बीजिंग: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सेहत को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। तिब्बत के पूर्व निर्वासित प्रधानमंत्री लोबसांग सांगेय ने दावा किया है कि जिनपिंग को कम से कम दो बार हार्ट अटैक आ चुका है। उन्होंने यह दावा दिल्ली में एक पॉडकास्ट के दौरान किया। हालांकि, चीन की ओर से इस दावे की कोई पुष्टि नहीं की गई है और न ही ऐसी किसी बीमारी को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने आई है।
सांगेय के मुताबिक, जिनपिंग पर काम का भारी दबाव है और इसका असर उनकी सेहत और फैसले लेने की क्षमता पर पड़ रहा है। उन्होंने इसी के साथ चीन में उत्तराधिकारी को लेकर जिनपिंग की कथित दुविधा पर भी बड़ा दावा किया है।
जिनपिंग के वीडियो के बाद फिर उठे सेहत पर सवाल
हाल ही में शी जिनपिंग किर्गिस्तान में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन में पहुंचे थे। वहां पहुंचने के बाद सामने आए एक वीडियो में वह अपनी पत्नी के साथ विमान से उतरते दिखाई दिए। वीडियो में जिनपिंग अपनी पत्नी का हाथ पकड़े नजर आए।
इसी वीडियो के संदर्भ में लोबसांग सांगेय ने जिनपिंग की सेहत पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि उन्हें चीन के एक बेहद वरिष्ठ अधिकारी से बातचीत के दौरान उनकी बीमारी के बारे में जानकारी मिली थी।
‘कम से कम दो बार हार्ट अटैक आया’
लोबसांग सांगेय ने दावा किया कि एक वरिष्ठ चीनी अधिकारी ने उन्हें बताया कि जिनपिंग को दो या कम से कम दो बार हार्ट अटैक आ चुका है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या लोगों को वह समय याद है जब जिनपिंग कथित तौर पर तीन से पांच सप्ताह तक सार्वजनिक तौर पर नजर नहीं आए थे और फिर अचानक सामने आए थे।
सांगेय का कहना है कि जिनपिंग पर काम का दबाव बेहद ज्यादा है। उन्होंने उनके चेहरे पर सूजन और चलने के तरीके का भी जिक्र किया और दावा किया कि लगातार दबाव का उनकी सेहत पर असर पड़ रहा है।
हालांकि, ये सभी दावे लोबसांग सांगेय के हैं। चीन सरकार की ओर से जिनपिंग को हार्ट अटैक आने की कोई पुष्टि नहीं की गई है और इस दावे के समर्थन में कोई स्वतंत्र सबूत भी सामने नहीं आया है।
कई चीनी जनरलों के गायब होने का भी दावा
सांगेय ने जिनपिंग की कथित मानसिक और शारीरिक थकान को चीन की सैन्य व्यवस्था में हुए बदलावों से भी जोड़ने की कोशिश की। उनका दावा है कि निर्णय लेने की मुश्किलों के बीच कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को पद से हटाया गया और कुछ जनरल तथा रक्षा मंत्री तक सार्वजनिक तौर पर नजर नहीं आए।
हालांकि, इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इन्हें चीन की राजनीतिक और सैन्य व्यवस्था को लेकर लगाए गए दावों के तौर पर ही देखा जा रहा है।
उत्तराधिकारी चुनना भी खतरा, नहीं चुनना भी चुनौती
लोबसांग सांगेय ने जिनपिंग के उत्तराधिकारी को लेकर भी एक दिलचस्प दावा किया है। उनके मुताबिक, जिनपिंग के लिए अपना उत्तराधिकारी चुनना आसान नहीं है, क्योंकि नया नेता भविष्य में खुद उनके लिए राजनीतिक चुनौती बन सकता है।
उनका कहना है कि अगर जिनपिंग किसी व्यक्ति को उत्तराधिकारी के तौर पर आगे बढ़ाते हैं तो भविष्य में वही व्यक्ति सत्ता के लिए उनका प्रतिद्वंद्वी बन सकता है। दूसरी तरफ, अगर वह उत्तराधिकारी नहीं चुनते हैं तो उनके बाद सत्ता को लेकर चीन में अस्थिरता और संघर्ष की स्थिति पैदा हो सकती है।
‘क्राउन प्रिंस ही बन सकता है सबसे बड़ा खतरा’
सांगेय ने चीन के इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि किसी शासक के लिए अपने उत्तराधिकारी को सामने लाना हमेशा जोखिम भरा रहा है। उनके मुताबिक, सत्ता का उत्तराधिकारी भविष्य में खुद शासक के लिए खतरा बन सकता है।
उन्होंने दावा किया कि यही दुविधा जिनपिंग के सामने भी हो सकती है। एक तरफ उत्तराधिकारी घोषित करने पर सत्ता के भीतर संभावित चुनौती का खतरा है, जबकि दूसरी तरफ उत्तराधिकारी के बिना सत्ता परिवर्तन होने पर राजनीतिक संघर्ष की आशंका बढ़ सकती है।
क्या चीन में सचमुच सत्ता संकट की आहट है?
फिलहाल चीन में जिनपिंग की सेहत या उत्तराधिकारी को लेकर किसी आधिकारिक सत्ता संकट की घोषणा नहीं हुई है। हार्ट अटैक से जुड़े दावों की भी पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन बयानों को फिलहाल अपुष्ट दावों के रूप में ही देखना जरूरी है।
जिनपिंग की उम्र करीब 73 साल हो चुकी है। ऐसे में भविष्य में उत्तराधिकार का सवाल चीन की राजनीति में अहम जरूर हो सकता है, लेकिन वह कब और किस तरह सामने आएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।