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Indian Press House > Blog > Latest News > तीस्ता नदी में बहता जा रहा था हाथी का बच्चा, 3 KM तक नाव से पीछा कर मछुआरों ने बचाई जान; मां से मिलते ही भावुक हुआ माहौल
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तीस्ता नदी में बहता जा रहा था हाथी का बच्चा, 3 KM तक नाव से पीछा कर मछुआरों ने बचाई जान; मां से मिलते ही भावुक हुआ माहौल

vineet verma
Last updated: September 23, 2026 4:50 pm
vineet verma
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जलपाईगुड़ी: पश्चिम बंगाल की तीस्ता नदी में एक हाथी का बच्चा तेज बहाव में बहता जा रहा था। नदी में मछली पकड़ने निकले दो मछुआरों की नजर जब उस पर पड़ी तो उन्होंने बिना देर किए अपनी नाव उसकी ओर मोड़ दी। बहाव इतना तेज था कि बच्चे तक पहुंचना आसान नहीं था, लेकिन दोनों मछुआरों ने करीब 3 किलोमीटर तक नाव से उसका पीछा किया और आखिरकार उसे पानी से बाहर निकाल लिया।

Contents
तेज बहाव में शुरू हुआ 3 किलोमीटर लंबा पीछानाव में पहुंचते ही मछुआरों ने संभालाअब चुनौती थी मां तक पहुंचानाबैराज पार कर सूखे हिस्से तक पहुंचायामां ने बच्चे को देखते ही अपना लियामछुआरों की बहादुरी की वन विभाग ने की तारीफबच्चे को बचाने के बाद इंसानी संपर्क कम रखना जरूरी

पानी से बाहर निकालने के बाद भी रेस्क्यू खत्म नहीं हुआ था। असली चुनौती बच्चे को सुरक्षित उसकी मां और झुंड तक पहुंचाने की थी। वन विभाग और स्थानीय लोगों की मदद से करीब दो घंटे तक कोशिशें जारी रहीं। आखिरकार हाथी का बच्चा अपनी मां तक पहुंच गया। मां को बच्चे के पास आते और बाद में उसे दूध पिलाते देखा गया। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए भावुक कर देने वाला था।

तेज बहाव में शुरू हुआ 3 किलोमीटर लंबा पीछा

तीस्ता नदी में उस समय बहाव काफी तेज था। हाथी का बच्चा पानी में खुद को संभालने की कोशिश कर रहा था, लेकिन नदी की धार उसे लगातार नीचे की ओर बहाए ले जा रही थी। तभी मछुआरों ने उसे देखा और उसकी जान बचाने के लिए नाव उसकी तरफ मोड़ दी।

बच्चे के करीब पहुंचना आसान नहीं था। वह तेज धारा के साथ लगातार आगे बढ़ रहा था और मछुआरों को भी नाव से उसके पीछे जाना पड़ रहा था। दोनों ने करीब 3 किलोमीटर तक उसका पीछा किया। आखिरकार जब उन्हें मौका मिला तो उन्होंने बच्चे को पकड़कर नाव में खींच लिया।

नाव में पहुंचते ही मछुआरों ने संभाला

पानी से बाहर आने के बाद हाथी का बच्चा काफी कमजोर नजर आ रहा था। मछुआरों ने उसे नाव में सुरक्षित रखा और उसके पास बैठकर उसे संभालते रहे। वायरल वीडियो में दोनों मछुआरे बच्चे के साथ दिखाई दे रहे हैं।

इसके बाद उन्होंने बच्चे को किनारे पहुंचाया और स्थानीय वन विभाग को इसकी जानकारी दी। यह घटना पश्चिम बंगाल के मालबाजार सबडिविजन के पास तीस्ता नदी के स्पर नंबर 12 के आसपास की बताई जा रही है।

