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उत्तराखंड में मदरसों पर धामी सरकार की सख्ती, 20 संस्थानों पर कार्रवाई; बोर्ड खत्म कर बनाया नया प्राधिकरण

news desk
Last updated: September 6, 2026 3:15 pm
news desk
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उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा व्यवस्था को लेकर पुष्कर सिंह धामी सरकार की सख्ती जारी है। राज्य में पुराने मदरसा बोर्ड को खत्म किए जाने के बाद अब गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों और शिक्षण संस्थानों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई तेज हो गई है। देहरादून और हल्द्वानी में शनिवार को पांच और मदरसों को बंद या सील किए जाने के बाद कार्रवाई की कुल संख्या 20 तक पहुंच गई है।

Contents
मदरसों पर कार्रवाई क्यों?देहरादून में तीन संस्थानों पर कार्रवाईहल्द्वानी में भी सीलिंग की कार्रवाईमदरसा बोर्ड खत्म, अब नया शिक्षा प्राधिकरणपहले भी हुई थी बड़ी कार्रवाईसुप्रीम कोर्ट के फैसले से कितना जुड़ा है मामला?अब असली सवाल क्या है?

सरकार के मुताबिक, कार्रवाई की जद में आए 20 संस्थानों में से 17 को सील किया गया है, जबकि तीन संस्थानों के प्रबंधन ने लिखित आश्वासन देकर अपनी गतिविधियां बंद करने की बात कही है।

मदरसों पर कार्रवाई क्यों?

राज्य सरकार का कहना है कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान को निर्धारित मानकों और जरूरी मान्यता के बिना संचालित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी स्पष्ट किया है कि शिक्षा की गुणवत्ता और निर्धारित नियमों से समझौता नहीं किया जाएगा।

अल्पसंख्यक मामलों के सचिव डॉ. पराग मधुकर ढकाते के मुताबिक, मान्यता और शैक्षणिक नियमों का पालन नहीं करने वाले मदरसों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।

देहरादून में तीन संस्थानों पर कार्रवाई

देहरादून में प्रशासन ने आजाद कॉलोनी स्थित मदरसा जामिया-तुस-सलाम अल-इस्लामिया को जांच के बाद सील कर दिया।

इसी इलाके में स्थित मदरसा दार-ए-अरकम और मदरसा दारुल उलूम राहूमिया के प्रबंधन ने जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की बात स्वीकार करते हुए संस्थान का संचालन बंद करने का लिखित आश्वासन दिया।

हल्द्वानी में भी सीलिंग की कार्रवाई

हल्द्वानी में भी प्रशासन ने दो गैर-मान्यता प्राप्त संस्थानों पर कार्रवाई की। सिटी मजिस्ट्रेट ए.बी. वाजपेयी के अनुसार, शनि बाजार रोड स्थित मदरसा जामिया नूरिया बरकाते अमीना और बनभूलपुरा के इंदिरा नगर में संचालित एक अन्य मदरसे को सील किया गया।

प्रशासन का कहना है कि दोनों संस्थानों के पास आवश्यक मान्यता संबंधी दस्तावेज नहीं थे।

मदरसा बोर्ड खत्म, अब नया शिक्षा प्राधिकरण

उत्तराखंड सरकार ने मदरसा शिक्षा व्यवस्था में बड़ा संस्थागत बदलाव करते हुए पुराने उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड को समाप्त कर दिया है। इसकी जगह उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण (USAME) बनाया गया है।

नए ढांचे के तहत मुस्लिम समुदाय के साथ-साथ ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध समुदायों द्वारा संचालित अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की निगरानी की व्यवस्था की गई है।

सरकार का तर्क है कि इसका उद्देश्य अल्पसंख्यक संस्थानों में शिक्षा के मानकों, पारदर्शिता और आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देना है।

पहले भी हुई थी बड़ी कार्रवाई

सरकारी कार्रवाई के मौजूदा दौर से पहले भी राज्य में गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों को लेकर जांच अभियान चलाया गया था। सरकार की ओर से दावा किया गया था कि जांच के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे संस्थान सामने आए जो निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित नहीं हो रहे थे।

बताया गया कि पहले के अभियान में 200 से अधिक गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों पर भी कार्रवाई की गई थी। ऐसे में अब नए शिक्षा प्राधिकरण के गठन के बाद प्रशासन की कार्रवाई को राज्य की बदली हुई अल्पसंख्यक शिक्षा नीति के अगले चरण के तौर पर देखा जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से कितना जुड़ा है मामला?

मदरसा शिक्षा पर कार्रवाई का मुद्दा सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों से भी जुड़ा है। 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मदरसा कानून पर फैसला देते हुए कहा था कि राज्य सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए नियमन कर सकती है।

अदालत ने अल्पसंख्यक संस्थानों के अधिकारों और शिक्षा के अधिकार के बीच संतुलन की जरूरत पर जोर दिया था। संविधान का अनुच्छेद 30 अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थान स्थापित और संचालित करने का अधिकार देता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि ऐसे संस्थान सभी नियामकीय मानकों से बाहर हो जाते हैं।

अब असली सवाल क्या है?

उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड खत्म करने और नया अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण बनाने के बाद सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को एक नए नियामकीय ढांचे में लाने की कोशिश की है।

सरकार के सामने चुनौती दोहरी है—एक तरफ शिक्षा के गुणवत्ता मानकों और मान्यता के नियमों को सख्ती से लागू करना, तो दूसरी तरफ अल्पसंख्यक समुदाय के संवैधानिक शैक्षणिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना।

यही वजह है कि उत्तराखंड में मदरसों पर चल रहा यह अभियान आने वाले दिनों में शिक्षा, नियमन और अल्पसंख्यक अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर बड़ी बहस का मुद्दा बन सकता है।

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TAGGED: Pushkar Singh Dhami, Uttarakhand Madrasa Action, Uttarakhand Madrasa Board, Uttarakhand Madrasa News
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