नई दिल्ली: मौसम बदलते ही सर्दी, खांसी, गले में खराश और जुकाम की परेशानी बढ़ने लगती है। ऐसे में कई लोग दवा लेने से पहले अदरक और तुलसी की चाय का सहारा लेते हैं। भारतीय घरों में लंबे समय से इस्तेमाल होने वाला यह घरेलू नुस्खा गले को आराम देने और असहजता कम करने के लिए जाना जाता है। लेकिन क्या यह चाय वास्तव में सर्दी-खांसी को ठीक कर सकती है या इससे केवल कुछ समय के लिए राहत मिलती है?
फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट (FMRI), गुरुग्राम में इंटरनल मेडिसिन के प्रिंसिपल डायरेक्टर और यूनिट हेड डॉ. सतीश कौल के मुताबिक, अदरक और तुलसी में कई जैव सक्रिय तत्व मौजूद होते हैं, लेकिन इनसे बनी चाय के सामान्य सर्दी-खांसी का प्रभावी इलाज होने के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। हालांकि, गर्म पेय गले की खराश और जलन को शांत करने में मदद कर सकते हैं।
अदरक-तुलसी की चाय से सर्दी-खांसी में कितना फायदा?
अदरक और तुलसी का इस्तेमाल घरेलू उपचार के तौर पर लंबे समय से किया जाता रहा है। अदरक में जिंजरोल जैसे सक्रिय तत्व पाए जाते हैं, जिन पर सूजन से जुड़े प्रभावों को लेकर अध्ययन किए गए हैं। वहीं, तुलसी में भी कई जैव सक्रिय तत्व मौजूद होते हैं।
हालांकि, इन गुणों के आधार पर यह दावा नहीं किया जा सकता कि अदरक-तुलसी की चाय सर्दी या खांसी को पूरी तरह ठीक कर देती है। उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण इस बात की पुष्टि के लिए पर्याप्त नहीं हैं कि यह चाय सामान्य सर्दी-खांसी का प्रभावी इलाज है।
इसका सबसे व्यावहारिक फायदा यह हो सकता है कि गर्म पेय गले को आराम दे और शरीर में तरल पदार्थों की कमी न होने दे। यानी इसे राहत देने वाले घरेलू विकल्प के रूप में लिया जा सकता है, लेकिन बीमारी का इलाज समझकर इस पर निर्भर रहना सही नहीं है।
गले की खराश और खांसी में कैसे मिल सकती है राहत?
सर्दी-जुकाम के दौरान गले में सूखापन, खराश और बार-बार खांसने की परेशानी हो सकती है। ऐसे में गुनगुना पेय पीने से गले में कुछ समय के लिए आराम महसूस हो सकता है। पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेने से शरीर में पानी की कमी से बचने में भी मदद मिलती है।
चाय में शहद मिलाने से भी खांसी में राहत मिल सकती है। कुछ परिस्थितियों में शहद बच्चों और वयस्कों में खांसी की तीव्रता कम करने में मददगार हो सकता है। हालांकि, एक साल से कम उम्र के बच्चों को शहद बिल्कुल नहीं देना चाहिए, क्योंकि इससे शिशु बोटुलिज्म नामक गंभीर बीमारी का खतरा रहता है।
क्या रोजाना अदरक-तुलसी की चाय पीना सुरक्षित है?
अदरक-तुलसी की चाय सामान्य मात्रा में कई लोगों के लिए ठीक हो सकती है, लेकिन हर व्यक्ति पर इसका असर एक जैसा नहीं होता। अदरक कुछ लोगों में पेट में जलन या अपच जैसी परेशानी पैदा कर सकता है। अगर चाय पीने के बाद कोई असहजता महसूस हो, तो इसका सेवन कम करें या बंद कर दें।
यह भी ध्यान रखें कि किसी घरेलू नुस्खे का प्राकृतिक होना इस बात की गारंटी नहीं है कि वह हर किसी के लिए सुरक्षित होगा। खासकर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को लक्षणों के आधार पर उचित चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
सर्दी-खांसी में कब डॉक्टर के पास जाना जरूरी है?
सामान्य सर्दी-खांसी अक्सर समय के साथ ठीक हो जाती है, लेकिन कुछ लक्षण गंभीर समस्या का संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में घरेलू उपायों के भरोसे इलाज टालना ठीक नहीं है।
- सांस लेने में परेशानी हो या सांस फूलने लगे।
- सीने में दर्द महसूस हो।
- खांसी के साथ खून आए।
- तेज बुखार लगातार बना रहे या हालत बिगड़ती जाए।
- लक्षण लंबे समय तक बने रहें या ठीक होने के बजाय बढ़ने लगें।
छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में सर्दी-खांसी के लक्षणों को विशेष रूप से गंभीरता से लेना चाहिए। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से जांच कराएं।
सिर्फ घरेलू नुस्खे नहीं, इन बातों का भी रखें ध्यान
सर्दी-खांसी से उबरने के लिए पर्याप्त आराम करना और शरीर में पानी की कमी न होने देना जरूरी है। गुनगुने पेय से गले को आराम मिल सकता है, लेकिन लक्षणों की गंभीरता और अवधि पर नजर रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
अदरक-तुलसी की चाय को राहत देने वाले घरेलू विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन इसे डॉक्टर की सलाह से ली जाने वाली दवाओं का विकल्प न मानें। अगर लक्षण गंभीर हों, लंबे समय तक बने रहें या बिगड़ने लगें, तो समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना ही बेहतर है।