लखनऊ: उत्तर प्रदेश कैडर की चर्चित आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने करीब 13 साल की सेवा के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे की मंजूरी फिलहाल गृह मंत्रालय में लंबित है। अचानक लिए गए इस फैसले ने लोगों को हैरान कर दिया था। अब खुद दिव्या मित्तल ने एक मीडिया इंटरव्यू में अपने इस्तीफे की वजह स्पष्ट की है।
दिव्या मित्तल के मुताबिक, उनका इस्तीफा अचानक लिया गया फैसला नहीं है। उन्होंने काफी सोच-विचार के बाद यह कदम उठाया है। उनका कहना है कि वह अब अपने परिवार और जिंदगी से जुड़ी दूसरी रुचियों के लिए समय निकालना चाहती हैं, जो आईएएस की नौकरी में रहते हुए उनके लिए संभव नहीं हो पा रहा था।
‘अब परिवार और पुराने शौक के लिए समय चाहिए’
दिव्या मित्तल ने कहा कि उन्होंने किसी दबाव में इस्तीफा नहीं दिया है। वह पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ अपने कुछ पुराने शौक भी पूरे करना चाहती हैं। उनका कहना है कि नौकरी में रहते हुए परिवार और दूसरी रुचियों को पर्याप्त समय देना मुश्किल था, इसलिए उन्होंने सेवा से अलग होने का फैसला किया।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस्तीफा स्वीकार होने के बाद वह समाज सेवा, शिक्षण या लेखन के क्षेत्र में काम कर सकती हैं। हालांकि, इनमें से किसी क्षेत्र को लेकर उन्होंने अभी अंतिम फैसला नहीं किया है। वह आगे सोच-विचार के बाद तय करेंगी कि किस दिशा में जाना है।
‘IAS की नौकरी जिंदगी का एक चैप्टर, पूरी लाइफ नहीं’
दिव्या मित्तल ने अपने फैसले को लेकर कहा कि आईएएस की नौकरी उनकी जिंदगी का सिर्फ एक अध्याय थी, पूरी जिंदगी नहीं। दो बेटियों की मां दिव्या मित्तल अब अपना अधिक समय परिवार को देना चाहती हैं।
उन्होंने आईएएस में बिताए 13 वर्षों को यादगार सफर बताया और इस दौरान मिले अनुभवों के लिए अपने सहयोगियों और आम लोगों का आभार जताया।
दिव्या मित्तल 2013 बैच की यूपी कैडर की आईएएस अधिकारी हैं। वह देवरिया, मिर्जापुर और संत कबीर नगर की जिलाधिकारी रह चुकी हैं। वर्तमान में वह राजस्व परिषद में विशेष सचिव के पद पर तैनात हैं। उन्होंने आईआईटी दिल्ली और आईआईएम बेंगलुरु से पढ़ाई की है।
लंदन की नौकरी छोड़ी, फिर दोनों पति-पत्नी बने आईएएस
आईएएस बनने से पहले दिव्या मित्तल लंदन में जेपी मॉर्गन में काम करती थीं। उनके पति गगनदीप सिंह ढिल्लों भी लंदन में सिटीग्रुप में नौकरी करते थे। विदेश में सफल करियर होने के बावजूद दोनों को लगा कि कुछ कमी रह गई है। इसके बाद दोनों भारत लौटे और सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की।
गगनदीप सिंह ढिल्लों ने पहले ही प्रयास में परीक्षा पास कर आईएएस की राह पकड़ी। वहीं दिव्या मित्तल ने दूसरे प्रयास में वर्ष 2012 में 68वीं रैंक हासिल की और आईएएस बनीं।
बाद में उनके पति गगनदीप सिंह ढिल्लों ने भी सिविल सेवा छोड़ दी। वह वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में संयुक्त महानिदेशक के पद पर रहे और वर्ष 2022 में सेवा से इस्तीफा दे दिया। अब दिव्या मित्तल ने भी आईएएस से अलग होने का फैसला किया है।
इस्तीफे के बाद भी सोशल मीडिया पर सवाल बरकरार
दिव्या मित्तल ने अपने इस्तीफे की वजह को लेकर स्थिति साफ कर दी है, लेकिन सोशल मीडिया पर इसे लेकर चर्चाएं और कयास जारी हैं। इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है।
दरअसल, मिर्जापुर में पेयजल परियोजना को लेकर दिव्या मित्तल को काफी लोकप्रियता मिली थी। इसके बाद उनका तबादला कर दिया गया था और कुछ समय के लिए उन्हें प्रतीक्षा सूची में भी रखा गया था। मई 2024 में उन्हें देवरिया से हटाकर लखनऊ में राजस्व विभाग में विशेष सचिव बनाया गया था। इस तैनाती को उनके आलोचकों और समर्थकों के एक वर्ग ने हाशिये की पोस्टिंग के तौर पर देखा था।
अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर साधा निशाना
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी दिव्या मित्तल के इस्तीफे को लेकर योगी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा शासन व्यवस्था में ईमानदार अधिकारियों के लिए काम करना मुश्किल बना दिया गया है। उनके मुताबिक, अधिकारियों पर अनुचित दबाव डाला जाता है और इसी वजह से कुछ अधिकारी सेवा छोड़ने का फैसला कर रहे हैं।