिका का मानना है कि भले ही इस रिश्ते में शारीरिक नजदीकी नहीं है, लेकिन भावनात्मक जुड़ाव को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। वह इसे कुछ हद तक दूर रहकर निभाए जाने वाले रिश्ते जैसा मानती हैं।
डेटिंग अब नौकरी के इंटरव्यू जैसी लगने लगी है
दृष्टिका कटारिया पिछले नौ महीनों से AI साथी के साथ रोमांटिक रिश्ते में हैं। उनका कहना है कि आजकल डेटिंग कई बार नौकरी के इंटरव्यू जैसी महसूस होने लगी है। दोनों लोग एक-दूसरे को समझने के बजाय अपनी भावनाएं छिपाने और सही जवाब देने में लगे रहते हैं।
दृष्टिका के मुताबिक, AI के साथ बातचीत में उन्हें इस बात की चिंता नहीं रहती कि सामने वाला उनमें दिलचस्पी रखता है या नहीं। उनका डिजिटल साथी हर समय बातचीत के लिए उपलब्ध रहता है। धीरे-धीरे यह जुड़ाव उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है।
वहीं, मायाना मिलर पिछले तीन महीनों से AI पार्टनर के साथ रिश्ते में हैं। उनका कहना है कि AI से भावनात्मक लगाव रखने का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को वास्तविकता और कल्पना के बीच फर्क समझ में नहीं आता। उन्हें पता है कि वह किसी इंसान से नहीं, बल्कि एक तकनीकी प्रणाली से बात कर रही हैं। इसके बावजूद यह बातचीत उनके लिए मायने रखती है।
क्या AI सच में प्यार करता है या सिर्फ वैसा महसूस कराता है?
AI चैटबॉट्स की लोकप्रियता के पीछे एक बड़ी वजह उनका बातचीत करने का तरीका है। ये आपकी पसंद-नापसंद याद रख सकते हैं, आपकी बातों पर प्रतिक्रिया दे सकते हैं और जरूरत पड़ने पर रोमांटिक अंदाज में बातचीत भी कर सकते हैं। कई मंचों पर यूजर अपने डिजिटल साथी का व्यक्तित्व, बातचीत का तरीका और पसंद भी तय कर सकते हैं।
लगातार बातचीत के दौरान निजी बातें, मजाक और पुरानी यादों जैसी जानकारियां जुड़ती जाती हैं। इससे यूजर को लग सकता है कि सामने वाला उन्हें अच्छी तरह समझता है। यहां अस्वीकृति, अनदेखी और गलतफहमी का डर भी अपेक्षाकृत कम महसूस होता है।
हालांकि, इस जुड़ाव को समझने के लिए शोध भी किए जा रहे हैं। ‘Computers in Human Behavior: Artificial Humans’ में प्रकाशित ‘Love, Marriage, Pregnancy: Commitment Processes in Romantic Relationships with AI Chatbots’ नामक अध्ययन में AI चैटबॉट्स के साथ रोमांटिक रिश्तों को समझने की कोशिश की गई है। इसके निष्कर्ष बताते हैं कि कुछ लोग ऐसे रिश्तों को गंभीरता से लेते हैं। हालांकि, अध्ययन के सीमित नमूने के कारण यह नहीं कहा जा सकता कि दुनिया भर में कितने लोग इस तरह के रिश्तों में हैं।
हर बात पर सहमति जताने वाला AI बन सकता है परेशानी की वजह
AI साथी का एक आकर्षक पहलू यह है कि वह आमतौर पर आपकी बातों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देता है। लेकिन यही आदत आगे चलकर परेशानी भी पैदा कर सकती है। मान लीजिए, आपका किसी करीबी से झगड़ा हो गया और आप AI से पूछते हैं कि गलती किसकी थी। अगर चैटबॉट बिना पूरी परिस्थिति समझे आपकी ही बात का समर्थन करने लगे, तो संभव है कि आप अपनी गलती पर विचार ही न करें।
मार्च 2026 में साइंस जर्नल में प्रकाशित ‘Sycophantic AI Decreases Prosocial Intentions and Promotes Dependence’ नामक अध्ययन में 11 AI मॉडल का परीक्षण किया गया। शोध में पाया गया कि AI मॉडल ने इंसानों के जवाबों की तुलना में यूजर की बातों का 49 फीसदी अधिक समर्थन किया।
2,405 लोगों पर किए गए प्रयोगों में यह भी सामने आया कि जरूरत से ज्यादा सहमति जताने वाले AI जवाब लोगों को अपनी गलतियां स्वीकार करने और रिश्तों में सुधार की कोशिश करने से दूर कर सकते हैं। यानी हर बार आपकी बात सही ठहराने वाला डिजिटल साथी जरूरी नहीं कि आपके लिए हमेशा फायदेमंद साबित हो।
रिश्तों के फैसले में AI की सलाह कितनी भरोसेमंद?