A heartwarming rescue unfolded in West Bengal, India, where five local fishermen and forest department officials teamed up to save a 3-to-4-day-old newborn elephant calf from the swollen currents of the Teesta River#India #WestBengal #Teesta #elephantrescue pic.twitter.com/aKhnLsNUH0

— WION (@WIONews) September 22, 2026

अब चुनौती थी मां तक पहुंचाना

वन विभाग को जानकारी मिलने के बाद अधिकारी मौके पर पहुंचे। बच्चे की जान बचाने के बाद सबसे जरूरी काम उसे उसकी मां और हाथियों के झुंड तक सुरक्षित पहुंचाना था।

अधिकारियों को आशंका थी कि नदी में बहने के कारण बच्चा अपने झुंड से काफी दूर आ गया होगा। ऐसे में उसे किसी अनजान जगह पर छोड़ना उसके लिए सुरक्षित नहीं था। वन विभाग ने आसपास के इलाके की जानकारी जुटाई और उस स्थान का पता लगाने की कोशिश की, जहां हाथियों का झुंड मौजूद हो सकता था।

बैराज पार कर सूखे हिस्से तक पहुंचाया

इसके बाद हाथी के बच्चे को बैराज के दूसरी तरफ नदी के सूखे हिस्से तक ले जाया गया। माना जा रहा था कि हाथियों का झुंड इसी इलाके में शरण लिए हुए था।

इस रेस्क्यू में वन विभाग के साथ स्थानीय लोग और वही मछुआरे भी शामिल रहे, जिन्होंने सबसे पहले बच्चे को नदी में देखा था। करीब दो घंटे तक लगातार कोशिशें चलती रहीं। सभी की कोशिश थी कि बच्चे को जल्द से जल्द उसकी मां तक पहुंचाया जाए।

मां ने बच्चे को देखते ही अपना लिया

आखिरकार रेस्क्यू टीम की मेहनत रंग लाई और हाथी का बच्चा अपनी मां तक पहुंच गया। रिपोर्ट के मुताबिक, मां हाथी बच्चे के पास आई और बाद में उसे दूध पिलाते हुए भी देखा गया।

जिस नन्हे हाथी को कुछ समय पहले नदी का तेज बहाव अपने साथ बहाए ले जा रहा था, वह अब अपनी मां के साथ सुरक्षित था। मां और बच्चे के मिलन का यह दृश्य सोशल मीडिया पर भी लोगों को भावुक कर रहा है।

मछुआरों की बहादुरी की वन विभाग ने की तारीफ

बैकुंठपुर के DFO मुदित ने दोनों मछुआरों की समय पर की गई मदद की सराहना की। अगर मछुआरे बच्चे को देखते ही उसकी ओर नाव नहीं मोड़ते, तो तेज बहाव में उसके साथ क्या होता, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल था।

मछुआरों ने न सिर्फ बच्चे को पानी से बाहर निकाला, बल्कि वन विभाग को समय पर जानकारी देकर आगे के रेस्क्यू में भी सहयोग किया। स्थानीय लोगों ने भी बच्चे को उसकी मां तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बच्चे को बचाने के बाद इंसानी संपर्क कम रखना जरूरी

वन अधिकारियों के मुताबिक, हाथी के बच्चों के रेस्क्यू के दौरान एक और सावधानी जरूरी होती है। बच्चे के साथ इंसानी संपर्क को कम से कम रखना महत्वपूर्ण है। लंबे समय तक इंसानों के संपर्क में रहने पर कभी-कभी हाथियों का झुंड बच्चे को स्वीकार करने से इनकार कर सकता है।

पिछले साल अक्टूबर में नॉर्थ बंगाल में बाढ़ के दौरान मेची नदी से भी एक हाथी के बच्चे को बचाया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, बाद में उसके झुंड ने उसे स्वीकार नहीं किया था। यही वजह है कि इस रेस्क्यू में बच्चे को जल्द से जल्द उसकी मां तक पहुंचाना प्राथमिकता रही।

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