बिहार की सियासी पिच पर सन्नाटे के बीच अचानक खलबली मच गई है। 23 अक्टूबर 2026 को होने वाले बिहार विधान परिषद के 4 स्नातक और 4 शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव से पहले विपक्षी महागठबंधन के भीतर तकरार का बारूद फूट पड़ा है। सीट बंटवारे को लेकर RJD और कांग्रेस के बीच ऐसा सियासी घमासान मचा है कि दोनों दल कई सीटों पर आमने-सामने आ गए हैं। इस बगावती तेवर ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है कि क्या यह सिर्फ ‘फ्रेंडली फाइट’ है या महागठबंधन के टूटने की आहट?
कौन-कौन है मैदान में: कांग्रेस और RJD के उम्मीदवार
कांग्रेस ने बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए अपने पांच उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। पार्टी ने पटना स्नातक से डॉ. असदुल्लाह खान, दरभंगा स्नातक से रजनीकांत पाठक और कोसी स्नातक से मनोज कुमार जायसवाल को मैदान में उतारा है।
दिलचस्प बात यह है कि इन तीनों ही सीटों पर राजद (RJD) ने भी अपने प्रत्याशी (क्रमशः दिलीप कुमार, अनिल कुमार झा और नितेश कुमार) उतार दिए हैं, जिससे दोनों दल आमने-सामने आ गए हैं। इसके अलावा, दरभंगा शिक्षक सीट से कांग्रेस ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा और पटना शिक्षक सीट से संजय कुमार यादव को टिकट दिया है। इन दोनों शिक्षक सीटों पर राजद ने अपने उम्मीदवार नहीं उतारे हैं।
महागठबंधन में तकरार और तनाव
बिहार विधान परिषद चुनाव 2026 को लेकर विपक्षी ‘INDIA’ ब्लॉक (महागठबंधन) के भीतर RJD और कांग्रेस के रिश्ते बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। सीटों पर आपसी तालमेल न बैठने के कारण दोनों दल कई सीटों पर टकरा रहे हैं।
कांग्रेस का गंभीर आरोप है कि RJD ने उम्मीदवारों की सूची जारी करने से पहले सहयोगी दलों के साथ उचित चर्चा तक नहीं की। कांग्रेस प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने दो टूक कहा है कि पार्टी के उम्मीदवार केवल औपचारिकता के लिए नहीं, बल्कि पूरी ताकत से चुनाव जीतने के इरादे से मैदान में उतरे हैं। वहीं, RJD नेताओं का दावा है कि उनका रुख हमेशा से गठबंधन के प्रति सहयोगात्मक रहा है।
बिहार तक सीमित नहीं है तकरार, झारखंड में भी उठा बवंडर
गठबंधन के भीतर यह अंदरूनी कलह सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर झारखंड की सियासत में भी साफ दिखाई दे चुका है। बीते जून 2026 के राज्यसभा चुनाव में INDIA गठबंधन के पास पर्याप्त संख्या बल होने के बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा था।
इस हार के बाद कांग्रेस ने RJD और CPI(ML) के कुछ विधायकों पर क्रॉस-वोटिंग का गंभीर आरोप लगाया था, जिसे सहयोगी दलों ने सिरे से खारिज कर दिया था। इसके पलटवार में RJD ने कांग्रेस से उसके अपने विधायकों की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए थे। ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर सीट बंटवारे, आपसी समन्वय और गठबंधन में भरोसे के संकट पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
बिहार विधान परिषद चुनाव 2026 में RJD और कांग्रेस का अलग-अलग सीटों पर उतरना महागठबंधन के भीतर सीट बंटवारे और आपसी समन्वय की चुनौती को सामने लाता है। हालांकि इसे सीधे गठबंधन टूटने का संकेत मानना जल्दबाजी होगी, लेकिन बिहार के साथ झारखंड में सामने आए मतभेद बताते हैं कि सहयोगी दलों के बीच भरोसे और तालमेल का सवाल जरूर गंभीर है। अब नजर इस बात पर होगी कि चुनावी मैदान में यह टकराव कितनी दूर तक जाता है और क्या दोनों दल मतदान से पहले किसी समझौते पर पहुंच पाते हैं।