सहारनपुर: कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को लेकर चल रहे विवाद के बीच शनिवार सुबह प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी। जिला अदालत के आदेश के बाद मस्जिद को गिराया गया। कार्रवाई के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में भारी पुलिस बल और पीएसी के जवान तैनात रहे। एहतियात के तौर पर परिसर के सभी गेट बंद कर दिए गए। इसी बीच विरोध के लिए सहारनपुर जाने की कोशिश कर रहीं कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन को पुलिस ने हाउस अरेस्ट कर लिया।
कलेक्ट्रेट परिसर में भारी सुरक्षा, सभी गेट किए गए बंद
शनिवार सुबह मस्जिद को गिराने की कार्रवाई के दौरान एसडीएम, सिटी मजिस्ट्रेट समेत कई प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। हालात को देखते हुए कलेक्ट्रेट परिसर में बड़ी संख्या में पुलिस और पीएसी के जवानों की तैनाती की गई। परिसर के सभी गेट बंद कर बाहरी लोगों की आवाजाही रोक दी गई।
इकरा हसन ने कहा कि वह सहारनपुर जाकर लोगों की आवाज उठाना चाहती थीं, लेकिन प्रशासन ने उन्हें वहां जाने से रोक दिया और हाउस अरेस्ट कर लिया।
इमरान मसूद ने लगाया संविधान की धज्जियां उड़ाने का आरोप
सहारनपुर के कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इस कार्रवाई पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि उनके लोग पूरी रात जागते रहे और प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश करते रहे। उनका आरोप है कि सारी जानकारी देने के बावजूद मस्जिद को गिरा दिया गया और संविधान की धज्जियां उड़ाई गईं।
इमरान मसूद ने यह भी आरोप लगाया कि हाईकोर्ट में मामले से जुड़े कई पहलुओं को नजरअंदाज किया गया। उनके मुताबिक, वक्फ बोर्ड को मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया और न ही उसे कार्यवाही में शामिल किया गया। उन्होंने कहा कि इलाके को घेरकर और लोगों को घरों में कैद करके मस्जिद गिराई गई। मसूद ने कहा कि वे इस मामले में कानूनी दायरे में रहकर लड़ाई जारी रखेंगे।
सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को जिला अदालत ने रखा बरकरार
मस्जिद को लेकर कानूनी विवाद काफी समय से चल रहा था। सिटी मजिस्ट्रेट ने 17 जुलाई को अपने आदेश में मस्जिद को अवैध बताते हुए उसे गिराने के निर्देश दिए थे। मुस्लिम पक्ष ने इस आदेश को जिला अदालत में चुनौती दी थी।
जिला अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद प्रशासन ने मस्जिद को गिराने की कार्रवाई शुरू की।
बजरंग दल नेता की शिकायत से शुरू हुआ था मामला
इस पूरे विवाद की शुरुआत बजरंग दल के पूर्व प्रांतीय समन्वयक विकास त्यागी की शिकायत से हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि डीएम कार्यालय परिसर के भीतर मस्जिद का निर्माण अवैध तरीके से किया गया है।
विकास त्यागी ने यह भी आरोप लगाया था कि मस्जिद का इस्तेमाल धार्मिक गतिविधियों के अलावा व्यावसायिक कामों के लिए किया जा रहा था। उनका दावा था कि परिसर में बने कुछ कमरे किराए पर दिए गए थे और उनका किराया मस्जिद समिति की ओर से वसूला जा रहा था।