नई दिल्ली: भागदौड़ भरी जिंदगी, काम का दबाव, रिश्तों में बढ़ती दूरी और आर्थिक परेशानियां धीरे-धीरे मानसिक तनाव की वजह बन रही हैं। डिजिटल दौर में लोगों का ध्यान अपनों से ज्यादा मोबाइल और सोशल मीडिया पर रहने लगा है। दूसरों की जिंदगी से अपनी तुलना करने की आदत भी मानसिक बेचैनी को बढ़ा सकती है। ऐसे में कई लोग कम उम्र में ही तनाव, चिंता और जरूरत से ज्यादा सोचने यानी ओवरथिंकिंग की समस्या से जूझ रहे हैं।
कई बार दिमाग में विचारों का सिलसिला इतना तेज हो जाता है कि रात में भी सुकून नहीं मिलता। व्यक्ति अकेले में लगातार खुद से बातें करता रहता है और चाहकर भी अपने विचारों को रोक नहीं पाता। मानसिक शांति पाने के लिए लोग अलग-अलग तरीके अपनाते हैं, लेकिन महर्षि महेश योगी की ओर से विकसित ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन (TM) भी एक विकल्प है। यह मौन ध्यान की ऐसी तकनीक है, जिसमें मन ही मन एक विशेष मंत्र या ध्वनि को दोहराया जाता है।
इस ध्यान का अभ्यास दिन में दो बार, करीब 15 से 20 मिनट करने की सलाह दी जाती है। इससे तनाव कम करने, मन को शांत रखने और एकाग्रता बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। आइए जानते हैं कि ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन क्या है, इसे कैसे किया जाता है और इसके संभावित फायदे क्या हैं।
ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन (TM) क्या है?
ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन मौन ध्यान की एक पद्धति है, जिसे महर्षि महेश योगी ने विकसित किया था। इसमें व्यक्ति किसी विशेष मंत्र या ध्वनि को मन ही मन दोहराता है। इसका अभ्यास आमतौर पर दिन में दो बार 15 से 20 मिनट तक किया जाता है। इसे एक निर्धारित प्रशिक्षण प्रक्रिया के जरिए सिखाया जाता है।
यह एक गैर-धार्मिक ध्यान पद्धति है। इसका उद्देश्य मन को सहज रूप से शांत करना और जागरूकता को बढ़ावा देना है। इस तकनीक में विचारों को जबरदस्ती रोकने या मन को किसी एक स्थिति में बनाए रखने की कोशिश नहीं की जाती। मंत्र को बिना किसी दबाव के मन में दोहराया जाता है और ध्यान भटकने पर सहजता से फिर उसी मंत्र की ओर लौटते हैं।
TM को लेकर कई वर्षों से शोध किए जा रहे हैं। कुछ न्यूरोइमेजिंग और ईईजी अध्ययनों में इसके अभ्यास के दौरान मस्तिष्क के दोनों गोलार्धों के बीच फ्रंटल अल्फा वेव कोहेरेंस बढ़ने की बात सामने आई है। इसे गहरी विश्राम की स्थिति से जोड़कर देखा जाता है, जिसमें व्यक्ति की जागरूकता बनी रहती है।
कुछ शोधों में यह भी पाया गया है कि इस अभ्यास के दौरान और बाद में तनाव से जुड़े हार्मोन कोर्टिसोल और नॉरपेनेफ्रिन का स्तर कम हो सकता है। जर्नल ऑफ क्लिनिकल साइकोलॉजी में प्रकाशित एक मेटा-एनालिसिस के मुताबिक, ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन चिंता, अवसाद और पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस से जुड़े लक्षणों को कम करने में मददगार हो सकता है। हालांकि, इसके प्रभाव को लेकर अलग-अलग अध्ययनों के नतीजों और उनकी सीमाओं को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन कैसे किया जाता है?
ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन का अभ्यास दिन में दो बार किया जा सकता है। इसके लिए किसी शांत जगह पर आराम से बैठें। आप कुर्सी या जमीन पर बैठ सकते हैं। बैठते समय रीढ़ की हड्डी को सहज स्थिति में रखें और आंखें बंद कर लें। शरीर को ढीला छोड़कर कुछ देर शांत बैठें।
इस ध्यान का मुख्य आधार एक विशेष मंत्र या ध्वनि है। इसे मन ही मन दोहराया जाता है। मंत्र का अर्थ समझने या उसका विश्लेषण करने की जरूरत नहीं होती। इसे बिना किसी जोर या प्रयास के सहजता से मन में दोहराना होता है।
ध्यान के दौरान मन में दूसरे विचार आना स्वाभाविक है। ऐसे में विचारों को रोकने या उनसे परेशान होने की जरूरत नहीं है। जब महसूस हो कि ध्यान भटक गया है, तो सहजता से फिर मंत्र पर लौट आएं।
करीब 15 से 20 मिनट अभ्यास करने के बाद तुरंत आंखें न खोलें। मंत्र दोहराना बंद कर दें और दो से तीन मिनट तक आंखें बंद रखकर शांत बैठे रहें। इसके बाद धीरे-धीरे आंखें खोलें। ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन की निर्धारित विधि सीखने के लिए प्रमाणित प्रशिक्षक से मार्गदर्शन लेना बेहतर माना जाता है।
ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन के मानसिक स्वास्थ्य पर क्या फायदे हो सकते हैं?
योग विशेषज्ञों और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े जानकारों के मुताबिक, ध्यान की नियमित प्रक्रिया शरीर के तनाव प्रतिक्रिया तंत्र को शांत करने में मदद कर सकती है। ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन के संभावित फायदे भी इसी से जुड़े हैं।
इसका नियमित अभ्यास मानसिक तनाव कम करने और मन को शांत रखने में मदद कर सकता है। कुछ शोधों में इसे चिंता और बेचैनी के लक्षणों में कमी से जोड़ा गया है। इसके अलावा, ध्यान के दौरान मस्तिष्क की गतिविधियों में होने वाले बदलावों को एकाग्रता और मानसिक स्पष्टता से भी जोड़कर देखा गया है।
इस अभ्यास से जुड़े कुछ अन्य संभावित फायदे भी बताए जाते हैं:
- ओवरथिंकिंग से राहत: नियमित ध्यान से विचारों के प्रति सहजता विकसित करने और मानसिक बेचैनी कम करने में मदद मिल सकती है।
- बेहतर नींद: तनाव और मानसिक उत्तेजना कम होने से नींद की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।
- एकाग्रता में सुधार: ध्यान का अभ्यास फोकस और मानसिक स्पष्टता को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है।
- तनाव से जुड़े हार्मोन पर असर: कुछ शोधों में अभ्यास के दौरान और बाद में कोर्टिसोल के स्तर में गिरावट देखी गई है।
- भावनात्मक संतुलन: नियमित अभ्यास से व्यक्ति को अपनी भावनाओं और विचारों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिल सकती है।
दिल की सेहत के लिए भी हो सकता है फायदेमंद
ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन के संभावित फायदे केवल मानसिक शांति तक सीमित नहीं माने जाते। कुछ अध्ययनों में इसके नियमित अभ्यास को ब्लड प्रेशर में कमी से भी जोड़ा गया है। उच्च रक्तचाप हृदय संबंधी बीमारियों का एक प्रमुख जोखिम कारक है। ऐसे में तनाव कम करने और रक्तचाप को नियंत्रित रखने में मदद करने वाली गतिविधियां दिल की सेहत के लिए उपयोगी हो सकती हैं।
इस ध्यान पद्धति की जड़ें वैदिक परंपराओं से जुड़ी हैं, लेकिन महर्षि महेश योगी ने इसे एक गैर-धार्मिक तकनीक के रूप में दुनिया के सामने प्रस्तुत किया था। हालांकि, ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन को किसी बीमारी का इलाज नहीं समझना चाहिए। तनाव, एंग्जायटी, अवसाद या नींद से जुड़ी गंभीर परेशानी होने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।