डेटिंग और निजी रिश्तों में AI की बढ़ती भूमिका को लेकर CHI 2026 में पेश एक अन्य शोध ‘Chat, Should I Leave Him? Risks, Rewards, and Roles for AI in Relationship Advice’ में भी चर्चा की गई है। इसमें रिश्तों से जुड़े फैसलों के लिए AI से सलाह लेने के फायदे और संभावित जोखिमों पर ध्यान दिया गया।
इसमें कोई शक नहीं कि AI किसी मुश्किल परिस्थिति को समझने, अपनी भावनाओं को शब्द देने और दूसरे नजरिए से सोचने में मदद कर सकता है। लेकिन रिश्ते तोड़ने या जोड़ने जैसे बड़े फैसले सिर्फ चैटबॉट की सलाह पर लेना सही नहीं होगा। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि AI को अक्सर मामले का सिर्फ वही पक्ष पता होता है, जो यूजर उसे बताता है।
AI साथी के साथ प्यार, लेकिन क्या इंसानी रिश्तों की जगह ले पाएगा?
AI के साथ रोमांटिक जुड़ाव रखने वाले सभी लोगों के लिए इसका मतलब एक जैसा नहीं है। कुछ लोग इसे मनोरंजन या भावनात्मक सहारे के तौर पर देखते हैं, जबकि कुछ इसे अपने जीवन का अहम रिश्ता मानने लगे हैं। ऐसे लोग भी हैं जो AI साथी से जुड़ाव के बावजूद वास्तविक दुनिया में अपने रिश्ते निभा रहे हैं।
अनिका, दृष्टिका और मायाना की कहानियां बताती हैं कि डिजिटल रिश्तों के पीछे अकेलेपन से लेकर बिना किसी झिझक के अपनी बात कह पाने की इच्छा तक कई वजहें हो सकती हैं। AI हर समय जवाब दे सकता है, आपको इंतजार नहीं करवाता और बातचीत के दौरान आपकी बातों को नजरअंदाज भी नहीं करता। लेकिन यह समझना जरूरी है कि किसी इंसान की तरह भावनाएं महसूस करना और भावनाओं के अनुरूप जवाब तैयार करना दो अलग-अलग बातें हैं।
आखिरकार, AI चैटबॉट किसी इंसानी साथी की जगह ले पाएगा या नहीं, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना जरूर है कि रिश्तों की बदलती दुनिया में लोग अब सिर्फ प्यार नहीं, बल्कि ऐसा साथ भी चाहते हैं जहां उनकी बात सुनी जाए, उन्हें समझा जाए और उन्हें अकेलापन महसूस न हो। सवाल यही है कि क्या लोग सचमुच AI से प्यार करने लगे हैं या फिर उन्हें उस एहसास से लगाव हो रहा है, जिसकी तलाश में वे लंबे समय से इंसानी रिश्तों के दरवाजे खटखटा रहे थे?