टीम इंडिया में वापसी की कोशिश कर रहे मोहम्मद शमी ने दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल में शानदार गेंदबाजी करते हुए अपनी दावेदारी और मजबूत कर दी है। बेंगलुरु के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ग्राउंड पर सेंट्रल जोन के खिलाफ शमी ने दोनों पारियों में कुल पांच विकेट लेकर साबित किया कि बड़े स्तर पर उनका अनुभव अब भी बेहद उपयोगी हो सकता है।
शमी के इस प्रदर्शन ने टीम इंडिया के चयनकर्ताओं के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या अनुभवी तेज गेंदबाज को एक बार फिर भारतीय टीम में मौका दिया जाए?
दोनों पारियों में शमी का दबदबा
मोहम्मद शमी ने मुकाबले की पहली पारी में 16 ओवर गेंदबाजी की और 42 रन देकर दो विकेट हासिल किए। उन्होंने यश राठौर और अरशद खान को अपना शिकार बनाया।
यश राठौर का विकेट खास रहा। शमी ने लगातार गेंदों से बल्लेबाज पर दबाव बनाया और फिर अपनी योजना के मुताबिक उन्हें बोल्ड कर दिया। उनकी गेंदबाजी में अनुभव और परिस्थितियों को पढ़ने की क्षमता साफ नजर आई।
दूसरी पारी में भी शमी ने अपनी लय बरकरार रखी। उन्होंने 16 ओवर में 56 रन देकर तीन विकेट लिए। इस पारी में आर्यन जुयाल, यश राठौर और हर्ष दुबे उनके शिकार बने।
हर्ष दुबे का कैच भी मुकाबले के चर्चित पलों में रहा।
शमी के स्पेल से ईस्ट जोन फाइनल के करीब
मुकाबले में सेंट्रल जोन ने पहली पारी में 266 रन बनाए थे। रिंकू सिंह ने टीम के लिए संघर्षपूर्ण अर्धशतक लगाया। इसके जवाब में ईस्ट जोन की पारी 166 रन पर समाप्त हो गई। हालांकि, 15 साल के उपकप्तान वैभव सूर्यवंशी ने 92 रन की शानदार पारी खेलकर अपनी टीम को संभालने की कोशिश की।
दूसरी पारी में सेंट्रल जोन की बल्लेबाजी पूरी तरह लड़खड़ा गई। मोहम्मद शमी और मुकेश कुमार की गेंदबाजी के सामने पूरी टीम सिर्फ 158 रन पर ऑलआउट हो गई।
अब ईस्ट जोन को मुकाबला जीतने के लिए 159 रन बनाने हैं। ऐसे में टीम के पास फाइनल में जगह बनाने का मजबूत मौका है।
2025 के बाद अब कमबैक की तैयारी?
शमी के लिए इस प्रदर्शन की अहमियत सिर्फ दलीप ट्रॉफी तक सीमित नहीं है। वह लंबे समय से भारतीय टीम में वापसी का इंतजार कर रहे हैं।
शमी ने भारत के लिए 64 टेस्ट में 229 विकेट लिए हैं। वनडे में उनके नाम 108 मैचों में 206 विकेट हैं, जबकि 25 टी20 इंटरनेशनल मैचों में वह 27 विकेट हासिल कर चुके हैं।
उन्होंने मार्च 2025 में भारत के लिए अपना आखिरी व्हाइट-बॉल मुकाबला खेला था। टेस्ट क्रिकेट में उनकी आखिरी उपस्थिति जून 2023 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल में हुई थी।
तेज गेंदबाजी में अनुभव बनाम युवा विकल्प
शमी के प्रदर्शन के बाद भारतीय टीम के चयनकर्ताओं के सामने अब अनुभवी और युवा तेज गेंदबाजों के बीच संतुलन का सवाल भी अहम हो सकता है।
एक तरफ टीम के पास युवा पेसर्स का विकल्प है, वहीं दूसरी तरफ शमी का अंतरराष्ट्रीय अनुभव और बड़े मुकाबलों में विकेट लेने का रिकॉर्ड उन्हें अलग बनाता है।
दलीप ट्रॉफी में पांच विकेट लेकर शमी ने फिलहाल अपनी तरफ से जवाब दे दिया है। अब निगाहें चयनकर्ताओं पर हैं कि उनके इस प्रदर्शन को भारतीय टीम में वापसी के लिए कितना महत्व दिया जाता है।
शमी की गेंदों ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है—क्या टीम इंडिया को अपने इस अनुभवी पेसर की अभी भी जरूरत है?