नई दिल्ली। उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर दिल्ली में विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। बीजेपी नेता दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के विरोध में अंकिता के माता-पिता इंडिया गेट पर धरने पर बैठे थे। कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी उनसे मिलने पहुंचे थे। इसी बीच दिल्ली पुलिस ने देर रात अंकिता के माता-पिता को हिरासत में ले लिया। कुछ घंटों बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।
इस कार्रवाई को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके ने नाराजगी जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए सवाल उठाया कि अंकिता के माता-पिता के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया गया। वहीं, अंकिता के पिता ने सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए दुष्यंत गौतम को राज्यपाल पद से हटाने की मांग की है।
सुबह 4 बजे इंडिया गेट से हटाए जाने का दावा
अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि अंकिता भंडारी के माता-पिता को सुबह करीब 4 बजे दिल्ली पुलिस ने जबरन इंडिया गेट से हटा दिया। वीडियो साझा करते हुए उन्होंने इसे शर्मनाक बताते हुए कहा कि अंकिता के माता-पिता इस तरह के अमानवीय व्यवहार के हकदार नहीं हैं।
उन्होंने सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पूछा कि अपने ही नागरिकों के साथ इतनी कठोरता क्यों बरती जा रही है।
अंकिता के माता-पिता की हिरासत के बाद इस मामले ने एक बार फिर राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। हालांकि, पुलिस की कार्रवाई को लेकर संबंधित अधिकारियों का विस्तृत पक्ष सामने आने पर घटनाक्रम की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
कुछ घंटे बाद रिहा हुए अंकिता के माता-पिता
रिपोर्ट के मुताबिक, हिरासत में लिए जाने के कुछ घंटों बाद अंकिता के माता-पिता को रिहा कर दिया गया। हिरासत के दौरान उन्हें तिलक नगर पुलिस स्टेशन ले जाया गया था।
कांग्रेस की ओर से बताया गया कि रिहाई के बाद अंकिता के माता-पिता एक रिश्तेदार के घर चले गए। परिवार की मांग है कि दुष्यंत गौतम को सिक्किम के राज्यपाल पद से हटाया जाए।
अंकिता के पिता ने सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तय समय में उनकी मांग पर कार्रवाई नहीं हुई तो देशभर में लोग सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं। उन्होंने इसके लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया।
दुष्यंत गौतम की नियुक्ति का विरोध क्यों?
अंकिता भंडारी के माता-पिता दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने का विरोध कर रहे हैं। उनका प्रदर्शन अंकिता हत्याकांड में न्याय और मामले से जुड़े सवालों को लेकर जारी विरोध के बीच सामने आया है।
इस घटनाक्रम में राहुल गांधी का अंकिता के माता-पिता से मिलना और उसके बाद प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जाना राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। विपक्षी नेताओं और प्रदर्शनकारियों की ओर से कार्रवाई पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
क्या है अंकिता भंडारी हत्याकांड?
अंकिता भंडारी उत्तराखंड के ऋषिकेश के पास एक रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं। 19 वर्षीय अंकिता 18 सितंबर 2022 को लापता हुई थीं। छह दिन बाद, 24 सितंबर को उनका शव चीला नहर से बरामद हुआ था।
इस मामले में रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों सौरभ भास्कर तथा अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया गया था। पुलकित आर्य, बीजेपी के पूर्व नेता विनोद आर्य का बेटा है।
मामले में निचली अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तराखंड हाई कोर्ट ने हाल ही में तीनों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं।
अंकिता के माता-पिता लगातार न्याय की मांग उठा रहे हैं। अब दिल्ली में उनके प्रदर्शन, हिरासत और रिहाई के बाद यह मामला फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है।