नई दिल्ली: सुबह सोकर उठने पर अगर पलकें आपस में चिपकी मिलें, उनके किनारों पर रूसी जैसी पपड़ी जमी हो और आंखों में खुजली या लालिमा बनी रहे, तो इसे सिर्फ धूल-मिट्टी का असर समझकर नजरअंदाज न करें। कई बार ये लक्षण पलकों की सूजन, एलर्जी, आंखों में सूखापन या संक्रमण के कारण हो सकते हैं। समय रहते इनकी वजह पहचानना जरूरी है, ताकि समस्या बढ़ने से पहले सही इलाज मिल सके।
द्वारका स्थित डॉ. अग्रवाल आई हॉस्पिटल की मोतियाबिंद विशेषज्ञ डॉ. अमीता कौल के मुताबिक, आंखों में खुजली, लालिमा और पलकों पर पपड़ी जमने जैसे लक्षणों के पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं। इसलिए बार-बार परेशानी होने या लक्षण बढ़ने पर नेत्र रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।
आंखों में खुजली, लालिमा और पलकों पर पपड़ी क्यों जमती है?
इन लक्षणों की एक प्रमुख वजह ब्लेफेराइटिस (Blepharitis) हो सकती है। यह पलकों के किनारों पर होने वाली सूजन है। पलकों की जड़ों के पास मौजूद तेल ग्रंथियां बंद हो जाएं या वहां बैक्टीरिया बढ़ने लगें, तो पलकों में सूजन और किनारों पर पपड़ी बनने की समस्या हो सकती है।
जिन लोगों को सिर में रूसी या चेहरे पर रोजेशिया की परेशानी होती है, उनमें ब्लेफेराइटिस का जोखिम अधिक हो सकता है। इसके अलावा, आंखों में खुजली और लालिमा के पीछे एलर्जी, ड्राई आई और कंजंक्टिवाइटिस भी जिम्मेदार हो सकते हैं।
एलर्जी से लेकर ड्राई आई तक हो सकती है वजह
एलर्जी: धूल, परागकण, पालतू जानवरों के बाल या किसी सौंदर्य उत्पाद के संपर्क में आने से आंखों में खुजली, पानी आने और लालिमा की समस्या हो सकती है।
ड्राई आई: लंबे समय तक मोबाइल, कंप्यूटर या लैपटॉप की स्क्रीन देखने से पलकें झपकाने की आदत प्रभावित हो सकती है। इससे आंखों में सूखापन, जलन और किरकिरापन महसूस हो सकता है।
कंजंक्टिवाइटिस: आंख की बाहरी पारदर्शी परत और पलकों के अंदरूनी हिस्से को ढकने वाली झिल्ली में सूजन होने पर आंखें लाल हो सकती हैं। इसके कुछ कारण संक्रमण भी हैं। आंखों से पानी या चिपचिपा स्राव आने जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।
इन सभी समस्याओं के लक्षण एक जैसे हो सकते हैं, इसलिए केवल लक्षण देखकर खुद से बीमारी तय करना या दवा शुरू करना सही नहीं है।
घर पर कैसे करें आंखों और पलकों की देखभाल?
अगर परेशानी हल्की है और आंखों में तेज दर्द या नजर से जुड़ी समस्या नहीं है, तो कुछ सावधानियां राहत देने में मदद कर सकती हैं।
- साफ कपड़े को गुनगुने पानी में भिगोकर बंद पलकों पर 5 से 10 मिनट तक रखें। इससे पलकों पर जमी पपड़ी नरम हो सकती है।
- पलकों के किनारों को साफ कपड़े से बहुत हल्के हाथ से साफ करें। आंखों को जोर से न रगड़ें और पपड़ी को जबरन न खींचें।
- खुजली होने पर आंखों को बार-बार मलने से बचें। इससे जलन बढ़ सकती है और संक्रमण फैलने का खतरा भी रहता है।
- परेशानी रहने तक आई मेकअप और कॉन्टैक्ट लेंस का इस्तेमाल रोक दें।
- तौलिया और तकिये का कवर साफ रखें। अगर आंखों से स्राव आ रहा है, तो हाथों की सफाई पर विशेष ध्यान दें।
ध्यान रखें कि गुनगुनी सिकाई हर तरह की आंखों की समस्या का इलाज नहीं है। अगर लक्षण बने रहते हैं या बढ़ते हैं, तो जांच कराना जरूरी है।
इन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर के पास जाएं
आंखों से जुड़ी कुछ समस्याओं में देरी करना नुकसानदायक हो सकता है। इन संकेतों को नजरअंदाज न करें:
- एक सप्ताह तक देखभाल करने के बाद भी परेशानी में सुधार न हो या लक्षण बार-बार लौटें।
- आंख में तेज दर्द हो।
- नजर धुंधली होने लगे या रोशनी देखने में परेशानी हो।
- आंख से गाढ़ा पीला या हरा स्राव आने लगे।
- पलक बहुत ज्यादा सूज जाए या सूजन आंख के आसपास के हिस्से तक फैलने लगे।
- आंख में चोट लगने या बाहरी कण जाने के बाद लालिमा या दर्द हो।
- कॉन्टैक्ट लेंस पहनने के दौरान आंख लाल हो जाए या दर्द होने लगे।
अगर अचानक नजर कम होने लगे, तेज दर्द हो या आंख में गंभीर चोट लगी हो, तो घरेलू उपाय आजमाने के बजाय तत्काल चिकित्सा सहायता लें।
स्क्रीन देखते समय अपनाएं 20-20-20 का नियम
मोबाइल और कंप्यूटर पर लंबे समय तक काम करने वालों के लिए आंखों को बीच-बीच में आराम देना जरूरी है। इसके लिए 20-20-20 नियम अपनाया जा सकता है। हर 20 मिनट में करीब 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर रखी किसी वस्तु को देखें।
स्क्रीन इस्तेमाल करते समय नियमित रूप से पलकें झपकाते रहें। सोने से पहले आई मेकअप अच्छी तरह हटाएं और कॉन्टैक्ट लेंस निकाल दें। धूल या तेज हवा वाली जगहों पर आंखों की सुरक्षा के लिए चश्मा पहनना भी उपयोगी हो सकता है।
बिना डॉक्टर की सलाह के आई ड्रॉप डालना पड़ सकता है भारी
आंखों में लालिमा या खुजली होने पर खुद से दवा लेना ठीक नहीं है। खासकर स्टेरॉयड वाली आई ड्रॉप बिना डॉक्टर की सलाह के इस्तेमाल नहीं करनी चाहिए। ये कुछ समय के लिए लालिमा कम कर सकती हैं, लेकिन गलत इस्तेमाल से आंखों का दबाव बढ़ सकता है, मोतियाबिंद का जोखिम बढ़ सकता है और कुछ संक्रमण गंभीर हो सकते हैं।
पुरानी पर्ची के आधार पर या किसी दूसरे व्यक्ति की सलाह पर आई ड्रॉप न डालें। आंखों में लगातार खुजली, लालिमा या पलकों पर पपड़ी जमने की समस्या हो, तो नेत्र रोग विशेषज्ञ से जांच कराएं। समय पर सही कारण का पता चलने से उचित उपचार चुनने में मदद मिलती है।