नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा की सबसे खूबसूरत अभिनेत्रियों में शुमार मधुबाला की पर्दे पर मुस्कान के पीछे एक ऐसी जिंदगी छिपी थी, जिसमें दर्द और संघर्ष की कोई कमी नहीं थी। जन्म से ही गंभीर बीमारी से जूझ रहीं मधुबाला ने महज 36 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया था। उनकी खूबसूरती के चर्चे आज भी होते हैं, लेकिन जिंदगी के आखिरी दिनों में उनकी हालत कितनी खराब हो गई थी, इसका खुलासा अब उनकी बहन मधू भूषण ने किया है। उन्होंने बताया कि बीमारी ने मधुबाला के शरीर को इस कदर कमजोर कर दिया था कि उनके गाल अंदर धंस गए थे और हड्डियां साफ दिखाई देने लगी थीं। इतना ही नहीं, बहन ने पिता अताउल्लाह खान के उस दर्द का भी जिक्र किया, जिसका बोझ वह जिंदगीभर उठाते रहे।
आखिरी दिनों में बेहद कमजोर हो गई थीं मधुबाला
मधुबाला की बहन मधू भूषण ने हाल ही में विक्की ललवानी को दिए एक इंटरव्यू में अभिनेत्री के आखिरी दिनों से जुड़े कई भावुक किस्से साझा किए। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों ने मधुबाला को उनकी बीमारी की गंभीरता और बची हुई जिंदगी के बारे में पहले ही बता दिया था। डॉक्टरों के मुताबिक, उनके पास अब करीब दो साल का समय बचा था।
बीमारी के लगातार बढ़ते असर ने मधुबाला को शारीरिक रूप से बेहद कमजोर कर दिया था। उनकी हालत ऐसी हो गई थी कि वह हड्डियों के ढांचे जैसी दिखाई देने लगी थीं। गाल अंदर की ओर धंस चुके थे और कॉलर बोन यानी हंसली की हड्डियां साफ नजर आने लगी थीं।
मधुबाला का 36वां जन्मदिन शुरू हुए अभी आठ दिन ही हुए थे कि उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। जिस अभिनेत्री की खूबसूरती ने लाखों लोगों को अपना दीवाना बनाया था, उसके जीवन का अंत इस तरह होगा, इसकी कल्पना करना भी मुश्किल है।
जन्म से ही दिल की गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं अभिनेत्री
मधुबाला की इस तकलीफ की वजह जन्म से जुड़ी एक गंभीर बीमारी थी। उन्हें वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (वीएसडी) था। इस बीमारी में दिल के दोनों निचले कक्षों के बीच की दीवार में छेद होता है। आम बोलचाल में इसे दिल में छेद होना कहा जाता है।
वर्ष 1954 में एक फिल्म की शूटिंग के दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। इस दौरान उनके मुंह से खून निकलने लगा। बताया जाता है कि बीमारी के कारण उनके शरीर में रक्त संचार से जुड़ी गंभीर परेशानियां पैदा हो गई थीं और नाक तथा मुंह से भी खून आने लगता था।
समय के साथ उनकी शारीरिक स्थिति बिगड़ती चली गई। बीमारी ने उनके सामान्य जीवन के साथ-साथ फिल्मी करियर को भी प्रभावित किया। एक ऐसी अभिनेत्री, जिसके पास काम और शोहरत की कोई कमी नहीं थी, उसे अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा बीमारी के बीच बिताना पड़ा।
पिता अताउल्लाह खान को जिंदगीभर सताता रहा बेटी को खोने का दर्द
मधुबाला के पिता अताउल्लाह खान का स्वभाव काफी सख्त और गुस्सैल बताया जाता था। हालांकि, अपनी बेटियों के लिए उनके मन में गहरा लगाव था। मधू भूषण के मुताबिक, पिता अपने प्यार को खुलकर जाहिर नहीं कर पाते थे, लेकिन मधुबाला के निधन के बाद उनका दर्द साफ दिखाई देने लगा था।
मधुबाला के दुनिया छोड़ने के बाद अताउल्लाह खान लंबे समय तक उनकी कब्र पर जाते रहे। वह वहां बैठकर घंटों रोते थे। बेटी को खोने का गम उन्हें अंदर तक तोड़ चुका था। खुद कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझने के बावजूद उन्होंने कब्रिस्तान जाना नहीं छोड़ा।
मधू भूषण ने बताया कि उनके पिता को तीन बार दिल का दौरा पड़ा था। उन्हें एक बार ब्रेन स्ट्रोक भी आया था और वह मधुमेह से भी पीड़ित थे। इसके बावजूद बेटी की कब्र पर जाना उनके जीवन का हिस्सा बना रहा।
बेटी की कब्र और शव पर छिड़क दी थी पूरी इत्र की बोतल
मधुबाला को अंतिम विदाई देने के दौरान उनके पिता ने जो किया, उसका जिक्र करते हुए मधू भूषण भावुक हो गईं। उन्होंने बताया कि अताउल्लाह खान ने बेटी के शव पर इत्र छिड़का था। इतना ही नहीं, उन्होंने पूरी इत्र की बोतल मधुबाला की कब्र पर भी डाल दी थी।
उनकी इच्छा थी कि कई महीनों तक पूरा कब्रिस्तान मधुबाला की खुशबू से महकता रहे। मधू भूषण के मुताबिक, मुस्लिम परिवारों में आमतौर पर ऐसी रस्म नहीं होती, लेकिन उनके पिता ने बेटी के प्रति अपने प्रेम और भावनाओं को इस तरह जाहिर किया था।
मधुबाला की जिंदगी की यह कहानी बताती है कि पर्दे पर अपनी खूबसूरती और अदाकारी से लोगों के दिलों पर राज करने वाली अभिनेत्री निजी जिंदगी में कितनी बड़ी तकलीफ से गुजर रही थीं। उनके निधन के दशकों बाद भी उनकी बहन के ये खुलासे उस दर्दनाक दौर की याद दिलाते हैं, जिसे उनका परिवार कभी भुला नहीं पाया।