नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने हल्द्वानी में अपनी सभा के बाद कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा के सदन के नेता जेपी नड्डा को पत्र लिखा है। खरगे ने घटना पर गहरी नाराजगी जताते हुए सवाल उठाया कि राज्यसभा में कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बावजूद अब तक FIR दर्ज क्यों नहीं हुई।
खरगे ने अपने पत्र में कहा कि यह मामला सिर्फ उनके या कांग्रेस अध्यक्ष पद से जुड़ा नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा हुआ है। उन्होंने नड्डा से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को निर्देश देने और हल्द्वानी की कथित घटना में शामिल लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराने की मांग की।
13 अगस्त को राज्यसभा में उठाया था मामला
खरगे के मुताबिक, उन्होंने 13 अगस्त 2026 को राज्यसभा में हल्द्वानी की घटना का मुद्दा उठाया था। उन्होंने सदन को बताया था कि 8 अगस्त को हल्द्वानी में उनकी जनसभा के बाद कथित तौर पर मंच का ‘शुद्धिकरण’ किया गया।
उस समय जेपी नड्डा ने सदन में इस घटना को दुखद बताते हुए जांच का आश्वासन दिया था। नड्डा ने कहा था कि जांच के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा था कि बीजेपी इस तरह की गतिविधि का समर्थन नहीं करती।
खरगे ने अब अपने पत्र में इसी आश्वासन का हवाला देते हुए कहा है कि घटना को 24 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक संबंधित संगठन या व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज नहीं की गई है।
‘यह सिर्फ मेरे पद का सवाल नहीं’
कांग्रेस अध्यक्ष ने पत्र में कहा कि कथित ‘शुद्धिकरण’ का मुद्दा उनके व्यक्तिगत सम्मान या कांग्रेस अध्यक्ष पद से कहीं बड़ा है। उनके मुताबिक, यह मामला सामाजिक सम्मान और करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा है।
खरगे ने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाए।
क्या हुआ था हल्द्वानी में?
कांग्रेस के मुताबिक, 8 अगस्त 2026 को हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा हुई थी। कांग्रेस का आरोप है कि इसके दो दिन बाद यानी 10 अगस्त को उस मंच का कथित तौर पर ‘शुद्धिकरण’ किया गया।
कांग्रेस नेताओं ने इस घटना को जातिगत भेदभाव और दलित समुदाय के अपमान से जोड़ते हुए कार्रवाई की मांग की थी।
राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए बीजेपी और आरएसएस पर गंभीर आरोप लगाए थे।
आयोजकों ने जातिगत आरोपों से किया इनकार
हालांकि, कथित तौर पर मंच का शुद्धिकरण करने वाले संगठन और स्थानीय लोगों ने कांग्रेस के जातिगत भेदभाव के आरोपों को खारिज किया था।
यानी इस पूरे विवाद में कांग्रेस एक तरफ इसे छुआछूत और दलित अपमान से जोड़ रही है, जबकि दूसरी तरफ संबंधित पक्ष जातिगत मंशा से इनकार कर रहे हैं।
अब खरगे के नड्डा को लिखे पत्र के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। देखना होगा कि उत्तराखंड सरकार और पुलिस इस मामले में FIR और जांच को लेकर क्या कदम उठाती है।