मुंबई। हिंदी सिनेमा के चर्चित चरित्र अभिनेता और कॉमेडियन मुश्ताक खान अब हमारे बीच नहीं हैं। 24 सितंबर की शाम मुंबई के नानावटी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे मुश्ताक खान की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके निधन की पुष्टि उनके बिजनेस पार्टनर और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े संगठनों ने की है।
शुक्रवार को मुंबई के यारी रोड स्थित कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया। उनके बेटे मोहसिन खान को पिता के जनाजे को कब्रिस्तान तक ले जाते हुए देखा गया। परिवार, दोस्तों और फिल्म जगत से जुड़े लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी।
‘वेलकम’ के बल्लू ने बनाया घर-घर में पहचान
मुश्ताक खान का फिल्मी सफर चार दशक से ज्यादा लंबा रहा। उन्होंने अपने करियर में छोटे-बड़े कई किरदार निभाए, लेकिन 2007 की फिल्म ‘वेलकम’ में बल्लू का किरदार उनके करियर के सबसे यादगार पात्रों में शामिल हो गया।
अक्षय कुमार, नाना पाटेकर और अनिल कपूर जैसे कलाकारों से सजी इस फिल्म में मुश्ताक खान ने उदय शेट्टी के गैंग के सदस्य बल्लू का किरदार निभाया था। उनका कॉमिक अंदाज और संवाद बोलने का तरीका दर्शकों को खासा पसंद आया।
फिल्म में उनका ‘नकली टांग’ वाला प्रसंग आज भी सोशल मीडिया पर मीम्स और क्लिप्स के रूप में दिखाई देता है। यही किरदार मुश्ताक खान की लोकप्रिय पहचान का बड़ा हिस्सा बन गया।
‘गदर’ से ‘आशिकी’ तक निभाए कई यादगार रोल
मुश्ताक खान की खासियत यह रही कि उन्होंने किसी एक तरह के किरदार तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने ‘आशिकी’, ‘हम हैं राही प्यार के’, ‘दिल है कि मानता नहीं’, ‘हेरा फेरी’, ‘गदर: एक प्रेम कथा’, ‘वेलकम’, ‘वांटेड’, ‘ओह माय गॉड!’ जैसी फिल्मों में काम किया।
‘गदर’ फ्रेंचाइजी में गुल खान का किरदार भी उनके यादगार कामों में गिना जाता है। इसके अलावा ‘गदर 2’, ‘स्त्री 2’, ‘बधाई दो’ और कई अन्य फिल्मों में भी वह नजर आए।
1980 में शुरू हुआ था फिल्मी सफर
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले से आने वाले मुश्ताक खान ने 1980 के दशक में फिल्म और थिएटर की दुनिया में कदम रखा। उनकी शुरुआती फिल्मों में ‘अल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है’ शामिल थी।
बाद में महेश भट्ट की फिल्मों में काम करने का मौका मिला। ‘आशिकी’ और ‘दिल है कि मानता नहीं’ जैसी फिल्मों ने उन्हें हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में पहचान दिलाने में मदद की।
टीवी पर भी छोड़ी अपनी पहचान
सिर्फ फिल्मों तक सीमित न रहते हुए मुश्ताक खान ने टेलीविजन पर भी काम किया। ‘कुछ रंग प्यार के ऐसे भी’ समेत कई टीवी प्रोजेक्ट्स में उन्होंने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
उनकी एक्टिंग की खासियत यह थी कि स्क्रीन टाइम भले सीमित हो, लेकिन उनका किरदार अक्सर दर्शकों की याद में रह जाता था।
कैंसर से जूझ रहे थे मुश्ताक खान
रिपोर्ट्स के मुताबिक मुश्ताक खान को करीब पांच साल पहले कैंसर का पता चला था और इलाज के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ था। हाल में बीमारी दोबारा सामने आने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ी और उन्हें मुंबई के नानावटी अस्पताल में भर्ती कराया गया। वह करीब 15 दिनों तक अस्पताल में उपचाराधीन रहे और 24 सितंबर की शाम उनका निधन हो गया। उनके बिजनेस पार्टनर ने भी बीमारी के दोबारा उभरने की पुष्टि की थी।
मुश्ताक खान के निधन के साथ हिंदी सिनेमा ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया, जिसने मुख्य भूमिका से ज्यादा यादगार चरित्रों के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई। ‘वेलकम’ का बल्लू हो या ‘गदर’ का किरदार, उनकी मौजूदगी ने कई फिल्मों के हास्य और कहानी दोनों को अलग रंग दिया।