‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक सनसनीखेज मीडिया रिपोर्ट सामने आने के बाद देश की सियासत में भूचाल आ गया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग के भीतर ही भारी आंतरिक कलह चल रही है, जहाँ अन्य चुनाव आयुक्तों द्वारा कई बार गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई गईं। इस खुलासे के बाद शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है।
मुख्य चुनाव आयुक्त पर गंभीर आरोप
शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि उन्हें तत्काल अपने पद से हटाया जाना चाहिए और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
राउत ने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार को अपने पद से हटना पड़ेगा और आने वाले समय में उन्हें जेल की हवा भी खानी होगी। उन्होंने इस पूरे मामले में न्यायपालिका से स्वतः संज्ञान लेने की अपील की है।
गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना
संजय राउत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी सीधा निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग पूरी तरह से सरकार के इशारे पर काम कर रहा है।
राउत का दावा है कि एसआईआर (SIR) प्रक्रिया को लेकर आयोग के भीतर दो अन्य चुनाव आयुक्तों ने करीब 10 महीनों में 14 बार आपत्तियां दर्ज कराई थीं, जिन्हें गृह मंत्रालय के इशारे पर दबा दिया गया।
2029 को लेकर राजनीतिक भविष्यवाणी
मीडिया से बातचीत के दौरान संजय राउत ने राजनीतिक भविष्य को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने दावा किया कि साल 2029 में देश में एक नई सरकार का गठन होगा।
राउत ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जिन लोगों ने देश और चुनाव प्रक्रिया के साथ कथित तौर पर बेईमानी या गद्दारी की है, उन पर भविष्य में मुकदमे चलाए जाएंगे और उन्हें जेल भेजा जाएगा।
SIR को लेकर सामने आई रिपोर्ट और संजय राउत के बयानों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसकी आंतरिक प्रक्रिया पर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। राउत ने CEC ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है, जबकि उनके 2029 को लेकर किए गए दावे ने इस विवाद को राजनीतिक दिशा भी दे दी है। हालांकि, राउत के आरोप और दावे राजनीतिक बयान हैं। ऐसे में पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आने के लिए संबंधित दस्तावेजों, आधिकारिक प्रतिक्रियाओं और आगे होने वाली कानूनी प्रक्रिया पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।