मिर्जापुर: ‘मिर्जापुर द मूवी’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है और फिल्म में पुराने किरदारों के साथ कहानी को एक नए घटनाक्रम में आगे बढ़ाया गया है। कालीन भैया, मुन्ना, गुड्डू, बबलू, गोलू, बीना और स्वीटी जैसे किरदार फिर से नजर आते हैं, लेकिन फिल्म की कहानी वेब सीरीज की हूबहू कहानी नहीं है। खासकर क्लाइमैक्स में कई ऐसे बदलाव देखने को मिलते हैं, जो दर्शकों को चौंका देते हैं। सबसे बड़ा सवाल कालीन भैया की मौत को लेकर है, लेकिन फिल्म के आखिर तक कहानी एक अलग ही मोड़ ले लेती है।
मुन्ना और गुड्डू फिर आमने-सामने, लेकिन अंत में बदल गई कहानी
वेब सीरीज में मुन्ना भैया और गुड्डू पंडित की दुश्मनी कहानी का अहम हिस्सा रही है। दूसरे सीजन में गुड्डू के हाथों मुन्ना की मौत हो जाती है। ऐसे में फिल्म में दोनों को दोबारा साथ देखकर दर्शकों के मन में कई सवाल उठते हैं।
फिल्म में दोनों के बीच पुरानी दुश्मनी जरूर दिखाई देती है, लेकिन क्लाइमैक्स तक पहुंचते-पहुंचते हालात बदल जाते हैं। कालीन भैया पर बड़ा खतरा मंडराता है तो मुन्ना और गुड्डू अपनी दुश्मनी पीछे छोड़कर उनके साथ खड़े हो जाते हैं। दोनों का मकसद कालीन भैया को बचाना बन जाता है। इस तरह फिल्म इस रिश्ते को वेब सीरीज से बिल्कुल अलग मोड़ देती है और मुन्ना-गुड्डू इस बड़े टकराव से जिंदा बाहर निकलते हैं।
बब्बन यादव की नजर मिर्जापुर की गद्दी पर
फिल्म में रवि किशन बब्बन यादव की भूमिका में हैं। उसकी नजर मिर्जापुर की सत्ता और गद्दी पर है और वह कालीन भैया को रास्ते से हटाकर खुद इस ताकत पर कब्जा करना चाहता है।
कहानी जैसे-जैसे क्लाइमैक्स की ओर बढ़ती है, बब्बन और कालीन भैया के गुटों के बीच सीधा टकराव हो जाता है। यह भिड़ंत जैसलमेर में होती है, जहां दोनों पक्ष अपनी पूरी ताकत के साथ आमने-सामने आते हैं।
इसी दौरान मुन्ना, गुड्डू और बबलू मिलकर कालीन भैया को बचाने की कोशिश करते हैं और उन्हें इस जानलेवा संघर्ष से बाहर निकालने में कामयाब रहते हैं।
क्या क्लाइमैक्स में मर जाते हैं कालीन भैया?
कालीन भैया पर बड़ा हमला होता है और उन्हें किडनैप भी कर लिया जाता है। ऐसे में कहानी इस ओर इशारा करती है कि शायद इस बार उनका अंत हो जाएगा। लेकिन आखिरकार कालीन भैया बच निकलते हैं।
मुन्ना, गुड्डू और बबलू की कोशिशों से वह इस खतरनाक मुठभेड़ से बाहर आ जाते हैं। यानी कालीन भैया की कहानी को खत्म करने के बजाय फिल्म उनके किरदार के लिए आगे का रास्ता खुला छोड़ती है।
बिरजू लोहार ने खोला कालीन भैया के असली दुश्मन का राज
फिल्म का सबसे बड़ा खेल यहीं खत्म नहीं होता। कहानी में मोहित मलिक का किरदार बिरजू लोहार एक अहम मोड़ लेकर आता है। अंत में यह राज खुलता है कि कालीन भैया का असल दुश्मन कौन है और वह उनसे बदला लेने के पीछे क्यों पड़ा है।
हालांकि इस खुलासे के बाद भी कालीन भैया उससे बच निकलते हैं। यानी जिसे देखकर लगता है कि अब कालीन भैया की कहानी खत्म हो जाएगी, आखिर में बाजी फिर पलट जाती है।
लास्ट सीन में बीना भाभी ने पलट दिया पूरा खेल
फिल्म के आखिरी हिस्से में बीना भाभी का किरदार भी ऐसा मोड़ लाता है, जो पूरी कहानी के समीकरण बदल देता है। उनके कदम से आगे की कहानी को लेकर कई सवाल खड़े हो जाते हैं।
यही वजह है कि फिल्म का अंत सिर्फ कालीन भैया के बचने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कई किरदारों के रिश्तों और भविष्य की कहानी के लिए नई जमीन तैयार करता है।
पोस्ट-क्रेडिट सीन में भी छिपा है बड़ा राज
‘मिर्जापुर द मूवी’ की कहानी अंतिम सीन के साथ पूरी तरह बंद नहीं होती। पोस्ट-क्रेडिट सीन में भी एक ऐसा ट्विस्ट रखा गया है, जो आगे की कहानी को लेकर दर्शकों की उत्सुकता बढ़ाता है।
कुल मिलाकर फिल्म का क्लाइमैक्स वेब सीरीज से काफी अलग है। मुन्ना और गुड्डू का साथ आना, बबलू की मौजूदगी, बब्बन यादव से टकराव, कालीन भैया का बच जाना और फिर असली दुश्मन का खुलासा—ये सभी घटनाएं ‘मिर्जापुर’ की दुनिया को एक नए मोड़ पर छोड़ती हैं। मिर्जापुर की गद्दी की लड़ाई फिलहाल थमी है, लेकिन कहानी खत्म नहीं हुई है।